पालघर: दैनिक ‘मुंबई राजनीति न्यूज़’ के लिए संदीप जोशी का विशेष लेख : अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर वृद्धावस्था को नई सोच और सकारात्मक जीवनशैली से दें नई दिशा।
पालघर: दैनिक ‘मुंबई राजनीति न्यूज़’ के लिए संदीप जोशी का विशेष लेख : अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर वृद्धावस्था को नई सोच और सकारात्मक जीवनशैली से दें नई दिशा।
अखिलेश चौबे
पालघर। मन की प्रत्येक अवस्था में होने वाले परिवर्तन के समय मनुष्य न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक रूप से भी असहज महसूस करता है। जीवन की हर परिवर्तनशील अवस्था में उसके मन में यह चिंता रहती है कि वह अपने वातावरण और समाज के साथ किस प्रकार सामंजस्य स्थापित करे। आमतौर पर अधिकांश लोग वृद्धावस्था में प्रवेश करते ही अनेक प्रकार की मानसिक दुविधाओं का सामना करने लगते हैं।
वृद्धावस्था की ओर बढ़ते ही व्यक्ति शारीरिक कमजोरी महसूस करने लगता है। उसे लगने लगता है कि वह धीरे-धीरे समाज के लिए अनुपयोगी होता जा रहा है। यही सोच कई बार उसके आत्मविश्वास को प्रभावित करने लगती है।
वह सोचने लगता है कि उम्र के इस पड़ाव तक पहुंचने से पहले उसे अपनी सभी पारिवारिक जिम्मेदारियां पूरी कर लेनी चाहिए थीं। यदि किसी कारणवश कोई कर्तव्य पूरा नहीं हो पाया हो तो उसका मन दुखी रहने लगता है। परिणामस्वरूप मन में लगातार बनी रहने वाली चिंताएं उसके शारीरिक स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव डाल सकती हैं।
एक और चिंता बुजुर्गों के मन में अक्सर बनी रहती है कि जब तक वे कमाते रहे, तब तक परिवार में उन्हें सम्मान मिलता रहा। लेकिन जब उनकी अर्जन क्षमता कम हो जाएगी, तब कहीं परिवार में उनकी उपेक्षा न होने लगे। ऐसी आशंकाओं और कल्पनाओं के कारण व्यक्ति कई बार वास्तविक परिस्थितियों का सामना करने से बचने लगता है और अपने मन को शरीर तथा बदलती परिस्थितियों के साथ सामंजस्य नहीं बिठा पाता।
ऐसे समय में बुजुर्गों को जीवन में होने वाले परिवर्तनों के साथ सामंजस्य स्थापित करने, शारीरिक, मानसिक और पारिवारिक समस्याओं का समाधान खोजने तथा अपनी संचित राशि का उचित और सुरक्षित उपयोग करने के लिए उचित परामर्श की आवश्यकता होती है।
परामर्श के माध्यम से उन्हें बेहतर और सुरक्षित जीवन के लिए उपयोगी जानकारी दी जा सकती है। उदाहरण के लिए, पेंशन राशि समय पर प्राप्त करने के लिए आवश्यक दस्तावेजी औपचारिकताओं और सावधानियों की जानकारी, संचित राशि का विवेकपूर्ण उपयोग, भविष्य के लिए योजनाबद्ध निवेश तथा अपनी आय, व्यय और ब्याज से संबंधित योजना को व्यवस्थित रूप से निर्धारित करना आदि।
बुजुर्गों के लिए स्वास्थ्य संबंधी परामर्श भी अत्यंत आवश्यक है। उन्हें नियमित रूप से स्वास्थ्य की जांच करानी चाहिए। किसी भी प्रकार की बीमारी के उपचार में लापरवाही नहीं करनी चाहिए और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार पूरा होने तक उसे जारी रखना चाहिए।
इसके साथ ही बुजुर्ग आध्यात्मिक गतिविधियों और ध्यान के माध्यम से भी स्वयं को तनावमुक्त रख सकते हैं। इसके लिए ऐसा समय निर्धारित करना चाहिए, जिससे परिवार के अन्य सदस्यों की दिनचर्या में अनावश्यक व्यवधान न आए।
वृद्धावस्था में व्यक्ति अपनी रुचि के अनुसार रचनात्मक कार्यों में भी सक्रिय रह सकता है। संगीत, साहित्य, लेखन-सृजन, पठन-पाठन, बागवानी जैसी गतिविधियां मन को सक्रिय और प्रसन्न रखने में सहायक हो सकती हैं। इसके अलावा किसी सामाजिक संस्था से जुड़कर अपने अनुभव और सेवाओं का लाभ समाज को भी दिया जा सकता है।
बदलती दिनचर्या और इंद्रियों की कमजोर होती क्षमता के कारण बुजुर्गों को कदापि हतोत्साहित नहीं होना चाहिए। यह जीवन की वह पारी है, जिसमें अनुभव सबसे बड़ी पूंजी होता है। आवश्यकता केवल इस बात की है कि इस अनुभव को सकारात्मक सोच, स्वस्थ दिनचर्या और रचनात्मक गतिविधियों के साथ जोड़ा जाए।
‘सेकंड इनिंग’ का अर्थ जीवन से पीछे हट जाना या रुक जाना नहीं है, बल्कि जीवन को एक नए अंदाज में जीना है। जीवन के इस संध्याकाल में व्यक्ति अपने अतीत को देख सकता है, पूर्व में हुई गलतियों को महसूस कर सकता है और जहां तक संभव हो, उनमें सुधार लाने का प्रयास कर सकता है।
वृद्धावस्था जीवन का अंत नहीं, बल्कि अनुभवों से समृद्ध एक नई शुरुआत है। सकारात्मक सोच, स्वस्थ जीवनशैली, रचनात्मक गतिविधियां और सामाजिक जुड़ाव व्यक्ति को इस पड़ाव पर भी आत्मविश्वास और सम्मान के साथ जीवन जीने की प्रेरणा दे सकते हैं।
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