पालघर: तारापुर एमआईडीसी में ओलियम गैस रिसाव से हड़कंप - भघेरिया केमिकल्स से निकली जहरीली गैस।प्रशासन की आपात चेतावनी; गांवों में सतर्कता, तकनीकी दल जुटा।

पालघर: तारापुर एमआईडीसी में ओलियम गैस रिसाव से हड़कंप - भघेरिया केमिकल्स से निकली जहरीली गैस।
प्रशासन की आपात चेतावनी; गांवों में सतर्कता, तकनीकी दल जुटा।

अखिलेश चौबे 
पालघर। जिले के बोईसर क्षेत्र स्थित तारापुर एमआईडीसी के डी-ज़ोन में सोमवार दोपहर एक गंभीर औद्योगिक दुर्घटना हुई, जब सालवड और पास्थल गांवों के समीप स्थित Bhageria Chemicals (पूर्व नाम — Zenith Chemicals) के कारखाने में संग्रहण टैंक से अत्यंत खतरनाक ओलियम गैस का रिसाव हो गया। दोपहर लगभग 2 बजे के आसपास हुई इस घटना के बाद पूरे औद्योगिक क्षेत्र तथा आसपास के ग्रामीण एवं आवासीय इलाकों में भय और अफरा-तफरी का वातावरण बन गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गैस के वातावरण में फैलते ही कई स्थानों पर सफेद धुएँ अथवा धुंध जैसी स्थिति दिखाई देने लगी। हवा की दिशा के कारण गैस तेजी से फैलती चली गई, जिससे आसपास के उद्योगों में कार्यरत श्रमिकों तथा नागरिकों को आंखों में जलन, गले में खराश, सूखापन और सांस लेने में कठिनाई जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा।
ओलियम एक अत्यंत संक्षारक रासायनिक पदार्थ है, जो वायु के संपर्क में आते ही सल्फर डाइऑक्साइड और अन्य सल्फर ऑक्साइड्स में परिवर्तित हो जाता है। ये गैसें मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर रूप से हानिकारक मानी जाती हैं।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, अग्निशमन दल, पुलिस विभाग तथा आपदा प्रबंधन की टीमें तत्काल घटनास्थल पर पहुंच गईं और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आपात कार्रवाई शुरू कर दी गई।
पालघर की जिलाधिकारी एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की अध्यक्ष डॉ. इंदू रानी जाखड़ ने बताया कि नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी संबंधित विभागों के समन्वय से स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
घटना स्थल के निकट स्थित सालवड और पास्थल गांवों के निवासियों को विशेष रूप से सावधान रहने की सलाह दी गई है। प्रशासन द्वारा सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से नागरिकों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, ताकि किसी भी प्रकार की जनहानि या स्वास्थ्य संकट से बचा जा सके।
नागरिकों से कहा गया है कि वे तुरंत सुरक्षित स्थान पर चले जाएँ और यथासंभव हवा की दिशा के विपरीत दिशा में क्षेत्र से दूर हटें। बाहर निकलना अत्यंत आवश्यक हो तो नाक और मुंह को गीले कपड़े, रूमाल या मास्क से ढकें।
यदि उपलब्ध हो तो दस्ताने, चश्मा, मास्क तथा पूरे शरीर को ढकने वाले वस्त्र पहनने की सलाह दी गई है। गैस के संपर्क में आने पर त्वचा या आंखों को कम से कम 15 से 20 मिनट तक स्वच्छ पानी से धोना चाहिए और तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध स्थिति की जानकारी तुरंत अग्निशमन दल, पुलिस या आपदा प्रबंधन विभाग को दें तथा शांतिपूर्वक सुरक्षित स्थान पर जाएँ। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांग व्यक्तियों को प्राथमिकता के साथ सहायता प्रदान करने को कहा गया है।
प्रशासन ने स्पष्ट रूप से कहा है कि घबराहट में कोई भी गलत कदम न उठाएँ, क्योंकि इससे दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ सकती है। रिसाव वाले रसायन को छूने से गंभीर रासायनिक जलन हो सकती है, इसलिए उससे दूर रहें।
रिसाव स्थल पर जाने या गैस को सूंघने का प्रयास न करें। गैस पर सीधे पानी डालना भी खतरनाक हो सकता है, क्योंकि इससे तीव्र रासायनिक प्रतिक्रिया उत्पन्न होकर धुएँ की मात्रा बढ़ सकती है। प्रशासन की अनुमति मिलने तक प्रभावित क्षेत्र में वापस न लौटने की भी सलाह दी गई है।
इसके अतिरिक्त दूषित भोजन या पानी का उपयोग न करने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की गई है।
प्राथमिक जानकारी के अनुसार गैस रिसाव को नियंत्रित करने के लिए विशेषज्ञ तकनीकी दल लगातार कार्य कर रहा है। प्रभावित क्षेत्र की वायु गुणवत्ता की जांच भी शुरू कर दी गई है। प्रभावित नागरिकों के लिए चिकित्सा जांच और उपचार की व्यवस्था उपलब्ध कराई जा रही है।
जिलाधिकारी डॉ. इंदू रानी जाखड़ ने नागरिकों से अपील की है कि वे अप्रमाणित सूचनाओं पर विश्वास न करें और केवल आधिकारिक निर्देशों का ही पालन करें। जिला प्रशासन सभी संबंधित विभागों के समन्वय से स्थिति पर बारीकी से नजर बनाए हुए है और आगे की जानकारी समय-समय पर जारी की जाएगी।

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