पालघर: 265 तालुके सूखाग्रस्त, फिर पालघर क्यों बाहर? बहुजन एकता संगठन ने शासन से मांगा जवाब।खरीफ 2026 में ‘ट्रिगर-1’ लागू होने के बावजूद पालघर जिले के एक भी तालुके का सूची में नाम नहीं।
पालघर: 265 तालुके सूखाग्रस्त, फिर पालघर क्यों बाहर? बहुजन एकता संगठन ने शासन से मांगा जवाब।
खरीफ 2026 में ‘ट्रिगर-1’ लागू होने के बावजूद पालघर जिले के एक भी तालुके का सूची में नाम नहीं।
अखिलेश चौबे
पालघर। खरीफ मौसम 2026 में बारिश की कमी और अन्य निर्धारित मानदंडों के आधार पर महाराष्ट्र शासन ने राज्य के 358 तालुकों में से 265 तालुकों में ‘प्रथम संकेत’ यानी ट्रिगर-1 लागू कर सूखाग्रस्त जैसी स्थिति घोषित की है। शासन के 26 सितंबर 2026 के निर्णय के अनुसार संबंधित क्षेत्रों में फसल नुकसान का पंचनामा और स्थिति का आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं।
हालांकि, इस सूची में पालघर जिले के एक भी तालुके को शामिल नहीं किए जाने को लेकर जिले में सवाल उठने लगे हैं। बहुजन एकता संगठन ने इस पर आपत्ति जताते हुए शासन से पालघर जिले की स्थिति का वस्तुनिष्ठ पुनर्मूल्यांकन करने की मांग की है। संगठन के अनुसार शासन की आधिकारिक सूची में पालघर जिले के सामने ‘निरंक’ दर्ज किया गया है।
बहुजन एकता संगठन का कहना है कि पालघर जिले के अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश के अंतराल, खेती से जुड़ी समस्याओं और किसानों के सामने उत्पन्न परिस्थितियों को देखते हुए यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि जिले के किसी भी तालुके में ट्रिगर-1 के मानदंड क्यों लागू नहीं हुए।
संगठन ने सवाल उठाया है कि जब राज्य के 358 में से 265 तालुकों में ट्रिगर-1 लागू किया गया है, तब पालघर जिले के सभी तालुकों को सूची से बाहर रखने के पीछे शासन का आधार क्या है। संगठन ने इस मामले में जिले के जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए उनसे किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति शासन के सामने रखने की मांग की है।
राज्य सरकार द्वारा जारी निर्णय के अनुसार ट्रिगर-1 के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में जिलाधिकारियों को फसल नुकसान का पंचनामा करने तथा संबंधित स्थिति का आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसी पृष्ठभूमि में बहुजन एकता संगठन की ओर से पालघर जिलाधिकारी को लिखित निवेदन सौंपा गया। निवेदन के माध्यम से मांग की गई कि पालघर जिले के सभी तालुकों की स्थिति का सूखाग्रस्त घोषित करने के निर्धारित मानदंडों के आधार पर दोबारा परीक्षण किया जाए।
संगठन ने कहा कि केवल उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर नहीं, बल्कि जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में खेती की वास्तविक स्थिति, बारिश के अंतराल और फसलों पर पड़े प्रभाव का भी वस्तुनिष्ठ तरीके से आकलन किया जाना चाहिए। इसके बाद पालघर जिले के संबंध में उचित निर्णय लिया जाए।
बहुजन एकता संगठन ने शासन से पालघर जिले को सूखाग्रस्त स्थिति के मानदंडों के आधार पर तत्काल पुनः जांचने तथा इस संबंध में स्पष्ट भूमिका घोषित करने की मांग की है।
संगठन ने अपने निवेदन में यह भी चेतावनी दी है कि यदि उसकी मांग पर शासन की ओर से उचित ध्यान नहीं दिया गया और पालघर जिले की स्थिति का पुनर्मूल्यांकन नहीं किया गया, तो संगठन की ओर से आंदोलन शुरू किया जाएगा।
निवेदन सौंपने के अवसर पर बहुजन एकता संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष साईनाथ रावते, उपाध्यक्ष लहू खरपडे, महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष कपिल सूर्यवंशी, पालघर जिला उपाध्यक्ष रामदास ढाक, जिला सचिव संतोष गुहे, डहाणू तालुका उपाध्यक्ष नवसू चव्हाण तथा जिला समिति के अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
बहुजन एकता संगठन ने मांग की है कि शासन पालघर जिले को सूखाग्रस्त सूची से बाहर रखने के कारणों को स्पष्ट करे और जिले के किसानों की वास्तविक स्थिति का निष्पक्ष एवं वस्तुनिष्ठ आकलन कर आवश्यक निर्णय ले। अब इस मांग पर शासन की ओर से क्या कदम उठाया जाता है, इस पर पालघर जिले के किसानों और नागरिकों की नजर बनी हुई है।
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