मुंबई: 2023 में हृदयाघात से 35,637 मौतें, कम उम्र में हृदय संबंधी जोखिम पहचानने की जरूरत।

मुंबई: 2023 में हृदयाघात से 35,637 मौतें, कम उम्र में हृदय संबंधी जोखिम पहचानने की जरूरत।

अखिलेश चौबे 
मुंबई/ठाणे। हृदय रोग को लंबे समय तक बढ़ती उम्र से जुड़ी समस्या माना जाता रहा है, लेकिन अब कम उम्र में हृदयाघात और अचानक होने वाली मौतों के मामले चिंता का विषय बन रहे हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 में देश में अचानक हुई 63,609 मौतें दर्ज की गईं, जिनमें 35,637 मौतें हृदयाघात के कारण हुईं। वर्ष 2022 में हृदयाघात से 32,410 मौतें दर्ज की गई थीं।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, 45 से 60 वर्ष की आयु के लोगों में अचानक होने वाली मौतों और हृदयाघात के मामले सबसे अधिक दर्ज किए गए। इसके बाद 30 से 45 वर्ष की आयु वाले लोगों का स्थान रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि ये आंकड़े इस बात की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं कि हृदय संबंधी जोखिमों की पहचान केवल अधिक उम्र में ही नहीं, बल्कि कम उम्र से ही की जानी चाहिए।
मीरा रोड स्थित वॉकहार्ट हॉस्पिटल्स के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. आशीष मिश्रा ने कहा कि हृदय रोग को अब केवल उम्र के आधार पर नहीं देखा जा सकता। विशेष रूप से ऐसे लोगों में, जिनमें एक से अधिक जोखिम कारक मौजूद हों, हृदय और रक्त वाहिकाओं से संबंधित जोखिमों की जल्द पहचान करना महत्वपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि तंबाकू का सेवन, शारीरिक गतिविधि की कमी, असंतुलित खान-पान, मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव और पर्याप्त नींद का अभाव हृदय रोग का खतरा बढ़ा सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और रक्त में वसा की असामान्यता जैसी स्थितियां कई बार लंबे समय तक स्पष्ट लक्षणों के बिना बनी रहती हैं और धीरे-धीरे हृदय तथा रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए नियमित स्वास्थ्य जांच को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
एपेक्स ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. आनंद राम ने कहा कि सीने में दर्द या दबाव, सांस फूलना, अचानक अधिक पसीना आना, असामान्य थकान और हृदय की धड़कन तेज होना जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हृदयाघात की स्थिति में प्रत्येक मिनट महत्वपूर्ण होता है। केवल कम उम्र का होना इस बात की गारंटी नहीं है कि व्यक्ति हृदय संबंधी जोखिम से मुक्त है। कई जोखिम कारक बिना किसी स्पष्ट संकेत के एक साथ मौजूद हो सकते हैं।
डॉ. राम के अनुसार, व्यक्ति के व्यक्तिगत एवं पारिवारिक चिकित्सकीय इतिहास, रक्तचाप, रक्त शर्करा, रक्त में वसा के स्तर और जीवनशैली को ध्यान में रखते हुए समय रहते हृदय संबंधी जोखिमों की पहचान करना आवश्यक है। जरूरत के अनुसार चिकित्सकीय जांच भी कराई जानी चाहिए।
विशेषज्ञों ने हृदय को स्वस्थ रखने के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित आहार और पर्याप्त नींद अपनाने की सलाह दी है। साथ ही तंबाकू से दूरी बनाए रखने तथा रक्तचाप, रक्त शर्करा और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना भी महत्वपूर्ण बताया गया है।
विश्व हृदय दिवस के अवसर पर विशेषज्ञों का संदेश है कि हृदय की देखभाल केवल उम्र बढ़ने के बाद शुरू करने के बजाय कम उम्र से ही हृदय संबंधी जोखिमों की पहचान और रोकथाम पर ध्यान देना चाहिए।

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