पालघर: जिले में ‘आदि कर्मयोगी फेलोशिप’ का सफल समापन, 12 विद्यार्थियों को मिले प्रमाणपत्र।जव्हार, विक्रमगढ़, डहाणू और तलासरी के आदिवासी क्षेत्रों में विद्यार्थियों ने किया विकास कार्यों का अध्ययन।
पालघर: जिले में ‘आदि कर्मयोगी फेलोशिप’ का सफल समापन, 12 विद्यार्थियों को मिले प्रमाणपत्र।
जव्हार, विक्रमगढ़, डहाणू और तलासरी के आदिवासी क्षेत्रों में विद्यार्थियों ने किया विकास कार्यों का अध्ययन।
अखिलेश चौबे
पालघर। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत पालघर जिला प्रशासन और सोनोपंत दांडेकर महाविद्यालय, पालघर के संयुक्त तत्वावधान में संचालित ‘आदि कर्मयोगी फेलोशिप’ का सफल समापन हुआ। इस पहल में भाग लेने वाले अर्थशास्त्र विषय के 12 विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। फेलोशिप के दौरान विद्यार्थियों ने आदिवासी क्षेत्रों में प्रशासनिक व्यवस्था, विकास कार्यों, शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का जमीनी स्तर पर अध्ययन किया।
जिलाधिकारी डॉ. इंदु रानी जाखड़ के मार्गदर्शन में आयोजित समापन कार्यक्रम में जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज रानडे, परियोजना अधिकारी एवं सहायक जिलाधिकारी पी. के. सिद्धार्थ रामकुमार, परिवीक्षाधीन आईएएस अधिकारी पी. वी. अमल, सहायक परियोजना अधिकारी दीपक टिके, नियोजन अधिकारी सतीश रास्ते सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
जनवरी 2026 में शुरू हुई इस फेलोशिप के अंतर्गत जव्हार, विक्रमगढ़, डहाणू और तलासरी जैसे आदिवासी एवं आकांक्षी तालुकों में तीन-तीन फेलो नियुक्त किए गए थे। तालुका प्रशासन के साथ मिलकर काम करने के दौरान विद्यार्थियों को सरकारी योजनाओं और क्षेत्रीय स्तर पर संचालित विकास कार्यों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम के शुरुआती चरण में विद्यार्थियों ने तालुका स्तरीय परिचय कार्यक्रमों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन और गांव स्तर पर कार्यरत संस्थाओं की जानकारी प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने 12 गांवों के 12 जिला परिषद विद्यालयों को शामिल करते हुए प्राथमिक शिक्षा के नीतिगत पुनर्गठन से संबंधित अध्ययन किया।
फेलोशिप के अगले चरण में विद्यार्थियों ने स्वास्थ्य अधिकारियों और अग्रिम पंक्ति में कार्यरत स्वास्थ्य कर्मचारियों से प्राप्त जानकारी के आधार पर मातृ मृत्यु के कारणों तथा इसके लिए जिम्मेदार विभिन्न कारकों का अध्ययन किया। इस प्रक्रिया से उन्हें आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं और स्थानीय परिस्थितियों से जुड़ी चुनौतियों को समझने का अवसर मिला।
फेलोशिप के अंतिम चरण में विद्यार्थियों ने 66 ग्राम पंचायतों के 1,375 लाभार्थियों से संवाद किया। इस दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), स्वच्छ भारत अभियान और जल जीवन मिशन का सामाजिक अंकेक्षण किया गया।
विद्यार्थियों ने क्षेत्रीय स्तर पर साक्ष्य एकत्र किए और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के अनुभवों तथा समुदाय के दृष्टिकोण को समझा। प्रशासन के अनुसार, विद्यार्थियों द्वारा जुटाई गई जानकारी और जमीनी स्तर के निष्कर्ष विभागीय समीक्षा तथा आदिवासी क्षेत्रों की भविष्य की विकास योजनाओं के निर्माण में उपयोगी साबित हो सकते हैं।
इस अवसर पर जिलाधिकारी डॉ. इंदु रानी जाखड़ ने कहा कि यह फेलोशिप केवल प्रमाणपत्र प्राप्त करने का अवसर नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष अनुभव, प्रशासनिक व्यवस्था की समझ, सामाजिक प्रतिबद्धता, जिम्मेदारी की भावना और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का सार्थक मंच प्रदान करती है।
उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन इस फेलोशिप को नियमित कार्यक्रम के रूप में आगे भी जारी रखने पर विचार कर रहा है, ताकि विद्यार्थियों को प्रशासन और समाज के बीच काम करने का व्यावहारिक अनुभव मिलता रहे।
जिला प्रशासन ने मुख्यमंत्री फेलो एवं समन्वयक सुश्री इंद्रायणी आपटे के महत्वपूर्ण सहयोग की सराहना की। इसके साथ ही अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष एवं महाविद्यालयीन समन्वयक प्रो. संतोष शिरसाट और उनकी टीम के प्रयासों की भी प्रशंसा की गई।
‘आदि कर्मयोगी फेलोशिप’ के माध्यम से विद्यार्थियों को आदिवासी क्षेत्रों की वास्तविक परिस्थितियों को समझने, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन का आकलन करने और स्थानीय समुदायों की जरूरतों से जुड़ने का अवसर मिला। यह पहल शैक्षणिक ज्ञान को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ने के साथ क्षेत्रीय विकास की योजना बनाने में उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
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