पालघर: जिले में ‘मेरा गांव, स्वास्थ्य संपन्न गांव’ अभियान को गति, स्वस्थ गांवों के निर्माण पर जोर, स्वच्छता, पोषण, टीकाकरण और रोगों की रोकथाम पर विशेष ध्यान।
पालघर: जिले में ‘मेरा गांव, स्वास्थ्य संपन्न गांव’ अभियान को गति, स्वस्थ गांवों के निर्माण पर जोर, स्वच्छता, पोषण, टीकाकरण और रोगों की रोकथाम पर विशेष ध्यान।
अखिलेश चौबे
पालघर। ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों के स्वास्थ्य स्तर में सुधार लाने, निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता देने तथा जनभागीदारी के माध्यम से स्वस्थ गांवों का निर्माण करने के उद्देश्य से महाराष्ट्र शासन के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग द्वारा ‘मेरा गांव, स्वास्थ्य संपन्न गांव’ अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला परिषद पालघर के स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिलास्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
इस कार्यशाला की अध्यक्षता जिला परिषद के उपमुख्य कार्यकारी अधिकारी (पंचायत) अशोक पाटील ने की। इस अवसर पर जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संतोष चौधरी, जिला कार्यक्रम अधिकारी (महिला एवं बाल विकास) व्यंकटराव हुंडेकर तथा माता एवं बाल देखभाल अधिकारी डॉ. वैदेही माळवी उपस्थित थीं। कार्यशाला में सरपंच, खंड विकास अधिकारी, तालुका स्वास्थ्य अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी, आशा स्वयंसेविकाएं तथा संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कार्यशाला में अध्यक्षीय मार्गदर्शन करते हुए अशोक पाटील ने कहा कि बेहतर स्वास्थ्य इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने गांवों में स्वच्छता बनाए रखने, आंगनवाड़ी केंद्रों में शौचालयों की उपलब्धता एवं साफ-सफाई सुनिश्चित करने तथा प्लास्टिक के उपयोग को समाप्त करने की दिशा में विशेष ध्यान देने का आह्वान किया। उन्होंने सभी विभागों से आपसी समन्वय के साथ काम करने की अपील की।
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संतोष चौधरी ने स्वच्छ पेयजल, कचरे का उचित निस्तारण, जीवनशैली में स्वास्थ्यवर्धक बदलाव तथा नागरिकों की सक्रिय भागीदारी के महत्व पर प्रकाश डाला।
वहीं, जिला कार्यक्रम अधिकारी (महिला एवं बाल विकास) व्यंकटराव हुंडेकर ने महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से आंगनवाड़ी केंद्रों में स्वास्थ्य, पोषण और स्वच्छता के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।
इस अभियान के प्रमुख घटकों में संक्रामक एवं गैर-संक्रामक बीमारियों पर नियंत्रण, माता एवं बाल स्वास्थ्य, शत-प्रतिशत टीकाकरण, कुपोषण का उन्मूलन तथा निवारक स्वास्थ्य सेवाएं शामिल हैं।
अभियान के अंतर्गत क्षय रोग, कुष्ठ रोग, मलेरिया, डेंगू और जलजनित बीमारियों की रोकथाम एवं नियंत्रण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही मधुमेह, उच्च रक्तचाप और कैंसर जैसी बीमारियों की जांच, समय पर निदान तथा नियमित उपचार को भी प्राथमिकता दी जाएगी।
गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीकरण, नियमित स्वास्थ्य जांच और संस्थागत प्रसव को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया जाएगा, ताकि माताओं और बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार लाया जा सके।
अभियान को प्रभावी बनाने के लिए ग्राम पंचायत, स्वास्थ्य विभाग, ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण समितियों, महिला स्वयं सहायता समूहों, आशा स्वयंसेविकाओं और ग्रामीणों के समन्वय से गांववार स्वास्थ्य कार्ययोजनाएं तैयार की जाएंगी। इन योजनाओं के माध्यम से गांवों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की पहचान कर आवश्यक उपायों को लागू किया जाएगा।
स्वच्छता, शुद्ध पेयजल, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, नशामुक्ति और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाकर नागरिकों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
अभियान के अंतर्गत निर्धारित मानदंडों के आधार पर ग्राम पंचायतों के कार्यों का मूल्यांकन किया जाएगा। कुल अंकों में से कम से कम 70 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाली ग्राम पंचायतों को जिलास्तरीय समिति द्वारा ‘स्वास्थ्य संपन्न ग्राम’ घोषित किया जाएगा।
ऐसी ग्राम पंचायतों को स्मृति चिह्न और प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त उत्कृष्ट कार्य करने वाली ग्राम पंचायतों और स्वास्थ्य संस्थानों को पुरस्कार एवं प्रोत्साहन देने का भी प्रावधान किया गया है।
इस जिलास्तरीय कार्यशाला के माध्यम से ग्राम पंचायत स्तर पर स्वास्थ्य, स्वच्छता, पोषण और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में मार्गदर्शन दिया गया। अभियान का उद्देश्य विभिन्न विभागों और ग्रामीण समुदाय के सामूहिक प्रयासों से गांवों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करना तथा नागरिकों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है।
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