पालघर: आकर्षण का केंद्र बना ‘बजरंग डांडिया रास’, रामकथा, मां अंबे की आराधना और गौसेवा का अनूठा संगम।पालघर, दहानू, बोईसर और तलासरी सहित दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुंच रहे श्रद्धालु।

पालघर: आकर्षण का केंद्र बना ‘बजरंग डांडिया रास’, रामकथा, मां अंबे की आराधना और गौसेवा का अनूठा संगम।
पालघर, दहानू, बोईसर और तलासरी सहित दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुंच रहे श्रद्धालु।

अखिलेश चौबे 
पालघर। जिले में धार्मिक आस्था, भारतीय संस्कृति और सेवा भावना का अनूठा संगम बना ‘बजरंग डांडिया रास’ इन दिनों पालघर जिले में आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। विश्व हिंदू परिषद एवं बजरंग दल, पालघर की ओर से आयोजित इस नौ दिवसीय कार्यक्रम में पालघर, दहानू, बोईसर, तलासरी सहित दूर-दराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। भगवान श्रीराम की कथा, मां अंबे की आराधना, पारंपरिक डांडिया रास और गौसेवा के संकल्प ने इस आयोजन को विशेष पहचान दिलाई है।
कार्यक्रम में वाराणसी से पधारे परम पूज्य कथावाचक श्री आनंद पराशर भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों, आदर्शों और रामायण की प्रेरणादायी घटनाओं का वर्णन कर रहे हैं। रामकथा की आयोजक कोमल नंदकुमार दुबे ने बताया कि कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म, मर्यादा, कर्तव्य और संस्कारों का संदेश दिया जा रहा है। दिन में श्रद्धालु रामकथा का श्रवण करते हैं, जबकि रात में पारंपरिक डांडिया रास का आयोजन होता है। भक्ति और उत्साह से भरे वातावरण में श्रद्धालु बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं।
‘बजरंग डांडिया रास’ की विशेषता यह है कि यहां धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ सेवा कार्यों को भी महत्व दिया जा रहा है। गौसेवा के लिए आर्थिक सहयोग देकर आयोजक जीवों के प्रति करुणा, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश दे रहे हैं। इस पहल के माध्यम से धार्मिक आस्था को सेवा भावना से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

धर्म, सेवा और संस्कार ही हमारा संकल्प : मुकेश दुबे
‘बजरंग डांडिया रास’ के अध्यक्ष मुकेश दुबे ने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य केवल धार्मिक उत्सव मनाना नहीं, बल्कि समाज में सेवा, संस्कार और सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा देना भी है। भगवान श्रीराम के आदर्श हमें कर्तव्य और सेवा की प्रेरणा देते हैं। इसी भावना से गौसेवा के लिए आर्थिक सहयोग दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी अपनी संस्कृति और परंपराओं को समझे तथा सामाजिक सेवा के कार्यों में आगे आए, यही इस आयोजन की सार्थकता है। उन्होंने यह भी कहा कि कार्यक्रम की सफलता सभी कार्यकर्ताओं की लगन और मेहनत का परिणाम है।
पालघर, दहानू, बोईसर और तलासरी सहित विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालुओं की भागीदारी इस कार्यक्रम के प्रति बढ़ते आकर्षण को दर्शाती है। रामकथा की आध्यात्मिकता, डांडिया रास की उमंग और गौसेवा का संदेश ‘बजरंग डांडिया रास’ को धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सरोकारों का मंच बना रहा है।

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