पालघर: जिला परिषद पालघर में डिजिटल प्रशासन की नई शुरुआत, एआई-सक्षम कागजरहित बैठक प्रणाली का शुभारंभ।
पालघर: जिला परिषद पालघर में डिजिटल प्रशासन की नई शुरुआत, एआई-सक्षम कागजरहित बैठक प्रणाली का शुभारंभ।
अखिलेश चौबे
पालघर। जिला परिषद पालघर के प्रशासनिक कामकाज में डिजिटल परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण शुरुआत हुई है। मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज रानडे की अध्यक्षता में 7 अक्टूबर 2026 को हुई स्थायी समिति की बैठक में कागजरहित बैठक के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित डिजिटल बैठक प्रबंधन प्रणाली का आधिकारिक शुभारंभ किया गया। महाराष्ट्र की स्थानीय स्वशासी संस्थाओं में इस प्रकार का प्रयोग लागू करने वाली पालघर जिला परिषद पहली संस्था बनी है।
इस पहल का प्रस्ताव जिला परिषद के उपमुख्य कार्यकारी अधिकारी (सामान्य प्रशासन) इजाज अहमद शरिक मसलत ने रखा था। मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज रानडे ने प्रस्ताव को तत्काल मंजूरी देते हुए प्रणाली के क्रियान्वयन को गति दी। उपमुख्य कार्यकारी अधिकारी के मार्गदर्शन और पहल पर 7 अक्टूबर की स्थायी समिति की बैठक पूरी तरह कागजरहित तरीके से इसी डिजिटल प्रणाली के माध्यम से संपन्न हुई।
यह डिजिटल प्रणाली देशम इंडस्ट्रीज के माध्यम से विकसित की गई है। देशम कृत्रिम बुद्धिमत्ता समाधान विभाग के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी जयंत देशमुख के नेतृत्व में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वचालन और डिजिटल प्रशासन तकनीक का उपयोग करते हुए इस प्रणाली को तैयार किया गया है।
7 अक्टूबर को हुई स्थायी समिति की बैठक में प्रणाली का प्रत्यक्ष उपयोग किया गया। बैठक के विषय, संबंधित दस्तावेज, उपस्थिति, चर्चा, निर्णय और कार्यवाही को डिजिटल माध्यम से संभाला गया।
आगामी चरण में सामान्य सभा, स्थायी समिति, विषय समितियों, पंचायत समितियों तथा ग्राम पंचायत स्तर की बैठकों को भी इसी डिजिटल प्रणाली के माध्यम से आयोजित करने की योजना है। इससे ग्राम पंचायत से लेकर जिला परिषद तक बैठक प्रबंधन अधिक सुव्यवस्थित, पारदर्शी और डिजिटल बनाने में मदद मिलेगी।
इस प्रणाली को बैठक से पहले की तैयारी से लेकर बैठक की कार्यवाही तथा निर्णयों के बाद उनके क्रियान्वयन तक पूरी प्रक्रिया को डिजिटल, पारदर्शी और कागजरहित बनाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।
बैठक में किस विषय पर क्या चर्चा हुई, किस सदस्य या अधिकारी ने क्या विचार रखा और क्या निर्णय लिया गया, इसका ध्वनि रिकॉर्डिंग के साथ-साथ पाठ के रूप में डिजिटल रिकॉर्ड भी उपलब्ध रहेगा। इससे भविष्य में “मैंने ऐसा नहीं कहा था” या “यह विषय बैठक में रखा ही नहीं गया था” जैसे विवादों पर काफी हद तक रोक लग सकेगी और बैठक की कार्यवाही का विश्वसनीय डिजिटल संदर्भ उपलब्ध रहेगा।
कागजरहित बैठक प्रणाली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सहायता से बैठक का कार्यवृत्त तैयार करने की सुविधा उपलब्ध है। सूचना, विषय-सूची, विषय से संबंधित दस्तावेज, उपस्थिति, बैठक की प्रत्यक्ष कार्यवाही, मतदान, प्रस्ताव और बैठक के बाद की कार्यवाही जैसी विभिन्न प्रक्रियाएं एक ही डिजिटल मंच पर संचालित की जा सकती हैं।
इसके अलावा बैठक में लिए गए निर्णयों के बाद की कार्रवाई की स्थिति की भी डिजिटल निगरानी की जा सकेगी। किसी प्रस्ताव के पारित होने के बाद संबंधित विभाग या अधिकारी को कौन-सी कार्रवाई करनी है, उसकी वर्तमान स्थिति क्या है तथा कार्रवाई पूरी हुई है या लंबित है, इसका डिजिटल माध्यम से पता लगाया जा सकेगा।
इससे बैठक में लिए गए निर्णय केवल रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उनके वास्तविक क्रियान्वयन पर भी प्रभावी निगरानी रखी जा सकेगी।
इस प्रणाली के माध्यम से जिला परिषद ने कागजरहित प्रशासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सूचनाएं, विषय-सूची, बैठक से संबंधित दस्तावेज और कार्यवाही डिजिटल रूप में उपलब्ध होने के कारण कागज, छपाई तथा फाइल प्रबंधन पर होने वाले खर्च को कम करने में मदद मिलेगी।
कागज के उपयोग में कमी से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा और हरित प्रशासन तथा टिकाऊ प्रशासन की अवधारणा को गति मिलेगी। डिजिटल प्रणाली के माध्यम से पारदर्शिता, कार्यक्षमता, उत्पादकता और जवाबदेही को मजबूत करने में सहायता मिलेगी।
कागजरहित बैठक का उद्देश्य केवल बैठकों को ऑनलाइन आयोजित करना नहीं है, बल्कि बैठक की तैयारी से लेकर निर्णय लेने और उसके क्रियान्वयन तक की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाना है। इस माध्यम से जिला परिषद पालघर के प्रशासन को अधिक स्मार्ट, पारदर्शी, कार्यक्षम, जवाबदेह और कागजरहित बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इस अवसर पर जिला परिषद के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।
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