पालघर: बचपन की यादों से लेकर जीवन के संघर्षों तक का सफर, समय की रफ्तार में बीते 55 वर्ष, 74वें वर्ष में जीवन के अनुभवों को शब्दों में पिरो रहे रामनारायण गोयल।

पालघर: बचपन की यादों से लेकर जीवन के संघर्षों तक का सफर, समय की रफ्तार में बीते 55 वर्ष, 74वें वर्ष में जीवन के अनुभवों को शब्दों में पिरो रहे रामनारायण गोयल।

अखिलेश चौबे 
पालघर। जीवन में समय कितनी तेजी से बीत जाता है, इसका एहसास उम्र के एक पड़ाव पर पहुंचने के बाद होता है। बचपन की यादें, जवानी के संघर्ष, पारिवारिक जिम्मेदारियां और जीवन के अनुभवों को शब्दों में पिरोते हुए रोटरी क्लब ऑफ बोईसर-तारापुर के पूर्व अध्यक्ष रामनारायण गोयल ने अपनी जीवन यात्रा के भावनात्मक पहलुओं को साझा किया है।
रामनारायण गोयल के अनुसार, जीवन का 74वां वर्ष चल रहा है। बचपन की शरारतें, परिवार, रिश्ते और जीवन के छोटे-छोटे सुख आज भी उनकी स्मृतियों में चलचित्र की तरह जीवंत हैं। समय के साथ चेहरे और हाथों पर दिखाई देने वाली झुर्रियां उन्हें बीते वर्षों के अनुभवों, संघर्षों और यादों का एहसास कराती हैं।
उन्होंने बताया कि लगभग 55 वर्षों से वे लगातार कार्य करते आ रहे हैं। इस लंबे सफर में उन्होंने कभी वास्तव में लंबा विश्राम नहीं लिया। जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए समय कब रेत की तरह हाथों से फिसल गया, इसका पता ही नहीं चला।
अपने जीवन के अनुभवों पर विचार करते हुए रामनारायण गोयल कहते हैं कि जीवन ने उन्हें संघर्ष, सफलता, रिश्ते, सम्मान और सबसे महत्वपूर्ण, लोगों के लिए कुछ करने के अवसर प्रदान किए। उनके लिए जीवन की सार्थकता केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि अपनी क्षमता के अनुसार दूसरों के काम आने में भी है।
जीवन के इस पड़ाव पर वे अब पीछे मुड़कर अपने अनुभवों को देखने के साथ ही भविष्य की राह को भी महसूस करना चाहते हैं। उम्र के कारण शरीर में बदलाव महसूस होने के बावजूद उनके मन में कुछ नया करने, लोगों की सहायता करने और जीवन को सार्थक बनाने की इच्छा आज भी कायम है।
रामनारायण गोयल ने समय की गति को जीवन की सच्चाई बताते हुए अपने भाव व्यक्त किए कि बचपन यादों में सिमट गया, जवानी जिम्मेदारियों को निभाने में बीत गई और अब वृद्धावस्था दस्तक दे रही है। इसके बावजूद उन्हें इस बात का संतोष है कि उन्होंने जीवन को जिया और अपनी क्षमता के अनुसार दूसरों के काम आने का प्रयास किया।
उन्होंने यह भी साझा किया कि जीवन के इस पड़ाव पर लिखने का एक नया जुनून जागा है। अब उनकी इच्छा है कि वे निरंतर लिखते रहें और अपने अनुभवों, विचारों तथा जीवन से मिली सीख को शब्दों के माध्यम से लोगों तक पहुंचाते रहें।
रामनारायण गोयल की यह जीवन यात्रा इस बात को रेखांकित करती है कि उम्र भले ही बढ़ती जाए, लेकिन कुछ नया करने, अपने अनुभव साझा करने और समाज के लिए उपयोगी बने रहने की इच्छा जीवन को नई दिशा दे सकती है।


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