पालघर: जव्हार में रानभाजी महोत्सव, 350 महिलाओं ने पारंपरिक व्यंजनों से दिखाई आदिवासी खाद्य संस्कृति।35 स्टॉलों पर सजीं विभिन्न रानभाजियां; पोषण, पारंपरिक ज्ञान और महिला सशक्तिकरण का संदेश।

पालघर: जव्हार में रानभाजी महोत्सव, 350 महिलाओं ने पारंपरिक व्यंजनों से दिखाई आदिवासी खाद्य संस्कृति।
35 स्टॉलों पर सजीं विभिन्न रानभाजियां; पोषण, पारंपरिक ज्ञान और महिला सशक्तिकरण का संदेश।

अखिलेश चौबे 
पालघर।‌ आदिवासी समाज की समृद्ध पारंपरिक खाद्य संस्कृति के संरक्षण तथा नई पीढ़ी को रानभाजियों के पोषण और औषधीय महत्व से परिचित कराने के उद्देश्य से एकात्मिक आदिवासी परियोजना कार्यालय, जव्हार की ओर से रानभाजी महोत्सव का आयोजन किया गया। यशवंतनगर स्थित घावी हॉल में आयोजित इस महोत्सव को उत्स्फूर्त प्रतिसाद मिला। जव्हार, मोखाडा, विक्रमगढ़ और वाडा तालुका की लगभग 350 महिलाओं ने इसमें सहभागिता की।
महोत्सव का उद्घाटन पद्मश्री भिकल्या धिंडा के हाथों हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता परियोजना अधिकारी तथा सहायक जिलाधिकारी पी. के. सिद्धार्थ रामकुमार ने की।
महोत्सव में कुल 35 आकर्षक स्टॉल लगाए गए थे। स्थानीय महिला बचत समूहों ने पारंपरिक तरीके से उपलब्ध विभिन्न रानभाजियों तथा उनसे तैयार किए गए खाद्य पदार्थों का प्रदर्शन किया। इनमें राई का पत्ता, आवाड़ी, ताग के फूल, सहजन के पत्ते की सब्जी, अरबी, कांदवली, नेका, भेंडा, खुरासणी, देशी माठ, लोथ, टेटू, कवदर, सरवल, भोकर, सूरन, भोवरा बेल, कांग्रेस, मोहटा, लोती, सरमले की सब्जी, तेरा के पत्ते, तोडली का पत्ता, वास्ता, सरसों का पत्ता, सिराडा और सहजन का पत्ता शामिल रहे। इसके अलावा करवंद की चटनी व अचार, केले का सोड़ और कुल्थी का पराठा जैसे पारंपरिक खाद्य पदार्थ भी उपस्थित लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे।
रानभाजियां केवल पारंपरिक भोजन का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि उनमें पोषण संबंधी गुण होने के साथ स्थानीय ज्ञान परंपरा में भी उनका विशेष महत्व है। इसी उद्देश्य से आयोजित इस महोत्सव में आदिवासी समाज की पारंपरिक खाद्य संस्कृति की झलक देखने को मिली। महिला बचत समूहों ने रानभाजियों से विभिन्न पौष्टिक खाद्य पदार्थ तैयार कर उनका प्रदर्शन किया।
उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों और नागरिकों ने खाद्य पदार्थों का स्वाद लेते हुए महिला बचत समूहों की रचनात्मकता और इस पहल की सराहना की। रानभाजियों के माध्यम से पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण के साथ महिला बचत समूहों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच भी उपलब्ध कराया गया।
महोत्सव के सफल आयोजन के लिए सहायक परियोजना अधिकारी मच्छिंद्र गडाख, संदेश शेरेकर और दीपक टिके, नियोजन अधिकारी सतीश रास्ते और ज्ञानदेव कचरे, कार्यालय अधीक्षक योगेश भोये तथा आदिवासी विकास निरीक्षक महेश वराडे सहित एकात्मिक आदिवासी परियोजना कार्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों ने नियोजन किया। कार्यक्रम का संचालन कनिष्ठ शिक्षा विस्तार अधिकारी सोमनाथ धोडे ने किया। महोत्सव की सफलता में महिला बचत समूहों की उत्स्फूर्त सहभागिता महत्वपूर्ण रही।

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