पुणे: एमपीएससी अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग को लेकर पुणे में 7 सितंबर को विराट आक्रोश मार्च।पेपर लीक प्रकरण को लेकर विद्यार्थियों और शिक्षकों में आक्रोश; अध्यक्ष विवेक भीमनवार को हटाने सहित विभिन्न मांगों को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय तक निकलेगा मार्च।
पुणे: एमपीएससी अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग को लेकर पुणे में 7 सितंबर को विराट आक्रोश मार्च।
पेपर लीक प्रकरण को लेकर विद्यार्थियों और शिक्षकों में आक्रोश; अध्यक्ष विवेक भीमनवार को हटाने सहित विभिन्न मांगों को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय तक निकलेगा मार्च।
अखिलेश चौबे
पुणे। महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग के पेपर लीक को लेकर विद्यार्थियों और शिक्षकों में बढ़ते आक्रोश के बीच सोमवार, 7 सितंबर को पुणे में विराट आक्रोश मार्च निकाला जाएगा। इस मार्च के माध्यम से महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार के इस्तीफे की मांग के साथ ही आयोग के अध्यक्ष पद पर स्वच्छ छवि वाले अधिकारी की नियुक्ति सहित विद्यार्थियों की विभिन्न मांगों को सरकार के समक्ष रखा जाएगा।
विद्यार्थियों और शिक्षकों की ओर से आयोजित यह आक्रोश मार्च सोमवार सुबह 10 बजे पुणे के ओंकारेश्वर मंदिर चौक से महर्षी विठ्ठल रामजी शिंदे पुल होते हुए जिलाधिकारी कार्यालय तक निकाला जाएगा। आयोजकों के अनुसार, इस आंदोलन में बड़ी संख्या में विद्यार्थी और शिक्षक शामिल होंगे।
विद्यार्थियों से संवाद के दौरान संबंधित नेता ने इस आक्रोश मार्च में स्वयं भी शामिल होने का आश्वासन दिया है। मार्च की अनुमति सहित आवश्यक व्यवस्थाओं को लेकर उन्होंने पुणे पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। इस दौरान पुलिस सहआयुक्त संजय दराडे, अपर पुलिस आयुक्त राजेश बनसोडे, उपायुक्त ऋषिकेश रावले और मिलिंद मोहिते से मुलाकात कर मार्च को अनुमति देने का अनुरोध किया गया।
इस अवसर पर युवक कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष शिवराज मोरे, सुनील माने, प्रमोद पाटील, स्पर्धा परीक्षा शिक्षक संघटना सचिव दीप्ति नायर समेत विभिन्न प्रशिक्षण संस्थानों के शिक्षक तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।
सरकार को दो दिन का अल्टीमेटम
विद्यार्थियों की मांगों के समर्थन में आंदोलनकारी नेतृत्व ने सरकार को दो दिन का समय दिया है। उनका कहना है कि इस अवधि में यदि महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष को पद से हटाने के साथ विद्यार्थियों की अन्य न्यायोचित मांगों को स्वीकार नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की प्रत्येक न्यायोचित मांग के लिए वे पहले भी उनके साथ खड़े रहे हैं, आज भी उनके साथ हैं और भविष्य में भी उनके साथ रहेंगे। सरकार द्वारा मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिए जाने की स्थिति में संघर्ष को तेज किया जाएगा तथा आंदोलन के माध्यम से सरकार को विद्यार्थियों और शिक्षकों की एकजुटता तथा ताकत का एहसास कराया जाएगा।
आंदोलनकारियों का कहना है कि यह संघर्ष केवल वर्तमान विद्यार्थियों के हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के अधिकारों की रक्षा, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और योग्य एवं ईमानदार अधिकारियों के माध्यम से देश के उज्ज्वल भविष्य से जुड़ा हुआ है।
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