मुंबई: सेवन हिल्स अस्पताल के निजीकरण प्रस्ताव पर बढ़ा राजनीतिक विवाद।बीएमसी की सुधार समिति ने प्रस्ताव को दी मंजूरी, राजेश शर्मा ने जताया कड़ा विरोध।
मुंबई: सेवन हिल्स अस्पताल के निजीकरण प्रस्ताव पर बढ़ा राजनीतिक विवाद।
बीएमसी की सुधार समिति ने प्रस्ताव को दी मंजूरी, राजेश शर्मा ने जताया कड़ा विरोध।
अखिलेश चौबे
मुंबई। महानगरपालिका (बीएमसी) की सुधार समिति द्वारा मरोल स्थित सेवन हिल्स अस्पताल को नीता मुकेश अंबानी के नियंत्रण में सौंपने संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने के बाद राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। इस निर्णय का विभिन्न राजनीतिक दलों एवं सामाजिक संगठनों की ओर से विरोध किया जा रहा है। वहीं मुंबई के पूर्व उपमहापौर एवं महाराष्ट्र कांग्रेस के उपाध्यक्ष राजेश शर्मा ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए इसे जनहित के विरुद्ध बताया है।
राजेश शर्मा ने आरोप लगाया कि भारी विरोध के बावजूद भाजपा समर्थित बीएमसी सुधार समिति ने करोड़ों रुपये मूल्य की सार्वजनिक संपत्ति को निजी हाथों में सौंपने का निर्णय लिया है। उन्होंने दावा किया कि लगभग 6,000 करोड़ रुपये मूल्य की इस सार्वजनिक संपत्ति को मात्र 183 करोड़ रुपये में नीता मुकेश अंबानी के नियंत्रण में देने का प्रस्ताव पारित किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह निर्णय केंद्र की भाजपा नेतृत्व वाली सरकार के निर्देश पर लिया गया है।
महाराष्ट्र कांग्रेस के उपाध्यक्ष राजेश शर्मा ने कहा कि सेवन हिल्स अस्पताल एक सरकारी स्वास्थ्य संस्था है, जिसका उद्देश्य आम नागरिकों को सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि हजारों लोगों की जान बचाने वाले इस अस्पताल को लाभ कमाने के उद्देश्य से निजी हाथों में सौंपना जनहित के साथ अन्याय होगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस अस्पताल का निजीकरण किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
राजेश शर्मा ने मुंबई की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि महानगर की सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाएं पहले से ही अनेक चुनौतियों का सामना कर रही हैं। उनके अनुसार सेवन हिल्स अस्पताल लगभग 16.7 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें 1,500 बिस्तरों की क्षमता तथा 36 अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान इस अस्पताल ने 64,000 से अधिक मरीजों का निःशुल्क उपचार कर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और हजारों लोगों का जीवन बचाने में योगदान दिया था।
उन्होंने मुंबई महानगरपालिका के सभी राजनीतिक दलों के पार्षदों से अपील की कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर मुंबई की जनता के हितों को प्राथमिकता दें तथा इस प्रस्ताव का विरोध करें। उनका कहना था कि सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों की रक्षा करना सभी जनप्रतिनिधियों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उल्लेखनीय है कि बीएमसी की सुधार समिति द्वारा प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। एक ओर जहां विपक्षी दल इस निर्णय को सार्वजनिक संपत्ति के निजीकरण की दिशा में बड़ा कदम बता रहे हैं, वहीं इस विषय पर आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया और अंतिम निर्णय पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
(नोट: इस समाचार में उल्लिखित वित्तीय आंकड़े, आरोप एवं दावे संबंधित पक्षों द्वारा व्यक्त किए गए हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस समाचार के माध्यम से नहीं की जा रही है।)
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