पालघर: जिला प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से दो दिन में बहाल हुआ नारपाड–आंबेवाड़ी मार्ग, चिखले–नावखाड़ी सड़क की मरम्मत अंतिम चरण में।
पालघर: जिला प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से दो दिन में बहाल हुआ नारपाड–आंबेवाड़ी मार्ग, चिखले–नावखाड़ी सड़क की मरम्मत अंतिम चरण में।
अखिलेश चौबे
पालघर। जिले में 22 एवं 23 जुलाई 2026 को हुई मूसलाधार वर्षा के कारण कई प्रमुख सड़कें गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गई थीं। सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधीन आने वाले अनेक मार्गों पर आवागमन बाधित हो गया था। इनमें प्रमुख राज्य राजमार्ग क्रमांक-4 (झाई–बोर्डी–रेवस–रेड्डी) पर स्थित नारपाड–आंबेवाड़ी नाका का मार्ग सर्वाधिक प्रभावित हुआ, जहां सड़क का बड़ा हिस्सा बह जाने से यातायात पूरी तरह ठप हो गया था।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पालघर जिले के पालकमंत्री गणेश नाईक ने तत्काल हालात का जायजा लेते हुए सार्वजनिक निर्माण विभाग को युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य प्रारंभ कर यथाशीघ्र यातायात बहाल करने के निर्देश दिए। इसके पश्चात पालघर की जिलाधिकारी डॉ. इंदू रानी जाखड़ ने संपूर्ण कार्यवाही की लगातार निगरानी की तथा आवश्यक प्रशासनिक स्वीकृतियां शीघ्र उपलब्ध कराकर विभागीय अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित किया। उनके मार्गदर्शन और सतत अनुश्रवण के कारण राहत एवं मरम्मत कार्य में उल्लेखनीय गति आई।
जिलाधिकारी के निर्देशन में सार्वजनिक निर्माण विभाग के कार्यकारी अभियंता, विभागीय अधिकारी, अभियंता, कर्मचारी एवं संबंधित ठेकेदारों ने आधुनिक मशीनरी और पर्याप्त मानव संसाधनों के साथ दिन-रात कार्य करते हुए महज दो दिनों के भीतर नारपाड–आंबेवाड़ी मार्ग को पुनः यातायात के लिए सुरक्षित रूप से खोल दिया। प्रारंभिक रूप से कठिन प्रतीत होने वाला यह कार्य बेहतर योजना, समन्वय और सतत प्रयासों के कारण निर्धारित समय में पूरा किया गया।
अत्यधिक वर्षा के कारण दो स्थानों पर क्रमशः 60 मीटर तथा 70 मीटर लंबाई तक सड़क पूरी तरह बह गई थी। तत्काल राहत व्यवस्था के तहत एनपी-3 श्रेणी के 1200 मिलीमीटर व्यास वाले ह्यूम पाइप लगाए गए। प्रत्येक पंक्ति में पांच पाइप तथा कुल छह पंक्तियों की व्यवस्था कर जल निकासी सुनिश्चित की गई। इसके बाद बड़ी मात्रा में बोल्डर, ग्रैन्युलर सब-बेस (जीएसबी), गिट्टी एवं एग्रीगेट सामग्री से सड़क का पुनर्निर्माण किया गया। जल निकासी की सुचारु व्यवस्था के लिए लगभग 12 मीटर चौड़ा कल्वर्ट तैयार किया गया, जिससे मार्ग को सुरक्षित रूप से यातायात के लिए खोल दिया गया।
प्रशासन ने बताया कि भविष्य में स्थायी समाधान के लिए 2 मीटर × 2 मीटर आकार के आरसीसी बॉक्स कल्वर्ट, आवश्यक रिटेनिंग वॉल (सुरक्षात्मक दीवार) तथा अन्य संरचनात्मक निर्माण कार्यों का प्रस्ताव भी तैयार कर लिया गया है, जिससे भविष्य में ऐसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सड़क को होने वाले नुकसान को रोका जा सके।
इस महत्वाकांक्षी मरम्मत अभियान में तीन पोकलेन मशीनें, चार एक्स्कैवेटर, 40 से अधिक हाईवा एवं डंपर ट्रक, आठ कंक्रीट मिक्सर मशीनें तथा बड़ी संख्या में श्रमिकों को लगाया गया। केवल नारपाड–आंबेवाड़ी मार्ग पर लगभग 500 ट्रक गिट्टी एवं एग्रीगेट सामग्री का उपयोग कर सड़क के भराव को पुनः तैयार किया गया। वर्तमान में यह मार्ग अस्थायी रूप से पूरी तरह सुरक्षित बनाकर यातायात के लिए खोल दिया गया है।
इसी प्रकार चिखले–नावखाड़ी मार्ग का भराव भी बाढ़ के पानी में बह गया था। चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों और सामग्री परिवहन में कठिनाइयों के बावजूद सार्वजनिक निर्माण विभाग ने उत्कृष्ट योजना के साथ मनोर एवं किरात क्षेत्र से आवश्यक गौण खनिज सामग्री तथा वाडा से कल्वर्ट निर्माण के लिए आवश्यक 30 पाइप उपलब्ध कराए। इसके बाद युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य प्रारंभ किया गया, जो अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। प्रशासन के अनुसार यह मार्ग भी शीघ्र ही यातायात के लिए खोल दिया जाएगा।
लगातार हो रही भारी वर्षा, प्रतिकूल मौसम और तकनीकी चुनौतियों के बावजूद पालघर जिला प्रशासन एवं सार्वजनिक निर्माण विभाग के समन्वित प्रयासों से बेहद कम समय में सड़क संपर्क बहाल किया जाना प्रशासनिक दक्षता और त्वरित कार्यशैली का उदाहरण माना जा रहा है।
जिलाधिकारी डॉ. इंदू रानी जाखड़ ने कहा कि पालघर जिला प्रशासन नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। आपदा की स्थिति में सभी संबंधित विभागों के समन्वय से आवश्यक आधारभूत सुविधाओं की शीघ्र पुनर्बहाली सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शेष मरम्मत कार्य भी शीघ्र पूर्ण कर सभी मार्गों पर सामान्य यातायात बहाल कर दिया जाएगा।
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