पालघर: वसई-विरार की बाढ़ केवल भारी बारिश का परिणाम नहीं, दशकों की अव्यवस्थित शहरीकरण नीति जिम्मेदार: पालकमंत्री गणेश नाईक।

पालघर: वसई-विरार की बाढ़ केवल भारी बारिश का परिणाम नहीं, दशकों की अव्यवस्थित शहरीकरण नीति जिम्मेदार: पालकमंत्री गणेश नाईक।

अखिलेश चौबे
पालघर। महाराष्ट्र के वन मंत्री एवं पालघर जिले के पालकमंत्री गणेश नाईक ने कहा है कि वसई-विरार क्षेत्र में उत्पन्न बाढ़ की स्थिति केवल अत्यधिक वर्षा का परिणाम नहीं है, बल्कि पिछले कई दशकों से हुए अव्यवस्थित शहरीकरण, प्राकृतिक नालों पर अतिक्रमण तथा पर्यावरणीय असंतुलन का संयुक्त प्रभाव है। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी आपदाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर स्थायी समाधान तैयार किया जाएगा।
पालकमंत्री गणेश नाईक ने पालघर जिले के ससुनवघर (जे.के. टायर), नालासोपारा, नायगांव (पूर्व), चिचोंडी फाटा, सनसिटी (वसई पश्चिम), गालानगर (डॉन लेन), धानिवबाग (बुलेट ट्रेन परिसर), डी-मार्ट क्षेत्र, बाढ़ संभावित क्षेत्र, सफाळे, केळवा-धवांगेपाड़ा, बिडको तथा वीरेंद्रनगर सहित विभिन्न बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने स्थानीय नागरिकों से संवाद कर उनकी समस्याओं की जानकारी ली तथा राहत कार्यों की समीक्षा की।
निरीक्षण के बाद आयोजित पत्रकार वार्ता में गणेश नाईक ने कहा कि बाढ़ प्रभावित नागरिकों को तत्काल राहत उपलब्ध कराई जाएगी, पंचनामा तेजी से पूरा कराया जाएगा तथा दीर्घकालिक विकास एवं बाढ़ नियंत्रण के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
इस अवसर पर सांसद डॉ. हेमंत सवरा, विधायक राजेंद्र गावित, विधायक राजन नाईक, विधायक स्नेहा दुबे पंडित, जिलाधिकारी डॉ. इंदू रानी जाखड़, वसई-विरार महानगरपालिका आयुक्त पृथ्वीराज बी. पी., जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज रानडे, डहाणू के उप वन संरक्षक निरंजन दिवाकर सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
पालकमंत्री गणेश नाईक ने बताया कि वसई-विरार शहर की बाढ़ समस्या का सैटेलाइट और ड्रोन सर्वेक्षण के माध्यम से विस्तृत अध्ययन कराया जाएगा। अगले 15 से 20 दिनों के भीतर एक समग्र कार्ययोजना तैयार कर रेलवे, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, पर्यावरण विभाग, वन विभाग, राजस्व विभाग तथा महानगरपालिका प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी, ताकि बाढ़ नियंत्रण के लिए स्थायी और प्रभावी उपाय लागू किए जा सकें।
उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित लोगों को शीघ्र राहत उपलब्ध कराने के लिए राजस्व विभाग और वसई-विरार महानगरपालिका की संयुक्त टीमों को युद्धस्तर पर पंचनामा करने के निर्देश दिए गए हैं। पंचनामा पूरा होते ही पात्र नागरिकों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही जिन परिवारों के घरेलू सामान, शैक्षणिक सामग्री और अन्य आवश्यक वस्तुओं का नुकसान हुआ है, उन्हें शासन की ओर से यथासंभव सहायता प्रदान की जाएगी।
बिजली आपूर्ति के संबंध में पालकमंत्री ने कहा कि कई स्थानों पर विद्युत वितरण केंद्र और डीपी पानी में डूबे हुए हैं। ऐसे में पर्याप्त जल निकासी होने से पहले बिजली आपूर्ति बहाल करना जोखिमपूर्ण होगा। हालांकि, नागरिकों की परेशानी कम करने के लिए विद्युत वितरण कंपनी को युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य पूरा कर जल्द से जल्द बिजली आपूर्ति बहाल करने के निर्देश दिए गए हैं।
दीर्घकालिक समाधान पर जोर देते हुए गणेश नाईक ने कहा कि वसई-विरार शहर में भूमिगत ड्रेनेज व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा, अवैध एवं अव्यवस्थित निर्माणों पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जाएगा तथा टिकाऊ और वैज्ञानिक शहरी नियोजन को प्राथमिकता दी जाएगी।
पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने 300 करोड़ वृक्षारोपण का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए टिश्यू कल्चर तकनीक के माध्यम से कोंकण, पश्चिम महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, खानदेश और विदर्भ क्षेत्रों में अत्याधुनिक पौधशालाएं विकसित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में वर्तमान 21 प्रतिशत वन क्षेत्र को बढ़ाकर 33 प्रतिशत तक पहुंचाने के लिए जनसहभागिता अत्यंत आवश्यक है।

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