पालघर: डॉक्टर्स डे पर जुटाए गए रक्त ने बचाई 9 वर्षीय सनन्या मारवत मारले की जान, 97 रक्तदाताओं की पहल बनी जीवनदान।
पालघर: डॉक्टर्स डे पर जुटाए गए रक्त ने बचाई 9 वर्षीय सनन्या मारवत मारले की जान, 97 रक्तदाताओं की पहल बनी जीवनदान।
अखिलेश चौबे
पालघर। डॉक्टर्स डे के अवसर पर टीआईएमए (TIMA), पालघर तालुका मेडिकल प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन (एमपीए) तथा रोटरी क्लब ऑफ बोईसर तारापुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित विशाल रक्तदान शिविर ने एक नौ वर्षीय मासूम बच्ची को नया जीवन देने का कार्य किया। शिविर में एकत्रित 97 यूनिट रक्त में से समय पर उपलब्ध कराए गए रक्त और प्लेटलेट्स के कारण गंभीर बीमारी से जूझ रही सनन्या मारवत मारले की जान बचाई जा सकी।
रोटरी क्लब ऑफ बोईसर तारापुर के पूर्व अध्यक्ष डॉ. पराग कुलकर्णी ने बताया कि रक्तदान शिविर में जुटाए गए रक्त का उपयोग जरूरतमंद मरीजों के उपचार के लिए किया जा रहा है। इसी रक्तदान शिविर से उपलब्ध रक्त की मदद से सनन्या मारवत मारले को समय पर उपचार मिल सका, जिससे उसकी जान बच गई।
उन्होंने बताया कि सनन्या फैनकोनी एनीमिया (Fanconi Anemia) और थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित है। फैनकोनी एनीमिया एक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें अस्थि मज्जा पर्याप्त मात्रा में रक्त कोशिकाओं का निर्माण नहीं कर पाती। इसके कारण शरीर में हीमोग्लोबिन, प्लेटलेट्स और श्वेत रक्त कणिकाओं की संख्या बेहद कम हो जाती है तथा मरीज को बार-बार रक्त और प्लेटलेट्स चढ़ाने की आवश्यकता पड़ती है।
बालिका का नियमित उपचार डॉ. राजेंद्र चव्हाण के महाराष्ट्र ब्लड स्टोरेज सेंटर स्थित रोटरी थैलेसीमिया सेंटर में किया जा रहा है, जहां उसे विशेषज्ञ चिकित्सकीय देखभाल के साथ आवश्यक रक्त घटक समय-समय पर उपलब्ध कराए जाते हैं।
जानकारी के अनुसार, 1 जुलाई को सनन्या अत्यंत गंभीर हालत में अस्पताल पहुंची थी। उसके मसूड़ों से लगातार रक्तस्राव हो रहा था। चिकित्सकीय जांच में उसका हीमोग्लोबिन मात्र 2.8 ग्राम, प्लेटलेट्स 16 हजार तथा डब्ल्यूबीसी (WBC) 1800 पाए गए। उसकी नसें बैठ जाने के कारण इंट्रावेनस (IV) लाइन लगाना भी काफी चुनौतीपूर्ण था। वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ की सहायता से सफलतापूर्वक IV लाइन स्थापित की गई और तत्काल उपचार शुरू किया गया।
इसके बाद रक्तदान शिविर से उपलब्ध 'ओ' पॉजिटिव पीसीवी (PCV) की दो यूनिट तथा आरडीपी (RDP) प्लेटलेट्स की दो यूनिट समय पर चढ़ाई गईं। त्वरित उपचार और समय पर रक्त उपलब्ध होने के कारण बालिका की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ और कुछ समय बाद वह पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौट गई।
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि स्वैच्छिक रक्तदान किसी जरूरतमंद के लिए जीवनदान बन सकता है। डॉक्टर्स डे के अवसर पर रक्तदान करने वाले 97 रक्तदाताओं की संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी के कारण एक मासूम बच्ची को नया जीवन मिला।
इस अवसर पर टीआईएमए, पालघर तालुका मेडिकल प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन (एमपीए), रोटरी क्लब ऑफ बोईसर तारापुर, सभी रक्तदाताओं, चिकित्सकों तथा स्वास्थ्यकर्मियों के योगदान की सराहना की गई। आयोजकों ने लोगों से अधिक से अधिक संख्या में स्वैच्छिक रक्तदान करने की अपील करते हुए कहा कि "रक्तदान महादान है, आपका एक यूनिट रक्त किसी की पूरी जिंदगी बचा सकता है।"
Comments
Post a Comment