पालघर: जिले के दापचरी में बनेगा अंतरराष्ट्रीय कृषि बाजार, 558 हेक्टेयर में विकसित होगी विश्वस्तरीय परियोजना।

पालघर: जिले के दापचरी में बनेगा अंतरराष्ट्रीय कृषि बाजार, 558 हेक्टेयर में विकसित होगी विश्वस्तरीय परियोजना।

अखिलेश चौबे
पालघर। महाराष्ट्र के पालघर जिले के दहानू तालुका स्थित दापचरी में 558.43 हेक्टेयर (लगभग 1,395 एकड़) भूमि पर अंतरराष्ट्रीय स्तर का आधुनिक कृषि बाजार विकसित किया जाएगा। यह महत्वाकांक्षी परियोजना राज्य के किसानों को सीधे वैश्विक बाजार से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। इसकी जानकारी महाराष्ट्र के विपणन मंत्री जयकुमार रावल ने मुंबई स्थित मंत्रालय में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान दी। इस अवसर पर विपणन विभाग के प्रधान सचिव प्रवीण दराडे भी उपस्थित रहे।
मंत्री जयकुमार रावल ने बताया कि दापचरी में प्रस्तावित यह अंतरराष्ट्रीय कृषि बाजार वाढवण बंदर से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना का विकास फ्रांस के रुंगीस मार्केट, नीदरलैंड के रॉयल फ्लोरा हॉलैंड तथा रॉटरडैम बंदरगाह की आधुनिक कृषि लॉजिस्टिक प्रणाली के आधार पर किया जाएगा। इसका उद्देश्य देश के किसानों को वैश्विक मानकों के अनुरूप व्यापारिक सुविधाएं उपलब्ध कराना तथा कृषि उत्पादों के निर्यात को नई गति देना है।
मंत्री रावल ने बताया कि राज्य सरकार अंतरराष्ट्रीय कृषि बाजार, राष्ट्रीय महत्व के कृषि बाजार तथा कृषि उपज मंडी समितियों पर आधारित त्रिस्तरीय कृषि विपणन व्यवस्था विकसित करने की योजना पर कार्य कर रही है। इस व्यवस्था के माध्यम से कृषि उत्पादों की मूल्य श्रृंखला को मजबूत किया जाएगा तथा किसानों को आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक आधारित विपणन प्रणाली उपलब्ध कराई जाएगी।
उन्होंने कहा कि परियोजना में निर्यात सुविधाओं का एकीकरण, फसल कटाई के बाद मूल्य संवर्धन, डिजिटल एवं पारदर्शी व्यापार प्रणाली तथा अत्याधुनिक कृषि बाजार अधोसंरचना पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
दापचरी में बनने वाले इस कृषि बाजार में किसानों और व्यापारियों को एक ही स्थान पर घाऊक व्यापार, आयात-निर्यात सुविधा, शीत श्रृंखला (कोल्ड चेन), ग्रेडिंग एवं पैकेजिंग, मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक व्यवस्था तथा एग्रीटेक एवं कृषि एक्सचेंज जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
इसके अतिरिक्त वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, रिपनिंग चैंबर, गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशाला, कंटेनर टर्मिनल, रेलवे साइडिंग, ई-नीलामी प्रणाली तथा निर्यात सुविधा केंद्र भी विकसित किए जाएंगे, जिससे कृषि व्यापार अधिक संगठित और प्रतिस्पर्धी बन सकेगा।
विपणन मंत्री ने बताया कि महाराष्ट्र वर्तमान में अंगूर, अनार, कपास तथा दलहन उत्पादन में देश में प्रथम स्थान पर है, जबकि फल एवं सब्जी उत्पादन में राज्य दूसरे स्थान पर है। देश की कुल कृषि निर्यात का लगभग 15 प्रतिशत हिस्सा महाराष्ट्र से होता है तथा भारत के कुल फल निर्यात का लगभग 43 प्रतिशत योगदान भी राज्य का है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दापचरी में बनने वाला यह अंतरराष्ट्रीय कृषि बाजार राज्य की कृषि निर्यात क्षमता को और अधिक मजबूत करेगा तथा किसानों को बेहतर मूल्य उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
मंत्री जयकुमार रावल ने बताया कि इस परियोजना के शुरू होने से फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान में लगभग 15 से 20 प्रतिशत तक कमी आएगी। वहीं कृषि उत्पादों के परिवहन और रखरखाव पर होने वाले खर्च में भी 15 से 20 प्रतिशत तक बचत होने की संभावना है।
परियोजना के माध्यम से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 10 हजार से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इससे कृषि प्रसंस्करण उद्योग, स्थानीय व्यापार और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी तथा किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।
दापचरी स्थित यह कृषि बाजार वाढवण डीपवॉटर पोर्ट, नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह, समृद्धि महामार्ग, वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर तथा वडोदरा एक्सप्रेस-वे जैसी महत्वपूर्ण आधारभूत परियोजनाओं से जुड़ा होगा। इससे कृषि उत्पादों की ढुलाई तेज, सस्ती और अधिक प्रभावी होगी तथा फल, सब्जियां, फूल, अनाज, दलहन, मसाले और प्रसंस्कृत कृषि उत्पादों के निर्यात को व्यापक बढ़ावा मिलेगा।
मंत्री जयकुमार रावल ने कहा कि महाराष्ट्र राज्य कृषि विपणन मंडल के नेतृत्व तथा राज्य सरकार के मार्गदर्शन में विकसित होने वाली यह परियोजना महाराष्ट्र को देश का अग्रणी कृषि निर्यात केंद्र बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि दापचरी का अंतरराष्ट्रीय कृषि बाजार केवल एक व्यापारिक परिसर नहीं होगा, बल्कि यह महाराष्ट्र के किसानों को सीधे वैश्विक बाजार से जोड़ने वाला विकास का नया द्वार साबित होगा।

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