पालघर: प्रतिष्ठित हास्य कवि सुरेश मिश्र को मिलेगा पं. बाण सम्मान 2026, लखनऊ में होगा भव्य सम्मान समारोह।

पालघर: प्रतिष्ठित हास्य कवि सुरेश मिश्र को मिलेगा पं. बाण सम्मान 2026, लखनऊ में होगा भव्य सम्मान समारोह।

अखिलेश चौबे 
पालघर। महाकवि बाण प्रतिष्ठान द्वारा प्रतिवर्ष प्रदान किया जाने वाला देश का प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मान 'पं. बाण सम्मान' इस वर्ष सुप्रसिद्ध हास्य कवि सुरेश मिश्र को प्रदान किया जाएगा। यह सम्मान समारोह 15 जुलाई 2026 को देशभारती पब्लिक इंटर कॉलेज, राजाजीपुरम, लखनऊ (उत्तर प्रदेश) में गरिमामय वातावरण में आयोजित किया जाएगा। समारोह में देशभर के साहित्यकारों, जनप्रतिनिधियों तथा अनेक विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति रहेगी।
महाकवि बाण प्रतिष्ठान की ओर से आयोजित इस समारोह में सम्मान स्वरूप शॉल, स्मृति चिन्ह, प्रशस्ति पत्र तथा 51 हजार रुपये की नकद राशि प्रदान की जाएगी। इसी अवसर पर देश के मूर्धन्य विद्वान एवं ओजस्वी काव्यधारा के शिखर कवि पंडित वेदव्रत वाजपेई के जन्मदिवस को 'गुरु पर्व' के रूप में भी मनाया जाएगा।
समारोह के अंतर्गत आयोजित होने वाले अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में हास्य कवि सुरेश मिश्र की नवीन कृति 'डमरू शतक' का भी विधिवत लोकार्पण किया जाएगा। बताया गया है कि यह हिंदी साहित्य के इतिहास का प्रथम प्रकाशित डमरू छंद संग्रह है, जिसे साहित्य जगत में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
इस संबंध में जानकारी देते हुए देशभारती पब्लिक इंटर कॉलेज के संस्थापक पंडित वेदव्रत वाजपेई ने प्रेस वार्ता के दौरान सम्मान की औपचारिक घोषणा की। उन्होंने बताया कि समारोह में प्रदेश के उपमुख्यमंत्री, मंत्रिमंडल के सदस्य, सांसद, विधायक सहित अनेक गणमान्य अतिथि तथा देशभर के साहित्यकार और बुद्धिजीवी उपस्थित रहेंगे।
सुरेश मिश्र हिंदी साहित्य के प्रतिष्ठित रचनाकारों में गिने जाते हैं। उनकी अब तक आठ पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी चर्चित कविता 'नदी की पुकार' महाराष्ट्र राज्य शिक्षा मंडल के कक्षा नौवीं के 'लोकवाणी' पाठ्यक्रम में शामिल है, जबकि उनकी लोकप्रिय रचना 'मां-बाप से बढ़कर कोई भगवान नहीं है' कक्षा छठवीं की 'बांग्ला भारती' पाठ्यपुस्तक का हिस्सा है। उनकी साहित्यिक सेवाओं के लिए उन्हें साहित्य अकादमी सहित देश की अनेक प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।
कार्यक्रम के संबंध में देशभारती पब्लिक इंटर कॉलेज के प्रबंधक मनुव्रत वाजपेई ने देशभर के साहित्यकारों, कवियों, विद्यार्थियों तथा साहित्य प्रेमियों से इस भव्य साहित्यिक आयोजन में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन हिंदी साहित्य, भारतीय संस्कृति और गुरु-शिष्य परंपरा को नई ऊर्जा प्रदान करने वाला ऐतिहासिक अवसर सिद्ध होगा।

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