मुंबई: वॉकहार्ट हॉस्पिटल्स, मीरा रोड के चिकित्सकों ने चुंबकीय धातु के टुकड़े निगलने वाले 10 वर्षीय बालक की बचाई जान।ऑटिज्म से पीड़ित बालक की छोटी आंत में फंस गए थे कई मैग्नेट, समय पर जांच और आपातकालीन शल्य चिकित्सा से टला बड़ा खतरा।
मुंबई: वॉकहार्ट हॉस्पिटल्स, मीरा रोड के चिकित्सकों ने चुंबकीय धातु के टुकड़े निगलने वाले 10 वर्षीय बालक की बचाई जान।
ऑटिज्म से पीड़ित बालक की छोटी आंत में फंस गए थे कई मैग्नेट, समय पर जांच और आपातकालीन शल्य चिकित्सा से टला बड़ा खतरा।
अखिलेश चौबे
मुंबई। वॉकहार्ट हॉस्पिटल्स, मीरा रोड के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने समय पर जांच और आपातकालीन शल्य चिकित्सा कर एक 10 वर्षीय बालक का जीवन बचाने में सफलता प्राप्त की। पेट में तेज दर्द और लगातार उल्टी की शिकायत के साथ अस्पताल लाए गए बालक की प्रारंभिक जांच में मामला सामान्य पेट दर्द जैसा प्रतीत हुआ, लेकिन विस्तृत परीक्षण में पता चला कि उसने खेलते समय कई छोटे चुंबकीय धातु (मैग्नेट) के टुकड़े निगल लिए थे। चिकित्सकों के अनुसार यदि समय रहते उपचार नहीं किया जाता, तो यह स्थिति कुछ ही घंटों में जानलेवा साबित हो सकती थी।
अस्पताल द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, गोपनीयता बनाए रखने के लिए मास्टर रोहित (परिवर्तित नाम) के रूप में उल्लेखित यह बालक ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (एएसडी) से पीड़ित है। ऐसे बच्चों में कई बार गैर-खाद्य वस्तुओं को मुंह में डालने की आदत होती है। चिकित्सकों ने बताया कि जब एक से अधिक मैग्नेट निगल लिए जाते हैं, तो वे आंत के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचकर आपस में चिपक जाते हैं। इससे आंत में रुकावट, छेद तथा गंभीर संक्रमण जैसी जानलेवा जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं।
वॉकहार्ट हॉस्पिटल्स, मीरा रोड में बालक की जांच कंसल्टेंट पीडियाट्रिशियन डॉ. बादशाह खान ने की। लक्षणों को देखते हुए उन्होंने तुरंत आंत में रुकावट (इंटेस्टाइनल ऑब्स्ट्रक्शन) की आशंका व्यक्त करते हुए बालक को तत्काल भर्ती कराया।
जांच के दौरान किए गए एक्स-रे में पेट के भीतर धातु की वस्तुएं दिखाई दीं, जबकि सीटी स्कैन से पुष्टि हुई कि कई मैग्नेट छोटी आंत में फंसे हुए हैं। इसके बाद डॉ. बिनल शाह ने कोलोनोस्कोपी के माध्यम से मैग्नेट निकालने का प्रयास किया, लेकिन वे बड़ी आंत तक नहीं पहुंचे थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डॉ. भावेश दोशी और डॉ. प्रदीप शेनॉय ने आपातकालीन शल्य चिकित्सा करने का निर्णय लिया।
सफल ऑपरेशन के दौरान चिकित्सकों ने छोटी आंत में फंसे सभी चुंबकीय धातु के टुकड़ों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। समय पर उपचार मिलने के कारण बालक की आंत में छेद होने अथवा स्थायी क्षति जैसी गंभीर जटिलताओं से बचाव हो गया। सफल उपचार के बाद बालक पूरी तरह स्वस्थ होकर लगभग एक सप्ताह बाद अस्पताल से अपने घर लौट गया।
डॉ. बादशाह खान ने कहा कि अधिकांश अभिभावक यह मान लेते हैं कि यदि बच्चा कोई छोटी वस्तु निगल ले तो वह स्वतः शरीर से बाहर निकल जाएगी, लेकिन मैग्नेट के मामले में ऐसा बिल्कुल नहीं होता। दो छोटे मैग्नेट भी आंत की दीवारों के आर-पार एक-दूसरे से चिपक सकते हैं, जिससे रक्त प्रवाह रुक सकता है, आंत में छेद हो सकता है और जानलेवा संक्रमण फैल सकता है। उन्होंने विशेष रूप से ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों के अभिभावकों से सतर्क रहने की अपील की।
वहीं डॉ. भावेश दोशी ने कहा कि बच्चों द्वारा एक से अधिक मैग्नेट निगल लेना सबसे गंभीर चिकित्सीय आपात स्थितियों में से एक है। उन्होंने बताया कि समय पर जांच, सही निदान और तत्काल शल्य चिकित्सा के कारण ही बालक का जीवन बचाया जा सका। यदि किसी बच्चे के मैग्नेट या बटन बैटरी निगलने का संदेह हो तो घर पर प्रतीक्षा करने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।
वॉकहार्ट हॉस्पिटल्स, मीरा रोड के विशेषज्ञों ने सभी अभिभावकों से अपील की है कि मैग्नेट वाले खिलौने, मैग्नेटिक बीड्स, बटन बैटरियां, सिक्के तथा अन्य छोटी धातु की वस्तुएं बच्चों की पहुंच से हमेशा दूर रखें। यदि बच्चा ऐसी कोई वस्तु निगल ले तो उसे उल्टी कराने का प्रयास न करें और बिना किसी विलंब के निकटतम अस्पताल पहुंचें। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर उपचार मिलने से गंभीर शल्य चिकित्सा, स्थायी शारीरिक क्षति तथा जानलेवा जटिलताओं से बचा जा सकता है।
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