पालघर: जिले में ‘बिजली को समझना’ विषय पर संगोष्ठी, सावधानी ही बचाव का सबसे बड़ा उपाय।

पालघर: जिले में ‘बिजली को समझना’ विषय पर संगोष्ठी, सावधानी ही बचाव का सबसे बड़ा उपाय।

अखिलेश चौबे 
पालघर। जिला अधिकारी डॉ. इंदुराणी जाखड, मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद पालघर मनोज रानडे तथा निवासी उपजिलाधिकारी सुभाष भागडे के मार्गदर्शन में जिला आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा “बिजली को समझना” विषय पर एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर स्वामी रामानंद तीर्थ मराठवाड़ा विश्वविद्यालय, उपकेंद्र लातूर के प्राध्यापक डॉ. प्रमोद पाटील ने उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बिजली गिरने के खतरों तथा उससे बचाव के उपायों के बारे में विस्तृत मार्गदर्शन दिया। संगोष्ठी में जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी विवेकानंद कदम, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल के मुकेश बाजिया एवं उनकी टीम, ग्राम विकास अधिकारी, तलाठी, आपदा मित्र तथा अन्य राजस्व विभाग के कर्मचारी उपस्थित रहे।
संगोष्ठी में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार पालघर जिले की स्थापना वर्ष 2014 से लेकर वर्ष 2025 तक बिजली गिरने की घटनाओं में कुल 27 लोगों की मृत्यु हो चुकी है। इन घटनाओं को देखते हुए बिजली गिरने की प्रक्रिया को समझना और इससे बचाव के उपायों के बारे में जनजागरूकता फैलाना अत्यंत आवश्यक बताया गया।
विशेषज्ञों ने बताया कि जिले में पूर्व मानसून तथा मानसून के बाद बिजली गिरने की घटनाएं अधिक होती हैं, ऐसे में नागरिकों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए। पालघर जिले के जव्हार, मोखाडा और विक्रमगड तालुका को उच्च जोखिम क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है, जहां बिजली गिरने की घटनाएं अधिक होती हैं। वहीं डहाणू, तलासरी और वाडा तालुका को मध्यम जोखिम क्षेत्र बताया गया, जहां आंधी-तूफान के दौरान बिजली गिरने की संभावना रहती है।
संगोष्ठी में “30-30 फॉर्मूला” के बारे में भी जानकारी दी गई। इसके अनुसार यदि बिजली की चमक दिखाई देने के 30 सेकंड के भीतर गरजने की आवाज सुनाई दे, तो समझना चाहिए कि बिजली करीब 5 किलोमीटर के दायरे में गिरी है। ऐसी स्थिति में तत्काल सावधानी बरतते हुए सुरक्षित स्थान पर चले जाना चाहिए तथा अंतिम गरज सुनाई देने के बाद कम से कम 30 मिनट तक सुरक्षित स्थान पर ही रहना चाहिए।
विशेषज्ञों ने बिजली गिरने के वैज्ञानिक कारणों, उसकी प्रकृति तथा कब, कहां और क्यों बिजली गिरती है, इस पर विस्तार से जानकारी दी। अध्ययन में यह भी सामने आया कि राज्य में बिजली गिरने से होने वाली मौतों में 15 से 40 वर्ष आयु वर्ग के पुरुषों की संख्या अधिक है, जिसका मुख्य कारण लापरवाही, जागरूकता की कमी तथा आवश्यक सुविधाओं का अभाव बताया गया।
संगोष्ठी में यह भी बताया गया कि बिजली गिरना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिससे उत्पन्न नाइट्रोजन डाइऑक्साइड वर्षा के पानी में मिलकर भूमि को प्राकृतिक उर्वरक प्रदान करता है।
सुरक्षा उपायों के अंतर्गत नागरिकों को सलाह दी गई कि अचानक बिजली गिरने की स्थिति में घर के अंदर ही सुरक्षित रहें। अस्थायी आश्रय जैसे झोपड़ी या पशुशाला में खड़े रहने से बचें। मोबाइल फोन का उपयोग कम करें, समूह में एक साथ खड़े रहने के बजाय दूरी बनाकर रहें तथा धातु की वस्तुओं से दूर रहें। खुले मैदान में होने पर नीचले स्थान पर बैठने का प्रयास करें और पैरों के नीचे प्लास्टिक या लकड़ी का उपयोग करें।
साथ ही ऊंचे पेड़ों के नीचे खड़े न हों और पानी के स्रोतों या सड़क किनारे बिजली गिरने के समय ठहरने से बचें। चारपहिया वाहन में होने पर दरवाजे और खिड़कियां बंद रखकर किसी भी धातु को छुए बिना बैठे रहें, जबकि दोपहिया वाहन चालक तुरंत सुरक्षित स्थान पर चले जाएं।
संगोष्ठी में दामिनी ऐप के उपयोग की भी जानकारी दी गई, जिसके माध्यम से नागरिक बिजली गिरने की संभावित जानकारी समय रहते प्राप्त कर सकते हैं। प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने का आग्रह किया गया।
यह भी बताया गया कि बिजली गिरने से मृत्यु होने पर मृतक के परिजनों को चार लाख रुपये की सहायता दी जाती है, लेकिन इसे प्राकृतिक आपदा के रूप में दर्ज किए जाने के कारण कई बार अन्य शासकीय लाभ नहीं मिल पाते। इसलिए ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जागरूकता और सावधानी अत्यंत आवश्यक है।
जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे सतर्क रहें, जागरूकता बढ़ाएं और दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन कर इस प्राकृतिक आपदा से होने वाले नुकसान को कम करने में सहयोग करें।

Comments

Popular posts from this blog

पालघर: यू.एस.ओस्तवाल इंग्लिश अकादमी स्कूल में रोटरी क्लब ऑफ बोईसर तारापुर की नशामुक्ति जागरूकता पहल।

पालघर: चिन्मया विद्यालय कक्षा 10वीं में 100% परिणाम के साथ उत्कृष्ट प्रदर्शन।शारन्या माबियन ने 99.60% अंक लाकर किया कमाल, चिन्मया विद्यालय में बनीं टॉपर।

पालघर: तारापुर एमआईडीसी में ओलियम गैस रिसाव से हड़कंप - भघेरिया केमिकल्स से निकली जहरीली गैस।प्रशासन की आपात चेतावनी; गांवों में सतर्कता, तकनीकी दल जुटा।