मुंबई: गिलियन-बारे सिंड्रोम के तीन मरीजों का सफल उपचार, पनवेल में दो नए मामले सामने आने से स्वास्थ्य विभाग सतर्क।

मुंबई: गिलियन-बारे सिंड्रोम के तीन मरीजों का सफल उपचार, पनवेल में दो नए मामले सामने आने से स्वास्थ्य विभाग सतर्क।

अखिलेश चौबे 
मुंबई। गिलियन-बारे सिंड्रोम (GBS) जैसे दुर्लभ लेकिन गंभीर तंत्रिका संबंधी रोग को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। मुंबई के मीरा रोड स्थित वॉकहार्ट हॉस्पिटल में जून 2026 के दौरान इस बीमारी से पीड़ित तीन मरीजों का सफलतापूर्वक उपचार किया गया है। वहीं, दो दिन पहले पनवेल क्षेत्र में भी गिलियन-बारे सिंड्रोम के दो मरीज उपचाराधीन पाए जाने की जानकारी मिलने के बाद पनवेल महानगरपालिका का स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है।
चिकित्सकों के अनुसार गिलियन-बारे सिंड्रोम (GBS) एक दुर्लभ ऑटोइम्यून न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जिसमें किसी वायरल अथवा बैक्टीरियल संक्रमण के बाद शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से तंत्रिकाओं पर हमला करने लगती है। इसके कारण हाथ-पैरों में झुनझुनी, मांसपेशियों में कमजोरी, चलने-फिरने में कठिनाई, संतुलन बिगड़ना तथा गंभीर स्थिति में लकवा और सांस लेने में परेशानी जैसी जानलेवा जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं।
वॉकहार्ट हॉस्पिटल, मीरा रोड के कंसल्टेंट इंटरवेंशनल न्यूरोलॉजिस्ट एवं स्ट्रोक विशेषज्ञ डॉ. पवन किशोर पै ने बताया कि जून 2026 के दौरान अस्पताल में गिलियन-बारे सिंड्रोम से पीड़ित तीन मरीजों का सफल उपचार किया गया। उन्होंने कहा कि यह बीमारी न्यूरोलॉजिकल इमरजेंसी की श्रेणी में आती है और इसके शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना मरीज के लिए गंभीर साबित हो सकता है। समय पर पहचान, उचित उपचार और नियमित पुनर्वास के माध्यम से अधिकांश मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकते हैं।
इस बीच पनवेल क्षेत्र में दो मरीजों के उपचाराधीन होने की जानकारी सामने आने के बाद पनवेल महानगरपालिका के स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। विभाग ने संबंधित क्षेत्रों में आवश्यक सतर्कता बरतने, मरीजों की स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रखने तथा जरूरत पड़ने पर तत्काल चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार बढ़ती मांसपेशियों की कमजोरी, सीढ़ियां चढ़ने में कठिनाई, हाथ-पैरों में झुनझुनी, चेहरे की मांसपेशियों में कमजोरी, निगलने में परेशानी अथवा सांस लेने में दिक्कत जैसे लक्षण दिखाई दें तो बिना देर किए न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करें। समय पर उपचार मिलने से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि गिलियन-बारे सिंड्रोम भले ही दुर्लभ बीमारी हो, लेकिन इसके प्रति जागरूकता और शुरुआती पहचान ही सबसे प्रभावी बचाव है। चिकित्सकों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देकर किसी भी संदिग्ध लक्षण की स्थिति में तत्काल विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेने की सलाह दी है।

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