पालघर: बाणगंगा मामले में प्रशांत संखे का बड़ा आरोप, शिकायतों के बावजूद कार्रवाई में ढिलाई।जिला जल एवं स्वच्छता विभाग पर उठे सवाल, परियोजना निदेशक अतुल पारसकर पर काम टालने के आरोप।

पालघर: बाणगंगा मामले में प्रशांत संखे का बड़ा आरोप, शिकायतों के बावजूद कार्रवाई में ढिलाई।
जिला जल एवं स्वच्छता विभाग पर उठे सवाल, परियोजना निदेशक अतुल पारसकर पर काम टालने के आरोप।

अखिलेश चौबे
पालघर। जिले के बाणगंगा से जुड़े मामले में प्रशासनिक लापरवाही और अनदेखी को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। भारतीय जनता पार्टी पालघर जिला उपाध्यक्ष प्रशांत संखे द्वारा संबंधित विभाग और अधिकारियों पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई में देरी का मुद्दा सामने लाया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिला परिषद पालघर के जिला जल एवं स्वच्छता विभाग के परियोजना निदेशक अतुल पारसकर के पास जनवरी महीने से इस मामले का लगातार पालन किया जा रहा था। आरोप है कि इसके बावजूद हर बार अलग-अलग व्यक्तिगत कारणों का हवाला देकर कार्य को टाल दिया गया।
प्रशांत संखे का कहना है कि इस संबंध में कई बार फोन, एसएमएस और व्हाट्सऐप के माध्यम से संपर्क साधने का प्रयास किया गया, लेकिन संबंधित अधिकारी की ओर से कोई संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं दी गई। इससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बताया जा रहा है कि विभाग की ओर से औपचारिक रूप से नोटिस भी जारी किए गए थे, लेकिन उनकी वास्तविक अमलदारी शून्य रही। आरोप के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया केवल कागजी कार्यवाही तक सीमित रही और जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
प्रशांत संखे ने यह भी आरोप लगाया है कि बाणगंगा विषय में संबंधित व्यक्तियों द्वारा उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान किया गया और उनकी शिकायतों पर समय रहते कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने प्रशासन से इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है।
उन्होंने कहा कि शासन अधिकारियों को केवल कागजी कार्यवाही के लिए नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर काम को पूरा करने और आम जनता की समस्याओं का समाधान करने के लिए वेतन दिया जाता है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अंततः जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) ने इसमें हस्तक्षेप किया। उनके निर्देश और लगातार फॉलोअप के बाद ही संबंधित कार्य को आगे बढ़ाया गया और समाधान संभव हो सका।
प्रशांत संखे ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा समय पर हस्तक्षेप करने के लिए आभार व्यक्त किया है, वहीं संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए भविष्य में ऐसी लापरवाही न होने की मांग की है। हालांकि, इस संबंध में परियोजना निदेशक अतुल पारसकर की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी है।

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