पालघर: हरित महाराष्ट्र के लिए नागरिकों की पहल, पालघर में तैयार किए गए 30 हजार बीज गोले।वन विभाग के मार्गदर्शन में बड़े पैमाने पर जनसहभाग, वर्ष 2047 तक 300 करोड़ वृक्षारोपण लक्ष्य को लेकर जागरूकता।

पालघर: हरित महाराष्ट्र के लिए नागरिकों की पहल, पालघर में तैयार किए गए 30 हजार बीज गोले।
वन विभाग के मार्गदर्शन में बड़े पैमाने पर जनसहभाग, वर्ष 2047 तक 300 करोड़ वृक्षारोपण लक्ष्य को लेकर जागरूकता।

अखिलेश चौबे
पालघर। जिले में हरित महाराष्ट्र के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत “वृक्षारोपण मार्गदर्शन एवं बीज गोला निर्माण कार्यक्रम” का आयोजन उत्साहपूर्ण वातावरण में किया गया। यह कार्यक्रम वनपरिक्षेत्र अधिकारी (प्रादेशिक) सुशील नांदवटे के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को स्वयंप्रेरणा से वृक्षारोपण के लिए प्रोत्साहित करना, पर्यावरण संतुलन को पुनः स्थापित करना और वर्ष 2047 तक 300 करोड़ वृक्षारोपण के लक्ष्य के प्रति जनजागरण करना था।
इस कार्यक्रम में वन विभाग के वनपाल, वनरक्षक, सर्पमित्र संगठन, विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाएं, विद्यार्थी तथा बड़ी संख्या में नागरिकों ने भाग लेकर सक्रिय सहभागिता दिखाई।
कार्यक्रम के दौरान साग, बेडा, हिरडा, आम, जामुन, खैर, बांस, सुरंग, हापुस, कदंब, पीपल और उमर जैसे स्थानीय वृक्षों के बीज एकत्र कर उनका वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत बीज गोले तैयार किए गए। बीज गोले बनाने के लिए 50 प्रतिशत मिट्टी, 45 प्रतिशत गोबर खाद और 5 प्रतिशत महीन मिट्टी व कोकोपीट का मिश्रण उपयोग में लाया गया।
प्रतिभागियों को समूहों में विभाजित कर उन्हें अलग-अलग प्रजातियों के बीज दिए गए। प्रारंभ में बीज गोला निर्माण का प्रात्यक्षिक प्रस्तुत किया गया, जिसके बाद वन अधिकारी, कर्मचारी, विद्यार्थी और नागरिकों के संयुक्त प्रयास से कुल 30,000 बीज गोले तैयार किए गए। वैज्ञानिक पद्धति से बनाए गए इन बीज गोलों से 70 से 80 प्रतिशत तक पौधों के विकसित होने की संभावना जताई गई है।
तैयार किए गए बीज गोलों का उपयोग आगामी वर्ष 2026 के मानसून सीजन में जंगल क्षेत्र, खाली जमीन, बंजर भूमि और अन्य उपयुक्त क्षेत्रों में वृक्षारोपण के लिए किया जाएगा।
इस अवसर पर वनपरिक्षेत्र अधिकारी सुशील नांदवटे ने कहा कि बीज गोला निर्माण केवल वृक्षारोपण की प्रक्रिया नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के लिए जनसहभाग बढ़ाने का एक प्रभावी माध्यम है। उन्होंने सभी नागरिकों से कम से कम एक पौधा लगाने और उसके संरक्षण का संकल्प लेने की अपील की।
उन्होंने यह भी बताया कि राष्ट्रीय वन नीति 1988 के अनुसार 33 प्रतिशत वन क्षेत्र का लक्ष्य केवल विभागीय प्रयासों से संभव नहीं है, इसके लिए जनभागीदारी अत्यंत आवश्यक है। नागरिकों, युवाओं, विद्यार्थियों, सरकारी संस्थाओं और निजी कंपनियों से इस अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया गया।
कार्यक्रम को प्रतिस्पर्धात्मक स्वरूप भी दिया गया, जिसमें भारती चव्हाण और भोये के समूह ने 3,450 बीज गोले तैयार कर प्रथम स्थान प्राप्त किया। विजेता टीम को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
वन विभाग ने जानकारी दी कि इस वर्ष पालघर वनपरिक्षेत्र में 3 लाख बीज गोले तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए वन कर्मचारी और अधिकारी—श्री पिंपळे, घुटे, भारती चव्हाण, निकिता गवळी, वृषाली वरठा, सुगरे, भोये, धरमले, कांबळे, कावडी, हमरे और घेगड—ने सक्रिय सहभागिता का आश्वासन दिया है। कार्यक्रम का समापन वनपाल राजू पिंपळे द्वारा आभार प्रदर्शन के साथ हुआ।
वन विभाग ने बताया कि अगला बीज गोला निर्माण कार्यक्रम 5 जून 2026 को सुबह 11 बजे वनपरिक्षेत्र अधिकारी कार्यालय, पालघर (मजीद के सामने, घोलविरा) में आयोजित किया जाएगा। अधिक जानकारी के लिए राजू पिंपळे (वनपाल) और प्रदीप कांबळे (वनरक्षक) से संपर्क करने की अपील की गई है।

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