मुंबई: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पहल पर महाराष्ट्र में एआई आधारित स्वास्थ्य सेवाओं की शुरुआत।

मुंबई: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पहल पर महाराष्ट्र में एआई आधारित स्वास्थ्य सेवाओं की शुरुआत।

अखिलेश चौबे 
मुंबई। महाराष्ट्र में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, तकनीक आधारित और जनसुलभ बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित आधुनिक तकनीकों को स्वास्थ्य सेवाओं में शामिल करने के उद्देश्य से राज्य सरकार और सामाजिक उद्देश्य से कार्य करने वाली संस्था वाधवानी एआई (LEHS AI Unit) के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
यह समझौता मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री प्रकाश आबिटकर की उपस्थिति में संपन्न हुआ। इस पहल का उद्देश्य राज्य के अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण, समयबद्ध और प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि डिजिटल महाराष्ट्र अब विकास के अगले चरण में प्रवेश कर रहा है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक “फोर्स मल्टिप्लायर” साबित होगी। उन्होंने कहा कि वाधवानी एआई के सहयोग से राज्य में एआई आधारित स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा।
आबिटकर ने बताया कि क्षयरोग, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में एआई तकनीक का उपयोग करने से रोगों की शीघ्र पहचान, बेहतर उपचार और अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कर्मियों को समय पर मार्गदर्शन मिल सकेगा। इससे राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली अधिक मजबूत और प्रभावी बनेगी।
वाधवानी एआई के प्रमुख शेखर शिव सुब्रमणियन ने भी इस साझेदारी पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि महाराष्ट्र सरकार के साथ यह सहयोग नवाचार, समानता और दीर्घकालीन प्रभाव वाले स्वास्थ्य सुधारों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इस समझौते के तहत क्षयरोग उन्मूलन के लिए एआई आधारित तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इसके माध्यम से मरीजों के उपचार छोड़ने की संभावना, उपचार में आने वाली बाधाओं और मृत्यु के जोखिम को उपचार की शुरुआत में ही पहचानने में मदद मिलेगी। इससे उच्च जोखिम वाले मरीजों पर समय रहते विशेष ध्यान देकर उचित उपचार सुनिश्चित किया जा सकेगा।
इसके अलावा “कफ अगेंस्ट टीबी” नामक एआई आधारित एप्लिकेशन के माध्यम से खांसी की आवाज का विश्लेषण कर क्षयरोग की प्रारंभिक पहचान तेज और आसान बनाई जाएगी। साथ ही उपगांव स्तर पर क्षयरोग जोखिम का आकलन करने के लिए विशेष मानचित्र तैयार किए जाएंगे, जिससे सक्रिय रोगी खोज अभियान को अधिक प्रभावी ढंग से चलाया जा सकेगा।
राज्य की ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा में भी एआई आधारित क्लीनिकल डिसीजन सपोर्ट सिस्टम जोड़ा जाएगा। इससे चिकित्सकों को रोगियों की शिकायतों का संक्षिप्त विवरण प्राप्त करने और सटीक निदान करने में सहायता मिलेगी।
मधुमेह से पीड़ित मरीजों के लिए “मधुनेत्रा” नामक एआई प्रणाली के माध्यम से आंखों की जांच में सहायता दी जाएगी, जिससे जरूरत पड़ने पर मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सकों के पास भेजा जा सकेगा। इसके साथ ही “हेल्थ वाणी” नामक एआई आधारित संवाद प्रणाली के माध्यम से आशा और एएनएम जैसे अग्रिम स्वास्थ्य कर्मियों को मोबाइल पर ही प्रशिक्षण और आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
मातृ और नवजात शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी एआई तकनीक का उपयोग किया जाएगा। “शिशु मापन” नामक एआई आधारित एप्लिकेशन की मदद से केवल स्मार्टफोन और साधारण उपकरणों के माध्यम से नवजात शिशु का वजन, लंबाई तथा सिर और छाती की परिधि मापी जा सकेगी। इससे जन्म के बाद 42 दिनों तक शिशुओं की देखभाल और निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी।
बताया गया कि वर्तमान में वाधवानी एआई की पहल के माध्यम से देशभर में 15 करोड़ से अधिक लोगों तक सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। स्वास्थ्य, कृषि और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में संस्था सामाजिक परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
इस समझौते के बाद महाराष्ट्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से अधिक सशक्त, समावेशी और जनहितकारी सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली विकसित करने का मार्ग प्रशस्त होने की उम्मीद जताई जा रही है।

Comments

Popular posts from this blog

पालघर: जिले में युवक की बेरहमी से हत्या का खुलासा, छह आरोपी गिरफ्तार, एक नाबालिग हिरासत में..!

पालघर: यू.एस.ओस्तवाल इंग्लिश अकादमी स्कूल में रोटरी क्लब ऑफ बोईसर तारापुर की नशामुक्ति जागरूकता पहल।

पालघर: बोईसर में 27 लाख की एटीएम लूट का खुलासा, पुलिस ने चोरी करने वाले गैंग को दबोचा..!