सातारा: बैठक में अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति को मिला नया नेतृत्व, प्रमोदिनी मंडपे बनीं राज्य अध्यक्ष।

सातारा: बैठक में अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति को मिला नया नेतृत्व, प्रमोदिनी मंडपे बनीं राज्य अध्यक्ष।

अखिलेश चौबे 
सतारा। जिला स्थित कास पठार में 14 और 15 मार्च को आयोजित महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति की राज्य कार्यकारिणी बैठक में संगठन की वरिष्ठ कार्यकर्ता प्राचार्या प्रमोदिनी सुकुमार मंडपे को सर्वसम्मति से राज्य अध्यक्ष पद के लिए चुना गया। यह निर्णय संगठन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रमोदिनी मंडपे पिछले 40 वर्षों से संगठन के संस्थापक डॉ. नरेंद्र दाभोलकर के साथ अंधश्रद्धा निर्मूलन के कार्य से जुड़ी रही हैं। वे रयत शिक्षण संस्था के डीएड कॉलेज की प्राचार्या रह चुकी हैं तथा अंधश्रद्धा निर्मूलन विषय पर कई पुस्तकें लिख चुकी हैं। इसके साथ ही उन्होंने अनेक व्याख्यान और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में जागरूकता फैलाने का कार्य किया है।
बैठक में सरोजमाई पाटील को संगठन का मार्गदर्शक भी सर्वसम्मति से नियुक्त किया गया। इस दौरान वर्ष 2026 से 2029 तक की नई राज्य कार्यकारिणी का गठन किया गया, जिसमें विभिन्न विभागों के लिए पदाधिकारियों की घोषणा की गई।
बुवाबाजी संघर्ष विभाग में नंदिनी जाधव (पुणे) को कार्यवाह नियुक्त किया गया, जबकि सहकार्यवाह के रूप में कमलाकर जमदाडे (बिलोली, नांदेड), परदेशी जगदीश (छत्रपती संभाजी नगर), भगवान रणदिवे (सातारा) और शंकर बोर्डे (जालना) को जिम्मेदारी दी गई।
सोशल मीडिया विभाग में वाघेश साळुंखे (विटा, सांगली) को कार्यवाह तथा सई सावंत (मुंबई), गौरव सर्जेराव (मुंबई), राहुल माने (पुणे) और ज्ञानेश्वर गिराम (जालना) को सहकार्यवाह बनाया गया।
सांस्कृतिक विभाग की जिम्मेदारी डॉ. अस्मिता बालगावकर (सोलापुर) को दी गई, जबकि सीमा पाटील (कोल्हापुर), शिवाजी कांबळे (नांदेड), देवानंद बडगे (नागपुर) और विनोद वायंगणकर (रत्नागिरी) सहकार्यवाह नियुक्त किए गए।
जात निर्मूलन व विवेकपूर्ण जीवनसाथी चयन विभाग में शंकर कणसे (सातारा) को कार्यवाह तथा निशा भोसले (सोलापुर), बालकृष्ण भापकर (पुणे) और अनिल गोंडाने (गोंदिया) को सहकार्यवाह बनाया गया।
वार्तापत्र एवं प्रकाशन संपादक मंडल में राजीव देशपांडे (नवी मुंबई), मुक्ता दाभोलकर (मुंबई), अनिल चव्हाण (कोल्हापुर) और राहुल थोरात (सांगली) को शामिल किया गया।
प्रकाशन विभाग में प्रभाकर नानावटी (बेळगाव) को कार्यवाह तथा श्रीपाल ललवाणी (पुणे) को सहकार्यवाह नियुक्त किया गया।
वैज्ञानिक जाणीवा प्रकल्प अंतर्गत डॉ. नरेंद्र दाभोलकर लोकविद्यापीठ में रमेश माने (लातूर) को राज्य कार्यवाह तथा सुजाता म्हेत्रे (तासगाव, सांगली), मधुकर गायकवाड (जालना), सुभाष सोळंखी (पुणे) और जोतिबा आगसिमनी (बेळगाव) को सहकार्यवाह बनाया गया।
महिला विभाग में उषा शहा (सोलापुर) को कार्यवाह तथा देवयानी भगत (नागपुर), गीता हसुरकर (कोल्हापुर) और किरण जाधव (अंबरनाथ, ठाणे) को सहकार्यवाह नियुक्त किया गया।
विविध उपक्रम विभाग में प्रवीण देशमुख (ठाणे) को कार्यवाह बनाया गया, जबकि फारुख गवंडी (सांगली), संजय निटवे (सांगली), संदेश घोलप (पालघर), संदेश गायकवाड (रायगड), रामभाऊ नलावडे (पुणे), शारदा खोब्रागडे (चंद्रपूर), विजय सुर्वे (पुणे) और ज्ञानेश्वर डाकोरे (नांदेड) को सहकार्यवाह की जिम्मेदारी सौंपी गई।
युवा विभाग में बालू माळी (कोल्हापुर) को कार्यवाह तथा मुंजाजी कांबळे (परभणी), प्रथमेश कुरणे (मुंबई), राजू जाधव (पुणे) और विनायक माळी (मंगळवेढा, सोलापुर) को सहकार्यवाह नियुक्त किया गया।
मानसिक आरोग्य विभाग में वंदना माने (सातारा) को कार्यवाह तथा विजया श्रीखंडे (नागपुर), उदय चव्हाण (सातारा), नरेंद्र कांबळे (वर्धा), अमोल पवार (पलूस, सांगली) और साधना बाजारे (चाकण, पुणे) को सहकार्यवाह बनाया गया।
संघटना बांधणी विभाग में हमीद दाभोलकर (सातारा) को कार्यवाह तथा रामभाऊ डोंगरे, प्रकाश घादगिने (लातूर), मिलिंद देशमुख (पुणे), अनिश पटवर्धन (दापोली) और शाम महाजन (छत्रपती संभाजीनगर) को सहकार्यवाह की जिम्मेदारी दी गई।
प्रशिक्षण विभाग में सम्राट हटकर (नांदेड) को कार्यवाह तथा अण्णा कडलासकर (पालघर), वंदना शिंदे (ठाणे), राजेंद्र कांकरिया (पिंपरी चिंचवड, पुणे) और नीता सामंत (चाळीसगाव) को सहकार्यवाह नियुक्त किया गया।
विवेक वाहिनी विभाग में अशोक कदम (बार्शी) को कार्यवाह तथा एस. के. माने (ईश्वरपूर, सांगली), नवनाथ अडकीने (नांदेड) और जगदीश आवटे (वाघोली, पुणे) को सहकार्यवाह बनाया गया।
कायदा विभाग में दीपक भाते (पालघर) को कार्यवाह तथा विजयकुमार बर्गे (बारामती, पुणे) और पुजा जाधव (वर्धा) को सहकार्यवाह नियुक्त किया गया।
इसके अतिरिक्त, उपरोक्त सदस्यों में से 20 सदस्यों की राज्य कार्यकारी समिति का भी गठन किया गया है।
इस दो दिवसीय बैठक में महाराष्ट्र के 23 जिलों के 121 तालुकों से 300 से अधिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। बैठक का आयोजन सातारा जिला शाखा द्वारा सुव्यवस्थित तरीके से किया गया, जिसकी सभी ने सराहना की।
इस बैठक को संगठन के विस्तार और अंधश्रद्धा निर्मूलन आंदोलन को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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