पालघर: शिवशंभू प्रतिष्ठान की नई पहल, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को सौंपा पत्र।शिवाजी महाराज और डॉ. आंबेडकर की प्रतिमाएं लगाने की उठी मांग।
पालघर: शिवशंभू प्रतिष्ठान की नई पहल, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को सौंपा पत्र।
शिवाजी महाराज और डॉ. आंबेडकर की प्रतिमाएं लगाने की उठी मांग।
अखिलेश चौबे
पालघर। जिले के औद्योगिक शहर बोईसर में अब सांस्कृतिक पहचान को लेकर एक बड़ी मांग जोर पकड़ रही है। सामाजिक संगठन शिवशंभू प्रतिष्ठान, बोईसर ने महाराष्ट्र उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को पत्र लिखकर छत्रपति शिवाजी महाराज और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की पूर्णाकृति प्रतिमाओं के अनावरण हेतु अनुमति देने की मांग की है। इस पहल के बाद क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर चर्चा और समर्थन तेजी से बढ़ रहा है।
प्रतिष्ठान की ओर से दिए गए पत्र में स्पष्ट किया गया है कि बोईसर और आसपास के क्षेत्र की आबादी करीब 2.5 से 3 लाख के बीच है, लेकिन पूरे शहर और उसके 10 किलोमीटर के दायरे में इन दोनों महान विभूतियों की एक भी प्रतिमा मौजूद नहीं है। इसे स्थानीय लोगों की भावनाओं के साथ जुड़ा अहम मुद्दा बताया गया है।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि बोईसर महाराष्ट्र के सबसे बड़े एमआईडीसी क्षेत्रों में से एक है, जहां राज्य के विभिन्न जिलों के साथ-साथ देशभर से लोग आकर बसे हुए हैं। ऐसे में छत्रपति शिवाजी महाराज और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जैसे महान व्यक्तित्वों की प्रतिमाओं का अभाव स्थानीय नागरिकों को खल रहा है।
शिवशंभू प्रतिष्ठान ने अपनी मांग में प्रस्तावित स्थानों का भी उल्लेख किया है। इसके अनुसार, बोईसर के मुख्य प्रवेश द्वार के पास स्थित मुकुट कंपनी के नजदीक छत्रपति शिवाजी महाराज की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाए, जबकि शहर के मध्यवर्ती स्थान मधुर होटल के समीप स्थित आंबेडकर चौक में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा स्थापित की जाए।
प्रतिष्ठान का कहना है कि यह केवल प्रतिमाएं स्थापित करने का विषय नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत, स्वाभिमान और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देने से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने उपमुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि पालघर के जिलाधिकारी को आवश्यक निर्देश दिए जाएं, ताकि इस मांग को जल्द से जल्द अमल में लाया जा सके।
इस मांग के सामने आने के बाद बोईसर के नागरिकों में भी उत्साह देखा जा रहा है और बड़ी संख्या में लोग इस पहल का समर्थन कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस पर कितनी जल्दी निर्णय लेता है और क्षेत्र को इन दो महान महापुरुषों की प्रतिमाओं का सौभाग्य कब मिलता है।
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