रायगढ़: चवदार तालाब सत्याग्रह से समता की नींव, शताब्दी वर्ष में समानता आधारित भारत का संकल्प।
रायगढ़: चवदार तालाब सत्याग्रह से समता की नींव, शताब्दी वर्ष में समानता आधारित भारत का संकल्प।
अखिलेश चौबे
रायगढ़। महाड स्थित ऐतिहासिक चवदार तालाब सत्याग्रह के शताब्दी वर्ष के शुभारंभ अवसर पर आयोजित भव्य कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सामाजिक समता, न्याय और संवैधानिक मूल्यों को दोहराते हुए भेदभावमुक्त समाज निर्माण का संकल्प व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के नेतृत्व में हुआ यह सत्याग्रह केवल पानी के अधिकार के लिए नहीं, बल्कि मानव सम्मान और समानता की लड़ाई था।
महाराष्ट्र शासन के सामाजिक न्याय एवं विशेष सहायता विभाग द्वारा महाड (जिला रायगढ़) में इस शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया तथा चवदार तालाब के जलशुद्धिकरण एवं परिसर सौंदर्यीकरण के लिए 55 करोड़ 80 लाख रुपये की परियोजना का भूमिपूजन किया।
इस अवसर पर केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री रामदास आठवले, महिला एवं बाल विकास मंत्री आदिती तटकरे, उद्योग एवं मराठी भाषा मंत्री उदय सामंत, सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट, रोजगार गारंटी योजना, फलोत्पादन एवं खारभूमि विकास मंत्री भरत गोगावले, महाराष्ट्र विधानसभा उपाध्यक्ष अण्णा बनसोडे, रायगढ़ जिला परिषद अध्यक्ष मंगेश वाकडीकर, सांसद सुनील तटकरे, सांसद धैर्यशील पाटिल, विधायक प्रवीण दरेकर, महाड नगराध्यक्ष सुनील कविस्कर, प्रधान सचिव (सामाजिक न्याय) डॉ. हर्षदीप कांबळे, समाज कल्याण आयुक्त दीपा मुधोळ मुंडे, रायगढ़ जिलाधिकारी किशन जावळे, जिला परिषद मुख्य कार्यकारी अधिकारी नेहा भोसले, पुलिस अधीक्षक आंचल दलाल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, सामाजिक संगठन और राज्यभर से आए नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान चवदार तालाब परिसर में स्थापित डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा पर हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा कर श्रद्धांजलि दी गई। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत छत्रपति शिवाजी महाराज और बाबासाहेब आंबेडकर को नमन करते हुए की।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि वर्ष 1923 में सार्वजनिक जलस्रोतों को सभी के लिए खोलने का कानून बना था, लेकिन समाज के कुछ वर्गों ने उसका पालन नहीं किया। इसके विरोध में डॉ. आंबेडकर ने चवदार तालाब सत्याग्रह का नेतृत्व किया, जो सामाजिक क्रांति का महत्वपूर्ण चरण बना। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष अस्पृश्यता और विषमता के खिलाफ मानवता की लड़ाई थी, जिसने देशभर में सार्वजनिक जलस्रोतों को सभी के लिए खोलने की दिशा में मार्ग प्रशस्त किया।
उन्होंने आगे कहा कि इस ऐतिहासिक स्थल को स्वच्छ, प्रेरणादायी और विश्वस्तरीय स्वरूप में विकसित किया जाएगा। राज्य सरकार सामाजिक न्याय के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है, जिनमें अनुसूचित जातियों पर अत्याचार के पीड़ित परिवारों के 98 सदस्यों को सरकारी नौकरी देना, पीपल्स एजुकेशन सोसायटी को सहायता, चैत्यभूमि स्मारक कार्य, तथा लंदन और जापान में बाबासाहेब की स्मृतियों के संरक्षण से जुड़े उपक्रम शामिल हैं। साथ ही बोधगया में महाराष्ट्र भवन निर्माण और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में बाबासाहेब के नाम से चेयर स्थापित करने के प्रयास जारी हैं।
केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने अपने विशिष्ट काव्य शैली में संबोधन करते हुए महाड में ‘भीमसृष्टि’ स्मारक निर्माण की मांग की। उन्होंने कहा कि संविधान मजबूत है और उसे बदलने की बातें निराधार हैं।
मंत्री भरत गोगावले ने चवदार तालाब विकास परियोजना को शताब्दी वर्ष से पहले पूरा करने का संकल्प व्यक्त किया तथा रायगढ़ में ‘शिवसृष्टि’ और महाड में ‘भीमसृष्टि’ निर्माण की मांग रखी। वहीं सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट ने अपने प्रास्ताविक में लगभग 56 करोड़ रुपये की योजना से इस ऐतिहासिक स्थल के सर्वांगीण विकास की जानकारी दी।
कार्यक्रम के दौरान अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण कानून के तहत मृतकों के आश्रितों में से 98 लाभार्थियों को मुख्यमंत्री फडणवीस द्वारा सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र वितरित किए गए। इनमें छाया अश्विन कांबळे (क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले बालिका शासकीय छात्रावास, गौरीपाड़ा, कल्याण), पूनम दिनेश जाधव (डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर बालक छात्रावास, शाहपुर), सारिका बलभीम बनसोडे (सहायक आयुक्त, समाज कल्याण), अनुष्का सुरेंद्रकुमार (पिछड़ा वर्ग एवं आर्थिक रूप से कमजोर बालिका छात्रावास, गोधलपाड़ा, अलीबाग), पूजा नितीन मस्के (संत जनाबाई बालिका छात्रावास, पुणे), धीरज प्रकाश पवार (डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर छात्रावास, पैठण, जिला छत्रपति संभाजीनगर) सहित अन्य लाभार्थियों को नियुक्ति प्रदान की गई।
मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि भारतीय संविधान ने सभी नागरिकों को समान अधिकार दिए हैं और इसी के कारण देश प्रगति कर रहा है। उन्होंने समाज से विषमता और भेदभाव समाप्त कर समतामूलक भारत निर्माण का आह्वान किया।
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