पालघर: लुपिन लिमिटेड में 55वें राष्ट्रीय सुरक्षा सप्ताह का समापन, ‘शून्य दुर्घटना’ का संकल्प दोहराया गया।

पालघर: लुपिन लिमिटेड में 55वें राष्ट्रीय सुरक्षा सप्ताह का समापन, ‘शून्य दुर्घटना’ का संकल्प दोहराया गया।

अखिलेश चौबे 
पालघर। जिले के तारापुर औद्योगिक क्षेत्र स्थित लुपिन लिमिटेड में 55वें राष्ट्रीय सुरक्षा सप्ताह का समापन समारोह उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर औद्योगिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य संचालनालय, पालघर के सह-निदेशक माधव तोटेवाड तथा सहायक निदेशक श्रीनिवास सब्बन विशेष रूप से उपस्थित रहे।
कंपनी के सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रबंधन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। समारोह के दौरान सुरक्षा सप्ताह के अंतर्गत आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को अतिथियों के हाथों पुरस्कार प्रदान किए गए।
कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी शशिन पाटिल ने बताया कि यद्यपि यह सुरक्षा सप्ताह का औपचारिक समापन है, फिर भी कंपनी ने इसे “सुरक्षा माह” के रूप में आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की थीम जनभागीदारी, प्रशिक्षण और सशक्तिकरण पर आधारित है, जिसके माध्यम से उच्च स्तर की औद्योगिक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
सुरक्षा सप्ताह के दौरान आयोजित कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी संदीप टकले ने दी। उन्होंने बताया कि इस दौरान सुरक्षा स्लोगन, पोस्टर प्रतियोगिता, कवि सम्मेलन, प्रश्नोत्तरी, नाटिका, स्व-नियंत्रित श्वसन उपकरण (SCBA) का प्रदर्शन, जागरूकता अभियान, रंगोली, महिला सुरक्षा कार्यक्रम, अग्निशमन प्रशिक्षण तथा वीडियो रील प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इसके साथ ही बच्चों के लिए पोस्टर और वक्तृत्व प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया।
इस अवसर पर सहायक निदेशक श्रीनिवास सब्बन ने कर्मचारियों के उत्साह और सहभागिता की सराहना करते हुए कहा कि लुपिन के कर्मचारी कला और रचनात्मक माध्यमों के जरिए प्रभावी सुरक्षा जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि लगातार दो वर्षों से इस कार्यक्रम में भागीदारी उनके लिए प्रेरणादायक रही है।
लुपिन तारापुर के प्रमुख डॉ. संजय बेरड ने अपने संबोधन में सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली को और सुदृढ़ बनाने तथा दुर्घटनाओं के कारणों के गहन विश्लेषण पर बल दिया। उन्होंने कर्मचारियों से सुरक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण संबंधी नियमों का पालन करते हुए “शून्य दुर्घटना” के लक्ष्य को प्राप्त करने का आह्वान किया।
मुख्य अतिथि माधव तोटेवाड ने कंपनी की सुरक्षा व्यवस्था और कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि छोटी या बड़ी कोई भी दुर्घटना गंभीर और दूरगामी परिणाम उत्पन्न कर सकती है, जिसका प्रभाव व्यक्ति, परिवार, सहकर्मियों और पूरे उद्योग पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि औद्योगिक दुर्घटनाएं देश की अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित करती हैं। दुर्घटनाओं की प्रकृति को उन्होंने महासागर में तैरते हिमखंड (आइसबर्ग) से तुलना करते हुए समझाया कि जो दिखाई देता है, उसके पीछे कई गहरे और छिपे हुए कारण होते हैं।
कार्यक्रम का समापन अध्यक्षीय संबोधन एवं आभार प्रदर्शन के साथ किया गया, जिसमें सभी ने मिलकर सुरक्षित कार्य संस्कृति को अपनाने और ‘शून्य दुर्घटना’ के लक्ष्य की दिशा में सतत प्रयास करने का संकल्प लिया।

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