पालघर: 112 हेल्पलाइन पर लाउडस्पीकर की शिकायत करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता की पहचान उजागर करने का आरोप।बोईसर पुलिस पर गंभीर सवाल, शिकायतकर्ता ने पुलिस अधीक्षक से की निष्पक्ष जांच की मांग।
पालघर: 112 हेल्पलाइन पर लाउडस्पीकर की शिकायत करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता की पहचान उजागर करने का आरोप।
बोईसर पुलिस पर गंभीर सवाल, शिकायतकर्ता ने पुलिस अधीक्षक से की निष्पक्ष जांच की मांग।
अखिलेश चौबे
पालघर। नवरात्रोत्सव के दौरान निर्धारित समय-सीमा के बाद लाउडस्पीकर बजाए जाने की शिकायत 112 हेल्पलाइन पर करने वाले एक सामाजिक कार्यकर्ता ने बोईसर पुलिस पर अपनी पहचान उजागर करने का आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि पुलिसकर्मियों ने मौके पर मौजूद आयोजकों के सामने उनका नाम बता दिया, जिसके बाद आयोजकों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। इस घटनाक्रम के कारण उन्हें मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
सामाजिक कार्यकर्ता के अनुसार, उन्होंने धार्मिक उत्सव का विरोध करने के उद्देश्य से शिकायत नहीं की थी, बल्कि ध्वनि प्रदूषण से संबंधित नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए पुलिस की 112 हेल्पलाइन पर सूचना दी थी। उनका कहना है कि निर्धारित समय के बाद लाउडस्पीकर बजाए जाने की शिकायत पर नियमानुसार कार्रवाई होना आवश्यक है। ऐसे में शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखे जाने की अपेक्षा थी।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि बोईसर पुलिस के कर्मचारियों ने घटनास्थल पर आयोजकों के सामने उनकी पहचान उजागर कर दी। उनका दावा है कि इसके बाद आयोजकों ने उनके साथ अनुचित व्यवहार किया, जिससे उन्हें मानसिक तनाव झेलना पड़ा। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है और पुलिस का पक्ष सामने आना भी आवश्यक है।
सामाजिक कार्यकर्ता ने पुलिस अधीक्षक से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने शिकायत से संबंधित अभिलेखों, 112 हेल्पलाइन पर हुई बातचीत के विवरण और घटनास्थल पर पहुंचे पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच करने का अनुरोध किया है। साथ ही, उन्होंने यह भी मांग की है कि जांच के दौरान यह स्पष्ट किया जाए कि शिकायतकर्ता की पहचान किस परिस्थिति में और किसके द्वारा उजागर की गई।
शिकायतकर्ता ने भविष्य में ऐसी परिस्थितियों में शिकायत करने वाले नागरिकों को किसी भी प्रकार के अनुचित दबाव या परेशानी से बचाने तथा मामले में की गई कार्रवाई की जानकारी उन्हें उपलब्ध कराने की मांग भी की है।
सामाजिक कार्यकर्ता ने स्पष्ट किया कि उन्हें किसी धार्मिक उत्सव या धार्मिक आयोजन से कोई आपत्ति नहीं है। उनका उद्देश्य केवल ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित कराना था। उनका कहना है कि नागरिकों को नियमों के उल्लंघन की शिकायत करने का अवसर मिलना चाहिए और शिकायत करने के कारण उन्हें किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ना चाहिए।
फिलहाल, शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों पर पुलिस प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता और संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।
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