मुंबई: महाराष्ट्र में दहीहंडी का जश्न पड़ा भारी, मुंबई में ११८ गोविंदा घायल; दो अलग हादसों में बच्चे और महिला की मौत।मालवणी में सात वर्षीय रुद्र कदम की जान गई, पिंपरी-चिंचवड़ के सांगवी में लोहे का ढांचा गिरने से सलमा पठान की मौत।
मुंबई: महाराष्ट्र में दहीहंडी का जश्न पड़ा भारी, मुंबई में ११८ गोविंदा घायल; दो अलग हादसों में बच्चे और महिला की मौत।
मालवणी में सात वर्षीय रुद्र कदम की जान गई, पिंपरी-चिंचवड़ के सांगवी में लोहे का ढांचा गिरने से सलमा पठान की मौत।
अखिलेश चौबे
मुंबई। महाराष्ट्र में शनिवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर आयोजित दहीहंडी उत्सव के दौरान उत्साह और उल्लास के बीच कई हादसे भी सामने आए। मुंबई में शाम ६ बजे तक बृहन्मुंबई महानगरपालिका और सरकारी अस्पतालों से प्राप्त जानकारी के अनुसार ११८ गोविंदा घायल हुए। इसी दौरान मुंबई के मालवणी में दहीहंडी आयोजन के दौरान ईंट का खंभा गिरने से सात वर्षीय बच्चे की मौत हो गई, जबकि पिंपरी-चिंचवड़ के पुराने सांगवी क्षेत्र में दहीहंडी का ढांचा हटाने के दौरान लोहे का हिस्सा गिरने से ४५ वर्षीय महिला की जान चली गई। लगातार सामने आए इन हादसों ने दहीहंडी आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था और भारी ढांचों के उपयोग को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बृहन्मुंबई महानगरपालिका के अनुसार, मालाड पश्चिम के मालवणी स्थित चीकूवाड़ी की एकता वेलफेयर सोसायटी में दोपहर करीब ३.०१ बजे हादसा हुआ। जानकारी के मुताबिक, कुछ बच्चे स्वयं दहीहंडी मना रहे थे। दहीहंडी को पेड़ और भूतल के ईंट के खंभे के सहारे रस्सी से बांधा गया था। बच्चे जब मटकी फोड़ने का प्रयास कर रहे थे, तभी ईंट का खंभा अचानक गिर गया और उसकी चपेट में सात वर्षीय रुद्र कदम आ गया। सिर में गंभीर चोट लगने के बाद उसे मालवणी सामान्य अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद महानगरपालिका कर्मचारी और पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे।
पिंपरी-चिंचवड़ के पुराने सांगवी क्षेत्र में दहीहंडी कार्यक्रम समाप्त होने के बाद अस्थायी लोहे का ढांचा हटाने के दौरान ४५ वर्षीय सलमा सलाउद्दीन पठान की मौत होने की जानकारी सामने आई है। बताया गया कि कार्यक्रम स्थल के पास देर रात ढांचा हटाने का काम चल रहा था। इसी दौरान अस्थायी लोहे के मेहराब का एक भारी हिस्सा अचानक गिरकर सलमा के सिर पर जा गिरा, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं और उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
जानकारी के अनुसार, मृतका का बेटा आयोजन मंडल से जुड़े स्वयंसेवकों में शामिल था। परिवार ने स्थानीय युवकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई न हो, इस उद्देश्य से औपचारिक आपराधिक शिकायत दर्ज नहीं कराने का निर्णय लिया। हालांकि, सांगवी पुलिस ने मामले में आकस्मिक मृत्यु की रिपोर्ट दर्ज कर आवश्यक जांच शुरू कर दी है। स्थानीय नागरिकों ने भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए आयोजन स्थल और भारी ढांचे लगाने तथा हटाने के दौरान सुरक्षा घेरा और कड़ी निगरानी सुनिश्चित करने की मांग की है।
महानगरपालिका और सरकारी अस्पतालों से शाम ६ बजे तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, मुंबई में दहीहंडी के दौरान ११८ गोविंदा घायल हुए। इनमें पांच अस्पताल में भर्ती, ८० उपचाराधीन और ३३ को उपचार के बाद छुट्टी दी जा चुकी थी। उपलब्ध अस्पतालवार आंकड़ों के अनुसार सीटी अस्पतालों में ८३, ईएस अस्पतालों में २१ और डब्ल्यूएस अस्पतालों में १४ गोविंदाओं के घायल होने की जानकारी दी गई।
सीटी अस्पतालों में एक व्यक्ति भर्ती, ६७ उपचाराधीन और १५ को छुट्टी दी गई। ईएस अस्पतालों में चार भर्ती, सात उपचाराधीन और १० को छुट्टी दी गई, जबकि डब्ल्यूएस अस्पतालों में छह घायलों का उपचार चल रहा था और आठ को छुट्टी दी गई। दोपहर ३ बजे महानगरपालिका की प्रारंभिक जानकारी में मुंबई में ३२ गोविंदाओं के घायल होने की सूचना थी, जो शाम ६ बजे तक बढ़कर ११८ हो गई।
दहीहंडी महाराष्ट्र की लोकप्रिय परंपरा है, लेकिन इन घटनाओं के बाद यह सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है कि उत्सव के दौरान मानव पिरामिड, भारी लोहे के ढांचे, विद्युत एवं अन्य अस्थायी व्यवस्थाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आयोजकों और संबंधित प्रशासन की जिम्मेदारी किस स्तर तक तय की जाती है। उत्सव की खुशी के बीच एक बच्चे और एक महिला की जान जाने तथा बड़ी संख्या में गोविंदाओं के घायल होने की घटनाएं सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर समीक्षा की आवश्यकता को सामने लाती हैं।
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