पालघर: आशादीप विद्यामंदिर में प्रतिभा, शिक्षा और साहित्य का सुंदर संगम, मेधावी विद्यार्थियों को चंद्र-मालती मेधा छात्रवृत्ति से किया सम्मानित।

पालघर: आशादीप विद्यामंदिर में प्रतिभा, शिक्षा और साहित्य का सुंदर संगम, मेधावी विद्यार्थियों को चंद्र-मालती मेधा छात्रवृत्ति से किया सम्मानित।

अखिलेश चौबे 
पालघर। जिले बोईसर पूर्व स्थित आशादीप विद्यामंदिर हाईस्कूल के परिसर में प्रतिभा, शिक्षा और साहित्य का सुंदर संगम देखने को मिला। विद्यालय में बीते शैक्षणिक सत्र की परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को चंद्र-मालती मेधा छात्रवृत्ति प्रदान कर सम्मानित किया गया। इसी अवसर पर आयोजित कवि सम्मेलन में कवियों ने अपनी प्रभावशाली रचनाओं के माध्यम से उपस्थित श्रोताओं को कभी गुदगुदाया तो कभी सामाजिक, पारिवारिक और मानवीय मूल्यों पर गंभीर चिंतन के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की वंदना तथा उपस्थित अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ। समारोह में संस्था के पदाधिकारियों के साथ संस्थापक प्रकाश त्रिपाठी, एस.एस. तिवारी, विद्यालय के मुख्याध्यापक हरिओम शरण मिश्र, शिक्षक-शिक्षिकाएं, विद्यार्थी तथा बड़ी संख्या में अभिभावक उपस्थित रहे।
कवि दीपक ‘दीप’ श्रीवास्तव ने अपनी रचनाओं के माध्यम से कार्यक्रम में साहित्यिक रंग भर दिया। जीवन में सत्य, ईमानदारी और सिद्धांतों पर अडिग रहने का संदेश देती उनकी रचना को उपस्थित श्रोताओं ने खूब सराहा। उन्होंने कहा—अपनी आदत बदल नहीं पाता, झूठ के साथ चल नहीं पाता। कैसे रोशन करे जमाने को, ‘दीप’ बिन तेल जल नहीं पाता।।
गुरुजनों के प्रति सम्मान तथा उनके आशीर्वाद को समर्पित अपनी दूसरी रचना के माध्यम से उन्होंने विद्यार्थियों को सन्मार्ग पर चलते रहने और गुरुजनों के विश्वास को बनाए रखने का संदेश दिया मेरी कला की साधना का नित नया विन्यास हो, साहित्य में संदेश हो—माधुर्य हो—उल्लास हो। पथ से कभी भटकूं नहीं, सन्मार्ग पर चलता रहूं, आशीष हो गुरु आपका, मुझ पर सदा विश्वास हो।
कवयित्री खुशबू गोयल ने अपनी रचना के माध्यम से नारी के विविध रूपों, उसके साहस, संघर्ष और राष्ट्र निर्माण में योगदान को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति में नारी को सृजन, संघर्ष, आत्मसम्मान और राष्ट्र गौरव का प्रतीक बताया गया। उनकी रचना को श्रोताओं ने खूब सराहा— खुशबू भरा गुलाब हूं मैं, तो कांटों का अंबार भी हूं मैं। अन्याय का प्रतिकार हूं मैं, तो सृष्टि का आधार भी हूं मैं। स्टेयरिंग थामे हाथों में,
नए भारत की उड़ान हूं मैं। सीमा पर लड़ती जवान हूं मैं,
और देश का अभिमान हूं मैं। 
कवि श्याम बाबू गुप्ता ने युवा पीढ़ी की बदलती सोच और कमजोर होते पारिवारिक संबंधों को अपनी कविता का विषय बनाया। उनकी मार्मिक पंक्तियों ने उपस्थित लोगों को परिवार, माता-पिता और रिश्तों के महत्व पर आत्ममंथन करने के लिए प्रेरित किया— जमीन बांटे, धन बांटे, और बांट दिया घर-बार,
स्वार्थ में अंधे होकर हमने, बांट दिया मां-बाप।
कवि सम्मेलन में प्रस्तुत विभिन्न रचनाओं के माध्यम से शिक्षा, संस्कार, सत्य, नारी सम्मान, पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे विषयों को प्रभावी ढंग से सामने रखा गया। साहित्यिक प्रस्तुतियों ने समारोह को केवल मनोरंजन तक सीमित न रखते हुए सामाजिक संदेश से भी जोड़ा।
समारोह का सबसे प्रेरणादायी पक्ष चंद्र-मालती मेधा छात्रवृत्ति रहा। कवि दीपक ‘दीप’ श्रीवास्तव अपने माता-पिता की स्मृति में प्रत्येक वर्ष उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को यह छात्रवृत्ति प्रदान करते हैं।
माता-पिता की स्मृति को विद्यार्थियों की शिक्षा, प्रतिभा और भविष्य निर्माण से जोड़ने की यह पहल शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायी उदाहरण के रूप में सामने आई। छात्रवृत्ति के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रोत्साहन मिलने के साथ उनकी मेहनत और प्रतिभा को सार्वजनिक रूप से सम्मान भी प्राप्त हुआ।
इस अवसर पर एस.एस. तिवारी ने कहा कि आगामी वर्ष से इस कार्यक्रम को रोहित सिंह की देखरेख में और अधिक नवीन, आकर्षक एवं व्यापक स्वरूप प्रदान किया जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में यह आयोजन विद्यार्थियों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के साथ साहित्यिक गतिविधियों के लिए भी महत्वपूर्ण मंच बनेगा।
समारोह के दौरान उपस्थित वक्ताओं ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में सफलता केवल अच्छे अंक प्राप्त करने से नहीं मिलती, बल्कि विनम्रता, अनुशासन, परिश्रम और संस्कार भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। विद्यार्थियों से अपने माता-पिता, गुरुजनों और बड़ों का आदर-सम्मान करने तथा निर्धारित लक्ष्य की दिशा में निरंतर परिश्रम करते रहने का आह्वान किया गया।
वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करना और उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनाना भी है।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के मुख्याध्यापक हरिओम शरण मिश्र ने सभी अतिथियों, संस्था पदाधिकारियों, कवियों, अभिभावकों, शिक्षक-शिक्षिकाओं तथा विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का सफल संचालन सहायक शिक्षिका जया शरद कुरकुटे ने किया।
आशादीप विद्यामंदिर हाईस्कूल में आयोजित यह समारोह मेधावी विद्यार्थियों के सम्मान के साथ-साथ साहित्यिक प्रस्तुतियों, सामाजिक संदेशों और संस्कारों की सीख के कारण विशेष रहा। चंद्र-मालती मेधा छात्रवृत्ति ने जहां विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया, वहीं कवि सम्मेलन ने उपस्थित लोगों को शिक्षा, सत्य, नारी सम्मान और पारिवारिक मूल्यों के प्रति अपनी जिम्मेदारी पर विचार करने का संदेश दिया।

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