मुंबई: फेफड़ों के स्वास्थ्य को लेकर बढ़ी चिंता, प्रदूषण से बचाव पर विशेषज्ञों का जोर, विश्व फेफड़ा दिवस पर विशेषज्ञों ने दी चेतावनी।

मुंबई: फेफड़ों के स्वास्थ्य को लेकर बढ़ी चिंता, प्रदूषण से बचाव पर विशेषज्ञों का जोर, विश्व फेफड़ा दिवस पर विशेषज्ञों ने दी चेतावनी।

अखिलेश चौबे 
मुंबई। विश्व फेफड़ा दिवस के अवसर पर मुंबई में फेफड़ों के स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर विशेषज्ञों ने जोर दिया। विशेषज्ञों के अनुसार वायु प्रदूषण, यातायात से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल तथा घर के भीतर मौजूद प्रदूषक फेफड़ों और श्वसन तंत्र के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। विशेष रूप से पीएम2.5 जैसे बेहद सूक्ष्म कण सांस के माध्यम से श्वसन तंत्र की गहराई तक पहुंच सकते हैं। लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से श्वसन संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों ने बताया कि मुंबई जैसे महानगर में प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों के कारण नागरिकों को अपने फेफड़ों के स्वास्थ्य के प्रति अधिक सजग रहने की आवश्यकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार खराब वायु गुणवत्ता फेफड़ों की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में वायु गुणवत्ता की जानकारी रखना और प्रदूषण के संपर्क को आवश्यकता के अनुसार कम करना स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
मुंबई महानगर पालिका से सूचना का अधिकार अधिनियम के माध्यम से प्राप्त 2016 से 2021 के आंकड़ों के अनुसार, मुंबई में इस अवधि के दौरान दीर्घकालिक अवरोधक फुफ्फुसीय रोग (सीओपीडी) से संबंधित 14,396 मौतें दर्ज की गई थीं। इसी अवधि में अस्थमा से संबंधित 7,069 मौतें भी दर्ज की गईं।
हालांकि, ये आंकड़े 2016 से 2021 की ऐतिहासिक अवधि से संबंधित हैं और 2026 में मुंबई की वर्तमान स्थिति का प्रत्यक्ष प्रतिनिधित्व नहीं करते, लेकिन इनसे शहर में श्वसन संबंधी बीमारियों से जुड़े स्वास्थ्य बोझ को समझने में मदद मिलती है।
वोक्हार्ट हॉस्पिटल्स, मीरा रोड की कंसल्टेंट पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. संगिता चेकर ने कहा कि लगातार खांसी, सांस फूलना, सीने में जकड़न या सांस लेते समय घरघराहट जैसे लक्षणों को केवल मौसम अथवा प्रदूषण का सामान्य प्रभाव मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उनके अनुसार समय पर जांच और उचित उपचार फेफड़ों के स्वास्थ्य की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने नागरिकों को सलाह दी कि यदि सांस से संबंधित लक्षण लगातार बने रहते हैं, तो चिकित्सकीय सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए। शुरुआती स्तर पर लक्षणों की जांच कराने से संबंधित स्वास्थ्य समस्या की पहचान और उपचार में सहायता मिल सकती है।
मुंबई के अपेक्स ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. पार्थिव शाह ने कहा कि फेफड़ों का स्वास्थ्य केवल धूम्रपान करने वाले लोगों तक सीमित विषय नहीं है। वायु प्रदूषण के संपर्क से बचाव, धूम्रपान से दूरी बनाए रखना, नियमित शारीरिक गतिविधि और समय पर चिकित्सकीय जांच भी फेफड़ों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं।
विशेषज्ञों ने नागरिकों से वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) पर नजर रखने और अत्यधिक प्रदूषित क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से लंबे समय तक रहने से बचने की अपील की है। साथ ही लगातार खांसी, सांस लेने में परेशानी, सीने में जकड़न या घरघराहट जैसे लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेने का आग्रह किया गया है।
विश्व फेफड़ा दिवस के अवसर पर विशेषज्ञों का मुख्य संदेश यही रहा कि फेफड़ों का स्वास्थ्य केवल बीमारी होने के बाद उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदूषण से बचाव, स्वस्थ जीवनशैली, लक्षणों के प्रति जागरूकता और समय पर चिकित्सकीय जांच के माध्यम से श्वसन स्वास्थ्य की बेहतर देखभाल की जा सकती है।

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