पालघर: बैंक में जमा हुई ₹1.50 लाख की ईएमआई, फिर ऋण खाते में क्यों नहीं दिखी? तत्कालीन कैशियर पर एफआईआर दर्ज।न्याय की तलाश में परिवार, अमर सावंत ने उठाया मामला; दस्तावेजों के साथ पुलिस तक पहुंची शिकायत।
पालघर: बैंक में जमा हुई ₹1.50 लाख की ईएमआई, फिर ऋण खाते में क्यों नहीं दिखी? तत्कालीन कैशियर पर एफआईआर दर्ज।
न्याय की तलाश में परिवार, अमर सावंत ने उठाया मामला; दस्तावेजों के साथ पुलिस तक पहुंची शिकायत।
अखिलेश चौबे
पालघर। जिले के भारत को-ऑपरेटिव बैंक, पालघर शाखा से जुड़े एक पुराने ऋण मामले में ऋण की किस्त के रूप में जमा की गई 1.50 लाख रुपये की राशि ऋण खाते में जमा नहीं होने का आरोप सामने आया है। इस मामले में पालघर पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। शिकायतकर्ता परिवार का आरोप है कि तत्कालीन कैशियर ने ऋण की किस्त के लिए दी गई रकम प्राप्त करने के बाद काउंटर स्लिप तो दी, लेकिन रकम ऋण खाते में जमा नहीं की गई।
मामले को लेकर पीड़ित परिवार की ओर से बोईसर के चितराले स्थित सरोवर होटल में पत्रकार वार्ता आयोजित की गई। परिवार के अनुसार, वे लंबे समय से इस मामले को लेकर शिकायत और संबंधित दस्तावेज अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत कर रहे थे। हैश फाउंडेशन के पालघर जिला अध्यक्ष अमर सावंत के समक्ष परिवार ने अपनी समस्या रखी, जिसके बाद सावंत ने मामले की जानकारी लेकर आवश्यक दस्तावेज और शिकायत पुलिस अधीक्षक कार्यालय तक पहुंचाने में परिवार की सहायता की। इसके बाद पालघर पुलिस थाने में मामले को लेकर एफआईआर दर्ज हुई।
एफआईआर में दर्ज शिकायत के अनुसार, अमित विकास परळकर, उम्र 47 वर्ष, व्यवसाय—व्यापार, निवासी आगरवाड़ी, सफाळे, पालघर अपने परिवार के साथ रहते हैं। उनका परिवार पालघर के माहिम रोड स्थित ‘साई ऑटो’ नाम से दोपहिया और चारपहिया वाहनों की खरीद-बिक्री का व्यवसाय करता है।
शिकायत के अनुसार, व्यवसाय के लिए अमित विकास परळकर और उनके दो भाई अमय परळकर तथा अव्दैत परळकर ने फरवरी 2019 में भारत को-ऑपरेटिव बैंक, पालघर शाखा से 1 करोड़ रुपये का ऋण लिया था। शिकायत में ऋण खाते का क्रमांक 009533510000152 बताया गया है।
परिवार का कहना है कि ऋण लेने के बाद वे नियमित रूप से किस्तों का भुगतान करते रहे। हालांकि, कोविड-19 के दौरान नवंबर और दिसंबर 2021 की दो किस्तें बकाया रह गई थीं।
शिकायत में बताया गया है कि ऋण की अगली किस्त 20 जनवरी 2022 को जमा की जानी थी। परिवार के अनुसार, 90 दिन की अवधि पूरी होने से पहले कम से कम एक किस्त जमा करना आवश्यक था, अन्यथा ऋण खाते के एनपीए यानी गैर-निष्पादित परिसंपत्ति में जाने की स्थिति बन सकती थी।
इसी वजह से शिकायतकर्ता के भाई अव्दैत परळकर 18 जनवरी 2022 को बैंक गए और बकाया ऋण किस्त की राशि में से कुल 1.50 लाख रुपये, तत्कालीन कैशियर ओंकार शशिकांत सालवी के पास जमा किए।
शिकायत के अनुसार, रकम स्वीकार किए जाने के बाद कैशियर की ओर से उन्हें काउंटर यानी ऋण पुनर्भुगतान रसीद की स्लिप भी दी गई थी। हालांकि, बाद में जब परिवार ने अपने ऋण खाते की जानकारी देखी तो उन्हें यह रकम खाते में जमा दिखाई नहीं दी।
शिकायतकर्ता के अनुसार, जब उन्होंने और उनके भाइयों ने बैंक से संपर्क कर 18 जनवरी 2022 को जमा की गई रकम ऋण खाते में जमा नहीं दिखाई देने के संबंध में जानकारी मांगी, तब बैंक की प्रबंधक ज्योति जव्हारकर ने उन्हें ऋण खाते का चार्टर्ड अकाउंटेंट के माध्यम से लेखा-परीक्षण कराने की सलाह दी।
इसके बाद परिवार ने अपने ऋण खाते का लेखा-परीक्षण कराया। शिकायत में दावा किया गया है कि लेखा-परीक्षण के दौरान 18 जनवरी 2022 को जमा की गई 1.50 लाख रुपये की रकम ऋण खाते में जमा नहीं होने की जानकारी सामने आई।
परिवार ने आरोप लगाया है कि रकम ऋण चुकाने के लिए तत्कालीन कैशियर ओंकार शशिकांत सालवी को दी गई थी और उसकी रसीद भी प्राप्त हुई थी, लेकिन इसके बावजूद रकम ऋण खाते में जमा नहीं की गई। शिकायत में इसे राशि के कथित गबन और धोखाधड़ी का मामला बताया गया है।
पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया कि यदि समय पर जमा की गई रकम ऋण खाते में दर्ज हो जाती तो खाते की स्थिति अलग हो सकती थी। परिवार का यह भी दावा है कि ईएमआई की रकम खाते में जमा न होने के कारण ऋण खाते के एनपीए होने की स्थिति बनी।
पत्रकार वार्ता के दौरान परिवार की ओर से बैंक कर्मचारियों पर जानबूझकर रकम जमा नहीं करने और बाद में संपत्ति पर बैंक की कार्रवाई का रास्ता बनने जैसे आरोप भी लगाए गए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों की वास्तविकता पुलिस जांच और संबंधित बैंक अभिलेखों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
मामले में हैश फाउंडेशन के पालघर जिला अध्यक्ष अमर सावंत की भूमिका को लेकर परिवार ने विशेष रूप से उनका आभार व्यक्त किया। परिवार के अनुसार, लगातार कई वर्षों तक मामला उठाने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने अमर सावंत से संपर्क किया और पूरे प्रकरण की जानकारी तथा संबंधित दस्तावेज उनके सामने रखे।
अमर सावंत ने परिवार से मामले की जानकारी लेने के बाद दस्तावेजों और शिकायत को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने में सहायता की। परिवार के अनुसार, पुलिस अधीक्षक कार्यालय तक शिकायत और आवश्यक कागजात पहुंचाने की प्रक्रिया में भी उन्होंने सहयोग किया। इसके बाद मामले में पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज होने की कार्रवाई हुई।
इसी मामले को सार्वजनिक रूप से सामने रखने और पत्रकारों को प्रकरण की जानकारी देने के उद्देश्य से परिवार की ओर से बोईसर में पत्रकार वार्ता आयोजित की गई, जिसमें अमर सावंत ने परिवार की ओर से मामले की जानकारी मीडिया के सामने रखने में सहयोग किया। परिवार ने कहा कि उनका उद्देश्य लंबे समय से लंबित मामले में निष्पक्ष जांच और न्याय प्राप्त करना है।
प्राप्त एफआईआर के अनुसार, एफआईआर क्रमांक 0309/2026 के तहत 20 सितंबर 2026 को पालघर पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया है। इसमें भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 316(4) और 318(4) के तहत प्रकरण दर्ज होने का उल्लेख है।
एफआईआर में ओंकार शशिकांत सालवी को आरोपी के रूप में दर्ज किया गया है। मामले की जांच की जिम्मेदारी पुलिस उपनिरीक्षक रमजान मदारसो शेख को दिए जाने का उल्लेख है।
अब पुलिस जांच में 18 जनवरी 2022 को जमा बताई गई 1.50 लाख रुपये की राशि, संबंधित काउंटर स्लिप, ऋण खाते का विवरण, बैंक के लेनदेन अभिलेख, लेखा-परीक्षण से संबंधित दस्तावेज तथा ऋण खाते की स्थिति की जांच महत्वपूर्ण होगी।
जांच के दौरान यह स्पष्ट किया जाना बाकी है कि शिकायतकर्ता द्वारा जमा बताई गई रकम बैंक के अभिलेखों में किस रूप में दर्ज हुई, वह ऋण खाते में क्यों दिखाई नहीं दी और इस पूरी प्रक्रिया में तत्कालीन बैंक कर्मचारी की क्या भूमिका थी।
वहीं, परिवार द्वारा संपत्ति पर नजर रखने तथा जानबूझकर ऋण खाते को एनपीए की स्थिति में पहुंचाने संबंधी आरोप भी फिलहाल शिकायतकर्ता का पक्ष हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
नोट: इस खबर में बैंक तथा आरोपी पक्ष का पत्रकार वार्ता में लगाए गए आरोपों पर पक्ष उपलब्ध नहीं हो सका है। एफआईआर में दर्ज आरोप अभी जांच के अधीन हैं। आरोप सिद्ध होना न्यायिक प्रक्रिया का विषय है।
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