पालघर: जिला परिषद में कृषि दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया, आधुनिक खेती और किसान सशक्तिकरण पर दिया गया विशेष जोर।

पालघर: जिला परिषद में कृषि दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया, आधुनिक खेती और किसान सशक्तिकरण पर दिया गया विशेष जोर।

अखिलेश चौबे 
पालघर। पूर्व मुख्यमंत्री वसंतराव नाईक की जयंती के अवसर पर बुधवार को पालघर जिला परिषद में कृषि दिवस उत्साह और गरिमापूर्ण वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज रानडे ने की। इस अवसर पर सतत कृषि, आधुनिक तकनीक के उपयोग, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा किसानों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने पर विशेष बल दिया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्व मुख्यमंत्री वसंतराव नाईक के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि देने के साथ हुआ। कार्यक्रम में जिला परिषद के उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी अशोक पाटील, डॉ. प्रकाश हसनाळकर, जिला कार्यक्रम अधिकारी (एमबीएके) व्यंकटराव हुंडेकर, डॉ. अंकुश धाने, तालुका कृषि अधिकारी स्मिता पाटील, विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए कृषि विकास अधिकारी सोमनाथ पिंजारी ने बताया कि पालघर जिले में खरीफ मौसम के लिए उर्वरकों और बीजों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि जिले में मोगरा और सोनचाफा जैसे फूलों की खेती का क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है। साथ ही किसानों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से दालचीनी और काली मिर्च जैसी मसाला फसलों की खेती के लिए राज्य सरकार की ओर से अनुदान भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान महाराष्ट्र शासन से सम्मानित किसानों, प्रगतिशील किसानों, बिरसा मुंडा कृषि क्रांति योजना के लाभार्थियों, जिला परिषद सेस फंड की विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित किसानों तथा मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले महिला स्वयं सहायता समूहों को सम्मानित किया गया। सम्मानित किसानों ने अपने सफल कृषि प्रयोगों, नवाचारों और अनुभवों को साझा करते हुए अन्य किसानों को भी आधुनिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज रानडे ने कहा कि "किसान देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। यदि किसान आधुनिक तकनीक, नवीन कृषि पद्धतियों और सरकार की विभिन्न योजनाओं का प्रभावी ढंग से लाभ उठाएं तो खेती अधिक समृद्ध, लाभकारी और टिकाऊ बन सकती है। जिला परिषद किसानों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।"
उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी अशोक पाटील ने अपने मार्गदर्शन में कहा कि "यदि सतत विकास का लक्ष्य प्राप्त करना है तो सतत कृषि को अपनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करते हुए आधुनिक तकनीक का समुचित उपयोग कर खेती को अधिक सशक्त और लाभकारी बनाया जा सकता है।"
कार्यक्रम में डॉ. प्रकाश हसनाळकर ने कहा कि प्रत्येक किसान का फसल बीमा होना आवश्यक है। साथ ही उन्होंने किसानों की उपज का उचित एवं लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित विभागों और संस्थाओं को समन्वित प्रयास करने की आवश्यकता पर बल दिया।
वहीं डॉ. अंकुश धाने ने किसानों से बदलते समय के अनुसार खेती की पद्धतियों में बदलाव अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि "जिस प्रकार खेती की मिट्टी का स्वस्थ रहना आवश्यक है, उसी प्रकार किसानों का स्वास्थ्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है। कीटनाशकों का छिड़काव करते समय सभी सुरक्षा उपायों का पालन करना चाहिए, उत्पादन लागत कम करने के उपाय अपनाने चाहिए तथा आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी लेकर शिक्षित एवं जागरूक किसान बनना समय की आवश्यकता है।"
कार्यक्रम के दौरान कृषि क्षेत्र से संबंधित विभिन्न सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी भी किसानों को दी गई। इसके साथ ही कृषि विशेषज्ञों, अधिकारियों और किसानों के बीच संवाद सत्र आयोजित किया गया, जिसमें कृषि विकास, आधुनिक खेती, उत्पादकता बढ़ाने तथा किसानों की आय में वृद्धि से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम का सफल संचालन सतीश साबळे ने किया। कृषि दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम ने किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, सरकारी योजनाओं और सतत खेती के महत्व के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ कृषि क्षेत्र में नवाचार और आत्मनिर्भरता का मजबूत संदेश दिया।

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