मुंबई: BARC के 28 वर्षीय कर्मचारी के अंगदान से कई लोगों को मिला नया जीवन, शोक की घड़ी में परिवार ने पेश की मानवता की मिसाल।

मुंबई: BARC के 28 वर्षीय कर्मचारी के अंगदान से कई लोगों को मिला नया जीवन, शोक की घड़ी में परिवार ने पेश की मानवता की मिसाल।

अखिलेश चौबे 
मुंबई। दुख और पीड़ा की घड़ी में भी मानवता का सर्वोच्च उदाहरण प्रस्तुत करते हुए भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) के 28 वर्षीय कर्मचारी के परिवार ने अंग एवं ऊतक दान का साहसिक निर्णय लेकर कई गंभीर मरीजों को नया जीवन देने का मार्ग प्रशस्त किया है। परिवार के इस प्रेरणादायी निर्णय की चिकित्सा जगत और समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा सराहना की जा रही है।
जानकारी के अनुसार, 24 जून की रात सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए युवक को पहले एक स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए बाद में उन्हें वॉकहार्ट हॉस्पिटल में स्थानांतरित किया गया, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों ने उन्हें बचाने के लिए लगातार प्रयास किए। हालांकि तमाम कोशिशों के बावजूद 29 जून को चिकित्सकों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया।
इस दुखद परिस्थिति में भी परिवार ने समाजहित को सर्वोपरि रखते हुए अंगदान के लिए सहमति प्रदान की। उनके इस निर्णय से कई ऐसे मरीजों को जीवनदान मिलने का अवसर मिला, जो लंबे समय से अंग प्रत्यारोपण का इंतजार कर रहे थे।
निर्धारित अंग आवंटन प्रक्रिया के तहत मृतक का लीवर और एक किडनी एच. एन. रिलायंस हॉस्पिटल भेजी गई, जबकि दूसरी किडनी का सफल प्रत्यारोपण वॉकहार्ट हॉस्पिटल में किया गया। वहीं उनका हृदय कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल भेजा गया, जहां प्रत्यारोपण की प्रक्रिया पूरी की गई।
इसके अतिरिक्त मृतक का अस्थि ऊतक (बोन टिश्यू) नेशनल टिश्यू बैंक एंड रिसर्च सेंटर (NTBRC) को सौंपा गया। इस ऊतक का उपयोग पुनर्निर्माण शल्य चिकित्सा तथा स्वीकृत चिकित्सा अनुसंधान में किया जाएगा, जिससे भविष्य में भी अनेक मरीजों को लाभ मिल सकेगा।
इस अवसर पर डॉ. सुशील कुमार ने परिवार के निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि, "अत्यंत दुख की इस घड़ी में भी इस परिवार ने निराशा के स्थान पर आशा को चुना। उनके निस्वार्थ निर्णय से कई मरीजों को नया जीवन मिला है और ऊतक दान से भविष्य में भी अनेक लोगों को लाभ मिलेगा। अंगदान मानवता के लिए किया जाने वाला सर्वोच्च दान है। हम इस परिवार के साहस और उदारता को हृदय से नमन करते हैं।"
अंगों की सफल निकासी, सुरक्षित परिवहन तथा समय पर विभिन्न अस्पतालों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए प्रत्यारोपण विशेषज्ञों, गहन चिकित्सा (आईसीयू) टीम, ट्रांसप्लांट समन्वयकों, नर्सिंग स्टाफ, एम्बुलेंस सेवाओं और संबंधित अस्पतालों ने उत्कृष्ट समन्वय का परिचय दिया। सभी टीमों के सामूहिक प्रयास से अंगों का समय पर प्रत्यारोपण संभव हो सका।
यह प्रेरणादायी घटना समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश देती है कि मृत्यु के बाद किया गया अंगदान अनेक लोगों के जीवन में नई आशा का संचार कर सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने नागरिकों से अपने परिवार के साथ अंगदान को लेकर खुलकर चर्चा करने और इस जीवनरक्षक अभियान से जुड़ने की अपील की है, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद मरीजों को समय पर जीवनदान मिल सके।

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