मुंबई: लगातार सिरदर्द को न करें नजरअंदाज: मीरा रोड के वॉकहार्ट हॉस्पिटल्स में दुर्लभ ट्यूमर का सफल इलाज।

मुंबई: लगातार सिरदर्द को न करें नजरअंदाज: मीरा रोड के वॉकहार्ट हॉस्पिटल्स में दुर्लभ ट्यूमर का सफल इलाज।

अखिलेश चौबे 
मुंबई। अक्सर लोग सिरदर्द को एक सामान्य समस्या मानकर अनदेखा कर देते हैं, लेकिन कई बार यही लापरवाही गंभीर बीमारी का रूप ले सकती है। ऐसा ही एक मामला मुंबई के मीरा रोड स्थित वॉकहार्ट हॉस्पिटल्स में सामने आया, जहां 37 वर्षीय एक युवक के लगातार सिरदर्द की जांच के दौरान खोपड़ी में एक दुर्लभ ट्यूमर का पता चला। समय रहते सटीक निदान और सफल सर्जरी के चलते मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर सामान्य जीवन में लौट आया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मरीज पिछले कुछ समय से सिर के बाईं ओर लगातार दर्द से परेशान था। उसने दर्द से राहत पाने के लिए सामान्य दर्द निवारक दवाओं का सहारा लिया, लेकिन उससे भी कोई विशेष लाभ नहीं हुआ। हालांकि, मरीज में कमजोरी, चक्कर, धुंधला दिखाई देना या शरीर के किसी हिस्से में सुन्नता जैसे अन्य न्यूरोलॉजिकल लक्षण दिखाई नहीं दे रहे थे। इसके बावजूद लगातार बने रहने वाले सिरदर्द को गंभीरता से लेते हुए विशेषज्ञ चिकित्सकों ने एमआरआई, सीटी स्कैन और पीईटी स्कैन जैसी उन्नत जांच कराने की सलाह दी।
जांच रिपोर्ट में खोपड़ी की हड्डी के बाईं ओर एक छोटा लेकिन दुर्लभ ट्यूमर पाया गया, जो धीरे-धीरे हड्डी को प्रभावित कर रहा था। इसके बाद वॉकहार्ट हॉस्पिटल्स, मीरा रोड के न्यूरोलॉजिस्ट, न्यूरोसर्जन, ऑन्कोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट और पैथोलॉजिस्ट की विशेषज्ञ टीम ने संयुक्त रूप से मरीज की स्थिति का मूल्यांकन कर सर्जरी करने का निर्णय लिया।
आधुनिक चिकित्सा तकनीक का उपयोग करते हुए सीटी आधारित न्यूरोनेविगेशन प्रणाली की सहायता से डॉक्टरों ने संगमरमर के आकार के इस ट्यूमर को अत्यंत सटीकता के साथ सफलतापूर्वक निकाल दिया। इस प्रक्रिया के दौरान आसपास के स्वस्थ ऊतकों को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया, जिससे जोखिम को न्यूनतम किया जा सका।
वॉकहार्ट हॉस्पिटल्स, मीरा रोड के कंसल्टेंट न्यूरोसर्जन डॉ. निमेष जैन ने बताया कि सिरदर्द एक सामान्य समस्या जरूर है, लेकिन यदि यह लगातार बना रहे, बार-बार हो या दवाओं से भी राहत न मिले, तो इसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। समय पर जांच और सही निदान से गंभीर बीमारियों का प्रारंभिक चरण में पता लगाया जा सकता है, जिससे उपचार अधिक प्रभावी और सफल होता है।
सर्जरी के मात्र तीन दिन बाद मरीज को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और वह शीघ्र ही सामान्य जीवन में लौट आया। बायोप्सी रिपोर्ट में लैंगरहैंस सेल हिस्टियोसाइटोसिस (LCH) नामक एक अत्यंत दुर्लभ बीमारी की पुष्टि हुई, जो वयस्कों में प्रति दस लाख लोगों में केवल एक से दो मामलों में ही पाई जाती है। वर्तमान में मरीज नियमित फॉलो-अप में स्वस्थ है।
विशेषज्ञों ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि सिरदर्द लगातार बना रहे, सामान्य दवाओं से आराम न मिले, दृष्टि में बदलाव, बार-बार दौरे, संतुलन बिगड़ना या अन्य न्यूरोलॉजिकल लक्षण दिखाई दें, तो बिना देरी विशेषज्ञ चिकित्सक से जांच कराएं। समय पर निदान और उपचार से गंभीर बीमारियों का सफलतापूर्वक इलाज संभव है।


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