पालघर: जंगल, झरने और जनजीवन: जिलाधिकारी डॉ. इंदू रानी जाखड ने जव्हार-मोखाडा के विकास को दी नई दिशा।
पालघर: जंगल, झरने और जनजीवन: जिलाधिकारी डॉ. इंदू रानी जाखड ने जव्हार-मोखाडा के विकास को दी नई दिशा।
अखिलेश चौबे
पालघर। जिले के जव्हार और मोखाडा तालुकों के सर्वांगीण विकास को नई गति देने के उद्देश्य से जिलाधिकारी ने विस्तृत क्षेत्रीय दौरा कर कई महत्वपूर्ण योजनाओं और परियोजनाओं का जायजा लिया। इस दौरे में पर्यटन विकास, बुनियादी ढांचे, जलसंरक्षण, आदिवासी रोजगार और नागरिक सुविधाओं को लेकर व्यापक दिशा तय की गई।
इस दौरान सहायक जिलाधिकारी एवं एकात्मिक आदिवासी विकास परियोजना (ITDP) जव्हार की प्रकल्प अधिकारी सहित वन विभाग, सार्वजनिक निर्माण विभाग, जिला परिषद, महिला एवं बाल विकास विभाग, राजस्व विभाग और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
कासटवाडी में लगभग 1.20 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किए जा रहे टू-वे जिपलाइन प्रोजेक्ट का निरीक्षण करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि पर्यटन केवल दर्शनीय स्थलों तक सीमित न रहकर एक संपूर्ण अनुभव प्रदान करने वाला होना चाहिए। उन्होंने पर्यटकों के लिए स्वच्छता, बैठने की व्यवस्था, खाद्य सेवाएं और अन्य मूलभूत सुविधाएं विकसित करने के निर्देश दिए। यह परियोजना अगले एक माह में शुरू होने की संभावना है।
इसके बाद दाभोसा जलप्रपात का दौरा कर लगभग 2 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित स्कायवॉक ग्लास ब्रिज परियोजना का निरीक्षण किया गया। जिलाधिकारी ने इसे जिले का प्रमुख पर्यटन केंद्र बताते हुए सार्वजनिक निर्माण विभाग को BOT (बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर) मॉडल पर समग्र विकास योजना तैयार करने के निर्देश दिए।
चार किलोमीटर पैदल चलकर जमीनी हकीकत का आकलन
कोगदा-खैरमाळ मार्ग की स्थिति का निरीक्षण करने के लिए जिलाधिकारी और अधिकारियों की टीम ने लगभग चार किलोमीटर पैदल यात्रा कर खैरमाळ गांव तक पहुंच बनाई। इसके बाद गेटपाडा गांव में स्थानीय सुविधाओं और विकास कार्यों की समीक्षा की गई।
गांवों में पारंपरिक आदिवासी घरों को होमस्टे में परिवर्तित करने की योजना पर भी बल दिया गया, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा और ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, किराए के भवन में संचालित आंगनवाड़ी केंद्र को सरकारी भवन में स्थानांतरित करने के निर्देश दिए गए।
वन विभाग द्वारा बनाए गए गेबियन और सीमेंट बंधारों का निरीक्षण करते हुए जिलाधिकारी ने नए निर्माण के बजाय मौजूदा संरचनाओं के रखरखाव और मरम्मत को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मानसून से पहले गाद हटाकर जलसंग्रह क्षमता बढ़ाना किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी होगा।
लघु सिंचाई विभाग, जिला परिषद और जलसंधारण विभाग को भी इसी दिशा में कार्य करने के निर्देश दिए गए। भविष्य में ‘ब्रिज-कम-बंधारा’ मॉडल को अपनाने पर भी बल दिया गया।
मोखाडा तहसील कार्यालय परिसर में आधार और महा-ई सेवा केंद्र का उद्घाटन जिलाधिकारी के हाथों किया गया। इस केंद्र के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिकों को आधार पंजीकरण, जाति प्रमाणपत्र, आय प्रमाणपत्र और निवास प्रमाणपत्र जैसी सेवाएं आसानी से उपलब्ध होंगी।
जव्हार के प्रमुख पर्यटन स्थल हनुमान पॉइंट का निरीक्षण करते हुए जिलाधिकारी ने स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और प्लास्टिक मुक्त अभियान को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए। साथ ही दिशा सूचक बोर्ड और सुविधाओं को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया गया।
बारिश के दौरान कई गांवों के संपर्क टूटने की समस्या को देखते हुए जिले में सभी अपूर्ण सड़कों का समग्र विकास आराखड़ा तैयार करने के निर्देश दिए गए। साथ ही भोपतगड को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए अलग योजना बनाने को कहा गया।
ढापरपाडा स्थित ‘जव्हार कैम्पिंग’ परियोजना का भी दौरा किया गया, जिसे आदिवासी विकास विभाग की सहायता से स्थानीय बचत समूह द्वारा विकसित किया गया है। यह परियोजना मुंबई, नाशिक और गुजरात से आने वाले पर्यटकों को आकर्षित कर रही है।
पूरे दौरे के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण, सड़क संपर्क और स्थानीय रोजगार को एक साथ जोड़कर ही क्षेत्र का समग्र विकास संभव है। जिलाधिकारी ने शासन, स्थानीय स्वराज संस्थाओं और स्वयंसेवी संगठनों को मिलकर कार्य करने का आह्वान किया।
धरती आबा जनजातीय योजना के अंतर्गत होमस्टे क्लस्टर विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया, जिससे आदिवासी समुदाय को स्थायी आजीविका के अवसर मिल सकें।
यह दौरा प्रशासनिक निरीक्षण से आगे बढ़कर विकास की एक व्यापक और दूरदर्शी रणनीति का प्रतीक बनकर उभरा है, जो आने वाले समय में जव्हार और मोखाडा के परिवर्तन का आधार बनेगा।
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