पालघर: “एकल महिला नीति” पर जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित, सशक्तिकरण और अधिकारों पर जोर।
पालघर: “एकल महिला नीति” पर जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित, सशक्तिकरण और अधिकारों पर जोर।
अखिलेश चौबे
पालघर। जिले में महिलाओं के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी कार्यालय, पालघर तथा जिला परिषद पालघर के संयुक्त तत्वावधान में “एकल महिला नीति” विषय पर जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला जिला परिषद मुख्यालय में मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज रानडे (भा.प्र.से.) के मार्गदर्शन में संपन्न हुई।
कार्यशाला में राज्य शासन द्वारा लागू एकल महिला नीति के उद्देश्यों पर विस्तृत चर्चा की गई। इसके अंतर्गत एकल महिलाओं के लिए चलाई जा रही विभिन्न शासकीय योजनाओं, उनके अधिकारों के संरक्षण, सामाजिक सुरक्षा, आर्थिक सशक्तिकरण तथा सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के उपायों पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया गया।
इस दौरान एकल महिलाओं की समस्याओं, उनकी आवश्यकताओं और उन्हें उपलब्ध कराई जा रही सरकारी सुविधाओं पर भी गंभीरता से चर्चा की गई। साथ ही, नीति के प्रभावी क्रियान्वयन तथा संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए आवश्यक कदमों पर विचार-विमर्श किया गया।
कार्यशाला में कई वरिष्ठ अधिकारी एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे, जिनमें व्यंकटराव हुंडेकर (जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास), विवेक चौधरी (जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी), रतिंद्र प्रकाश सुनसे (कौशल विकास एवं उद्यमिता मार्गदर्शन अधिकारी), संतोष प्रकाश पाटील (जिला समन्वयक, प्राथमिक शिक्षा विभाग), प्राजक्ता नामदेव पानसरे (समाजकल्याण अधिकारी), अशोक पाटील (शिक्षण अधिकारी, माध्यमिक), संभाजी भोजने (प्राचार्य, जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्था - DIET), संभाजी पवार (संरक्षण अधिकारी), राजकन्या आडोळे (अध्यक्ष, बाल कल्याण समिति, पालघर), डॉ. संगीता चौधरी (जिला स्वास्थ्य अधिकारी), प्रदीप के. सहारे (पुकार संस्था), श्रुतिका वसंत शितोळे (सदस्य कार्यकारी संचालक, पुकार संस्था एवं मिशन वात्सल्य, विक्रमगढ़) तथा विनोद राठोड (जिला बाल संरक्षण अधिकारी, जिला बाल संरक्षण कक्ष, पालघर) शामिल थे।
इसके अलावा विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, महिला प्रतिनिधि एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों की भी उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
कार्यशाला के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया कि एकल महिलाओं को समाज में समान अवसर, सुरक्षा और सम्मान दिलाने के लिए शासन एवं प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस प्रकार के आयोजनों से न केवल जागरूकता बढ़ेगी, बल्कि नीति के प्रभावी क्रियान्वयन को भी गति मिलेगी।
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