पालघर: जिले के तलासरी स्थित अणवीर गांव ने मनरेगा वृक्षारोपण में हासिल की 95 प्रतिशत सफलता, जिलाधिकारी डॉक्टर इंदू रानी जाखड़ ने सराहा।

पालघर: जिले के तलासरी स्थित अणवीर गांव ने मनरेगा वृक्षारोपण में हासिल की 95 प्रतिशत सफलता, जिलाधिकारी डॉक्टर इंदू रानी जाखड़ ने सराहा।

अखिलेश चौबे 
पालघर। जिले के तलासरी क्षेत्र स्थित अणवीर गांव ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत संचालित वृक्षारोपण अभियान में 95 प्रतिशत पौधों के संरक्षण का उल्लेखनीय लक्ष्य प्राप्त कर एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया है। इस पहल से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिला है, बल्कि स्थानीय आदिवासी परिवारों के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित हुए हैं।
करीब दो वर्षों की अवधि में इस परियोजना ने यह महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पालघर जिला इस प्रकार की नवाचार आधारित योजनाओं के क्रियान्वयन में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
महाराष्ट्र और गुजरात की सीमा पर स्थित अणवीर गांव पारंपरिक रूप से केवल खरीफ मौसम की धान खेती पर निर्भर रहा है। जल संकट और गर्मी के मौसम में बढ़ते तापमान के कारण यहां बहु-फसली खेती संभव नहीं हो पाती है। परिणामस्वरूप, खेती का मौसम समाप्त होने के बाद गांव के लोगों को निकटवर्ती औद्योगिक क्षेत्रों में रोजगार की तलाश करनी पड़ती है। हालांकि, इन अवसरों का लाभ मुख्यतः युवा और शिक्षित लोगों को ही मिल पाता है, जिससे वृद्ध और अकुशल श्रमिकों के लिए रोजगार के अवसर सीमित रह जाते हैं।
इसी समस्या के समाधान के उद्देश्य से पालघर जिला प्रशासन, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, सामाजिक वनीकरण विभाग तथा यशराज रिसर्च फाउंडेशन के संयुक्त सहयोग से ठाकरपाड़ा से पाटीलपाड़ा मार्ग पर व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाया गया। इस अभियान के माध्यम से स्थानीय श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया गया तथा पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिली।
इस परियोजना की सफलता का प्रमुख आधार ‘ट्री गार्ड सिस्टम’ अर्थात वृक्ष संरक्षण प्रणाली रही। इसके अंतर्गत प्रत्येक पौधे के साथ लगभग आठ फुट लंबी पाइप लगाई गई, जिसे टपक सिंचाई प्रणाली से जोड़ा गया। इस प्रणाली के माध्यम से प्रत्येक पौधे को हर 15 दिनों में लगभग 15 लीटर पानी उपलब्ध कराया जाता है, जिससे जल की बचत होती है और खुले में घूमने वाले पशुओं से पौधों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है।
निरंतर निगरानी, जनसहभागिता और आधुनिक तकनीकों के उपयोग के कारण इस परियोजना में लगभग 95 प्रतिशत पौधों का सफल संरक्षण सुनिश्चित किया गया है। वर्तमान में ये वृक्ष भूजल स्तर को बढ़ाने, छाया प्रदान करने तथा जैव विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
इस अभियान के माध्यम से स्थानीय नागरिकों के लिए रोजगार के अवसर भी उत्पन्न हुए हैं। अब तक इस परियोजना के तहत कुल 631 मानव-दिवस का रोजगार सृजित किया गया है। इसके साथ ही श्रमिकों के बैंक खातों में सीधे 1,92,297 रुपये की राशि हस्तांतरित की गई है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है।
गांव की महिलाओं ने गड्ढे खोदने, पौधों को पानी देने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने जैसे कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाई। इसके परिणामस्वरूप उन्हें अपने ही गांव में रोजगार प्राप्त हुआ। ग्राम पंचायत द्वारा गर्मी के मौसम में टैंकर के माध्यम से जल आपूर्ति सुनिश्चित की गई, जबकि यशराज रिसर्च फाउंडेशन के कर्मचारियों ने तकनीकी मार्गदर्शन और रखरखाव में सहयोग प्रदान किया।
परियोजना से लाभान्वित महिला रेणुका काकड़ ने बताया कि इस पहल से गांव की महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिला है और मजदूरी सीधे बैंक खाते में प्राप्त होने से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। साथ ही वृक्षारोपण से गांव की सड़कों की सुंदरता भी बढ़ी है और पर्यावरण में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिला है।
इस परियोजना के अंतर्गत एक अभिनव शैक्षणिक पहल भी की गई है, जिसके तहत ठाकरपाड़ा प्राथमिक विद्यालय के विद्यार्थियों को प्रत्येक वृक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ रही है और प्रकृति के प्रति जुड़ाव भी मजबूत हो रहा है।
इस संबंध में पालघर की जिलाधिकारी डॉक्टर इंदू रानी जाखड़ ने कहा कि 95 प्रतिशत पौध संरक्षण का लक्ष्य प्राप्त करना अत्यंत महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि जनसहभागिता और मनरेगा के प्रभावी समन्वय के माध्यम से पर्यावरणीय तथा सामाजिक-आर्थिक विकास को सफलतापूर्वक प्राप्त किया जा सकता है। ऐसे प्रयासों को ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर लागू किया जाना चाहिए, जिससे सतत विकास को गति मिल सके।

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