मुंबई: दुर्लभ सर्जरी; 11 वर्षीय बच्ची की थायरॉयड ग्रंथि में फंसी मछली की हड्डी सफलतापूर्वक निकाली, डॉक्टरों ने बचाई जान।
मुंबई: दुर्लभ सर्जरी; 11 वर्षीय बच्ची की थायरॉयड ग्रंथि में फंसी मछली की हड्डी सफलतापूर्वक निकाली, डॉक्टरों ने बचाई जान।
अखिलेश चौबे
मुंबई। मीरा रोड स्थित वॉकहार्ट हॉस्पिटल में डॉक्टरों की टीम ने एक बेहद जटिल और दुर्लभ सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए 11 वर्षीय बच्ची की जान बचाई। बच्ची के गले में फंसी मछली की हड्डी असामान्य रूप से भोजन नली को छेदते हुए थायरॉयड ग्रंथि तक पहुंच गई थी, जिसे सुरक्षित निकालना डॉक्टरों के लिए बड़ी चुनौती बन गया था।
जानकारी के अनुसार, बच्ची मछली खाने के बाद लगातार गले में दर्द और निगलने में परेशानी की शिकायत के साथ अस्पताल पहुंची थी। प्रारंभिक जांच के तहत एंडोस्कोपी की गई, लेकिन उसमें हड्डी का कोई पता नहीं चला। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों ने सीटी स्कैन कराया, जिसमें यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि हड्डी भोजन नली को पार कर थायरॉयड ग्रंथि के बाएं हिस्से में जाकर फंस गई है, जिससे वहां संक्रमण और मवाद बन गया था।
इस जटिल मामले में वरिष्ठ ईएनटी विशेषज्ञ और हेड एंड नेक ऑनकोसर्जन डॉ. चंद्र वीर सिंह के नेतृत्व में डॉ. शीतल राडिया और उनकी टीम ने सर्जरी की जिम्मेदारी संभाली। डॉक्टरों के अनुसार, इस प्रकार के मामले बेहद दुर्लभ होते हैं, क्योंकि सामान्यतः मछली की हड्डी गले या भोजन नली में ही फंसी रहती है और एंडोस्कोपी से आसानी से निकाल ली जाती है। लेकिन जब हड्डी आसपास के ऊतकों या ग्रंथि तक पहुंच जाती है, तब ओपन सर्जरी ही एकमात्र विकल्प रह जाता है।
सर्जरी से पहले बच्ची को एंटीबायोटिक दवाओं के माध्यम से संक्रमण नियंत्रित किया गया। इसके बाद गले की ओपन सर्जरी कर थायरॉयड ग्रंथि में जमा मवाद निकाला गया और सावधानीपूर्वक खोज के बाद मछली की हड्डी को बाहर निकाला गया। यह ऑपरेशन इसलिए भी बेहद संवेदनशील था क्योंकि थायरॉयड ग्रंथि के आसपास आवाज नियंत्रित करने वाली नसें और कैल्शियम संतुलन बनाए रखने वाली पैराथायरॉयड ग्रंथियां होती हैं। इनमें जरा-सी भी क्षति बच्ची के लिए गंभीर समस्या बन सकती थी।
डॉक्टरों की कुशलता और सटीक योजना के चलते सर्जरी पूरी तरह सफल रही। बच्ची की आवाज सामान्य बनी हुई है, शरीर में कैल्शियम का स्तर भी संतुलित है और वह अब पूरी तरह स्वस्थ होकर अपनी सामान्य दिनचर्या में लौट चुकी है।
विशेषज्ञों ने इस घटना के माध्यम से सावधानी बरतने की अपील की है। उनका कहना है कि मछली खाते समय विशेष सतर्कता जरूरी है, खासकर बच्चों को मछली खिलाते समय उसके कांटे पूरी तरह निकाल देना चाहिए। यदि मछली खाने के बाद गले में दर्द, निगलने में दिक्कत या सूजन जैसी समस्या बनी रहे, तो उसे नजरअंदाज न करते हुए तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। समय पर जांच और उपचार से ऐसी दुर्लभ लेकिन गंभीर स्थितियों से बचा जा सकता है।
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