पालघर: मुंबई–पुणे द्रुतगति मार्ग पर ‘मिसिंग लिंक’ से बड़ा बदलाव, यात्रा हुई तेज, सुरक्षित और सहज।
पालघर: मुंबई–पुणे द्रुतगति मार्ग पर ‘मिसिंग लिंक’ से बड़ा बदलाव, यात्रा हुई तेज, सुरक्षित और सहज।
अखिलेश चौबे
पालघर/मुंबई। महाराष्ट्र के सबसे महत्वपूर्ण यातायात मार्गों में शामिल मुंबई–पुणे द्रुतगति मार्ग (यशवंतराव चव्हाण एक्सप्रेसवे) पर हाल ही में शुरू किए गए ‘मिसिंग लिंक’ प्रोजेक्ट ने यात्रा व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला दिया है। 1 मई 2026 को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुए उद्घाटन के बाद इस मार्ग पर यात्रा करने वाले लोगों को अब एक नए अनुभव का अहसास हो रहा है। इस परियोजना ने न केवल यात्रा का समय घटाया है, बल्कि सुरक्षा और सुगमता को भी नई ऊंचाई दी है।
इस परियोजना की नींव वर्ष 2015 में महाराष्ट्र शासन के मंत्रालय की पायाभूत सुविधाएं समिति द्वारा रखी गई थी, जिसे 2025-2026 के बीच पूर्ण किया गया। इस दौरान राज्य सरकार और महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास महामंडल (MSRDC) की तेज कार्यशैली और परियोजना पूर्ण करने की क्षमता स्पष्ट रूप से सामने आई है। इसी कालखंड में समृद्धि महामार्ग जैसे बड़े प्रोजेक्ट भी पूरे किए गए।
पहले मुंबई–पुणे राष्ट्रीय महामार्ग पर खोपोली घाट में भारी ट्रैफिक जाम लगता था, जिससे यात्रा में 7 से 8 घंटे तक का समय लग जाता था। द्रुतगति मार्ग बनने के बाद यह समय घटकर 4 से 5 घंटे हुआ, लेकिन अब ‘मिसिंग लिंक’ के शुरू होने से यह दूरी महज 2 से 3 घंटे में तय की जा सकती है। इस परियोजना में विशाल टनल (बोगदा) और केबल स्टे ब्रिज का निर्माण किया गया है, जिससे घाट क्षेत्र की जटिल घुमावदार सड़कों को काफी हद तक सीधा और आसान बना दिया गया है।
इस नए टनल की विशेषता इसकी चौड़ाई और ऊंचाई है। लगभग 23 मीटर चौड़ा और 10 मीटर ऊंचा यह टनल आधुनिक लाइटिंग सिस्टम से लैस है, जिसे विश्व स्तर पर भी उल्लेखनीय माना जा रहा है। इस परियोजना से वाहन चालकों को सुरक्षित, तेज और बिना बाधा के सफर की सुविधा मिल रही है।
पहले खालापुर फूड मॉल से कुसगांव तक का लोणावला–खंडाला घाट क्षेत्र बेहद कठिन माना जाता था। इस दौरान वलवण कनेक्टर, लोणावला और खंडाला एक्जिट, अमृतांजन ब्रिज, दस्तुरी पॉइंट, अडोशी टनल, खंडाला टनल, वाय पॉइंट और खोपोली एक्जिट जैसे कई महत्वपूर्ण स्थान यात्रा का हिस्सा होते थे। मानसून के दौरान यहां के झरने, हरियाली और पहाड़ यात्रियों को आकर्षित करते थे, लेकिन साथ ही भूस्खलन और दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता था।
नए ‘मिसिंग लिंक’ प्रोजेक्ट के बाद अब इन पारंपरिक घाट मार्गों का उपयोग काफी कम हो गया है। पहले जहां दस्तुरी पॉइंट पर खराब गाड़ियों की मरम्मत करते मेकैनिक और दोपहिया वाहन दिखाई देते थे, वहीं अब यह दृश्य लगभग समाप्त हो गया है। साथ ही टाइगर वैली, खंडाला के झरने, रेलवे लाइन के दृश्य और घाट के मनोरम नजारे भी अब यात्रियों को पहले की तरह दिखाई नहीं देंगे।
इस परियोजना की एक खास बात यह भी है कि मालवाहक वाहनों को पुराने मार्ग पर रखा गया है, जबकि निजी और यात्री वाहनों को ‘मिसिंग लिंक’ के जरिए भेजा जा रहा है, जिससे ट्रैफिक का संतुलन और सुरक्षा दोनों सुनिश्चित हुए हैं।
मुंबई–पुणे द्रुतगति मार्ग की शुरुआत लगभग 1600 करोड़ रुपये की लागत से हुई थी, जो बढ़कर 2100 करोड़ रुपये तक पहुंची। दिलचस्प बात यह है कि ‘मिसिंग लिंक’ परियोजना की लागत भी करीब 1600 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
हालांकि इस विकास के साथ कुछ भावनात्मक पहलू भी जुड़े हैं। पुराने घाट मार्ग के प्राकृतिक दृश्य, झरने, और ऐतिहासिक पॉइंट अब धीरे-धीरे यात्रियों की नजरों से ओझल हो रहे हैं। यह बदलाव यह दर्शाता है कि विकास के लिए कुछ पुरानी यादों को पीछे छोड़ना पड़ता है।
कुल मिलाकर, मुंबई–पुणे द्रुतगति मार्ग पर ‘मिसिंग लिंक’ परियोजना ने यात्रा को तेज, सुरक्षित और आधुनिक बना दिया है। यह प्रोजेक्ट महाराष्ट्र के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो रहा है, जो आने वाले समय में लाखों यात्रियों के सफर को और अधिक सुविधाजनक बनाएगा।
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