पालघर: दुर्गम क्षेत्रों में खाद्यान्न भंडारण और स्वास्थ्य केंद्रों में दवाओं की उपलब्धता अनिवार्य: गणेश नाईक।पूर जैसी स्थिति में नागरिकों को तुरंत सहायता मिलना जरूरी, प्रशासन को विस्तृत तैयारी के निर्देश।
पालघर: दुर्गम क्षेत्रों में खाद्यान्न भंडारण और स्वास्थ्य केंद्रों में दवाओं की उपलब्धता अनिवार्य: गणेश नाईक।
पूर जैसी स्थिति में नागरिकों को तुरंत सहायता मिलना जरूरी, प्रशासन को विस्तृत तैयारी के निर्देश।
अखिलेश चौबे
पालघर। संभावित अतिवृष्टि, बाढ़ की स्थिति, स्वास्थ्य सेवाएं, खाद्यान्न आपूर्ति और आपातकालीन तंत्र की तैयारी को लेकर जिला प्रशासन को व्यापक और ठोस योजना बनाने के निर्देश दिए गए हैं। यह बात वन मंत्री तथा पालघर जिले के पालकमंत्री गणेश नाईक ने कही। वे जिलाधिकारी कार्यालय में आयोजित मानसून पूर्व समीक्षा बैठक और खरीफ नियोजन बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।
इस बैठक में सांसद डॉ. हेमंत सवरा, जिलाधिकारी डॉ. इंदु राणी जाखड़, वसई-विरार शहर महानगरपालिका के आयुक्त पृथ्वीराज बी. पी., डहाणू के परियोजना अधिकारी तथा सहायक जिलाधिकारी विशाल खत्री, निवासी उपजिल्हाधिकारी सुभाष भागडे और पालकमंत्री के निजी सचिव भावनजी आगे पाटील सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
बैठक में गणेश नाईक ने विशेष रूप से दुर्गम वाडियों और बस्तियों पर ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भारी बारिश के दौरान इन क्षेत्रों में नागरिकों के फंसने की आशंका रहती है, इसलिए वहां पहले से ही खाद्यान्न और आवश्यक वस्तुओं का पर्याप्त भंडारण किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि नागरिकों को सात से आठ दिनों तक गांव से बाहर निकलना संभव न हो, तो उन्हें स्थानीय स्तर पर ही चाय, शक्कर, बिस्किट और अन्य आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इस संदर्भ में उन्होंने नवी मुंबई महानगरपालिका की आपदा प्रबंधन प्रणाली का उदाहरण भी प्रस्तुत किया।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित राहत पहुंचाने के लिए ऊंचे विशेष वाहनों की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए। इसके साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में सर्पदंश के उपचार सहित सभी जरूरी दवाओं का पर्याप्त स्टॉक रखने पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में भी दवाओं की गुणवत्ता प्रभावित नहीं होनी चाहिए, इसके लिए आवश्यक उपाय किए जाएं।
शहरी क्षेत्रों में खुले विद्युत तारों, ट्रांसफॉर्मरों और बाढ़ के दौरान संभावित दुर्घटनाओं को ध्यान में रखते हुए विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए। साथ ही, जलभराव वाले ‘हॉटस्पॉट’ क्षेत्रों की पहले से पहचान कर वहां नागरिकों की सुरक्षा के लिए प्रभावी योजना बनाने को कहा गया।
गणेश नाईक ने नवी मुंबई में लागू ‘होल्डिंग पोंड’ प्रणाली का उल्लेख करते हुए बताया कि इससे बाढ़ की स्थिति को नियंत्रित करने में मदद मिली है। उन्होंने संकेत दिया कि पालघर जिले में भी इस तरह की परियोजनाओं को गति दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि जनहित के लिए केंद्र और राज्य सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और हर संभव सहयोग प्रदान किया जाएगा।
आपदा प्रबंधन से जुड़ी जानकारी को सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से प्रभावी ढंग से लोगों तक पहुंचाने के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने कहा कि नागरिकों को यह जानकारी होना आवश्यक है कि आपदा के समय क्या सावधानियां बरतनी चाहिए, प्रशासन की क्या सलाह है और किस प्रकार स्थिति का सामना करना है। इसके लिए जनजागरूकता अभियान को और तेज करने पर जोर दिया गया।
इस बैठक के माध्यम से प्रशासन को स्पष्ट संदेश दिया गया कि मानसून से पहले सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली जाएं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में नागरिकों को समय पर और प्रभावी सहायता मिल सके।
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