पालघर: नशे की दलदल में धंसता बचपन: पालघर में मासूम हाथों में किताब की जगह जहर।व्हाइटनर और सुलेशन सूंघकर नशे में डूब रहे बच्चे, गरीबी और लापरवाही बना रही अपराध की नई फौज।

पालघर: नशे की दलदल में धंसता बचपन: पालघर में मासूम हाथों में किताब की जगह जहर।
व्हाइटनर और सुलेशन सूंघकर नशे में डूब रहे बच्चे, गरीबी और लापरवाही बना रही अपराध की नई फौज।

अखिलेश चौबे 
पालघर। राज्य सरकार और प्रशासन की कथित अनदेखी के चलते गरीब परिवारों के बच्चे, खासकर भीख मांगने वाले और कबाड़ बीनने वाले नौनिहाल, अब नशे के शिकंजे में फंसते जा रहे हैं।
पालघर, बोईसर, डहाणू, वानगांव, वसई-विरार और नालासोपारा जैसे इलाकों में छोटे-छोटे बच्चों को खुलेआम व्हाइटनर, सुलेशन और अन्य केमिकल पदार्थों का नशा करते देखा जा सकता है। ये बच्चे स्कूल जाने की उम्र में किताब-कॉपी छोड़कर सड़कों पर भटक रहे हैं और नशे के लिए साइकिल दुकानों व स्टेशनरी दुकानों से सुलेशन और व्हाइटनर खरीद रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, ये बच्चे इन केमिकल्स को कपड़े या पॉलीथिन में डालकर जोर-जोर से सूंघते हैं, जिससे उन्हें नशे का असर होता है और वे घंटों किसी कोने में बेसुध पड़े रहते हैं। यह स्थिति न केवल उनके स्वास्थ्य के लिए घातक है, बल्कि उन्हें धीरे-धीरे अपराध की दुनिया की ओर भी धकेल रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब इन बच्चों को नशे के लिए पैसे नहीं मिलते, तो वे चोरी, छीना-झपटी और अन्य आपराधिक गतिविधियों की ओर बढ़ जाते हैं, जिससे समाज में असुरक्षा का माहौल बनता जा रहा है।
वहीं, *बोईसर पुलिस* द्वारा स्कूली बच्चों और युवाओं में नशे के खिलाफ लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। साथ ही नशे के अवैध धंधों पर कार्रवाई भी की जा रही है, लेकिन इसके बावजूद हालात पूरी तरह काबू में नहीं आ पा रहे हैं।

*नमो नमो मोर्चा भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्यप्रकाश सिंह* ने दैनिक मुंबई राजनीति न्यूज़ से इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि नशे की लत में डूबे बच्चे जब आर्थिक रूप से असहाय होते हैं, तो वे अपराध की ओर बढ़ने लगते हैं। उन्होंने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए परिवार, समाज और सामाजिक संगठनों को आगे आना होगा। जनजागरूकता के माध्यम से ही इस तरह की गतिविधियों पर रोक लगाई जा सकती है। साथ ही उन्होंने पुलिस प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की।

*डॉ. अमित यादव* ने भी दैनिक मुंबई राजनीति न्यूज़ के मध्य से चेतावनी देते हुए बताया कि किसी भी प्रकार का नशा बच्चों के लिए अत्यंत खतरनाक होता है। यदि कोई बच्चा पहली बार ही अधिक मात्रा में इन केमिकल्स का सेवन कर लेता है, तो उसकी हृदय गति अनियमित हो सकती है, ब्लड प्रेशर गिर सकता है और मौत तक हो सकती है। उन्होंने कहा कि सुलेशन और इंक रिमूवर जैसे पदार्थों से बच्चों में ‘यूफोरिक इफेक्ट’ होता है, जो धीरे-धीरे कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। आज स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि यदि समय रहते इस पर कड़ी कार्रवाई और ठोस पहल नहीं की गई, तो आने वाले समय में यह समस्या समाज के लिए एक बड़े संकट का रूप ले सकती है।


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