पालघर: बोईसर में भव्य रक्तदान शिविर का आयोजन, 126 रक्तदाताओं ने किया रक्तदान — 3000 सीड बॉल्स का भी वितरण।किरण थोरात ने 107वीं बार रक्तदान कर पेश की मिसाल।
पालघर: बोईसर में भव्य रक्तदान शिविर का आयोजन, 126 रक्तदाताओं ने किया रक्तदान — 3000 सीड बॉल्स का भी वितरण।
किरण थोरात ने 107वीं बार रक्तदान कर पेश की मिसाल।
अखिलेश चौबे
पालघर। जिले के बोईसर में हरिदया फाउंडेशन (रजि.) द्वारा एक भव्य और सामाजिक सरोकारों से जुड़ा रक्तदान शिविर आयोजित किया गया, जिसमें कुल 126 रक्तदाताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर रक्तदान किया। यह कार्यक्रम समाजसेवा, पर्यावरण संरक्षण और जनजागरूकता का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया।
इस शिविर की सबसे खास बात यह रही कि रक्त कर्ण प्राध्यापक किरण थोरात ने 107वीं बार रक्तदान कर समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया। उनके इस योगदान की कार्यक्रम में विशेष सराहना की गई।
इस रक्तदान शिविर में दो प्रमुख रक्त बैंकों का सहयोग रहा, जिनमें एसबीटीसी (पालघर), पतंगशाह कुटीर रुग्णालय रक्त केंद्र, जव्हार शामिल रहे। दोनों रक्त बैंकों के स्टाफ का गुलाब का फूल देकर सम्मानपूर्वक आभार व्यक्त किया गया।
कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देते हुए कुल 3000 सीड बॉल्स का वितरण भी किया गया, जिससे अधिक से अधिक वृक्षारोपण को प्रोत्साहन मिल सके।
इसके साथ ही उपस्थित लोगों को नेत्रदान, अंगदान एवं देहदान के महत्व के बारे में जागरूक किया गया। आयोजकों ने बताया कि इन विषयों पर समाज में जागरूकता बढ़ाना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
कार्यक्रम की शुरुआत छत्रपती शिवाजी महाराज की पूर्णाकृति प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित करके की गई। वहीं बोईसर रेलवे स्टेशन के स्टेशन सुपरिंटेंडेंट को पुष्पगुच्छ भेंट कर उनके सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया गया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में विजय पाटील, रवींद्र यादव, मुकेश, योगेश, शिवाजी और शैलेश सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अथक परिश्रम किया।
इस कार्यक्रम के आयोजक हरिदया फाउंडेशन (रजि.), बोईसर के अध्यक्ष डॉ. राजेश हरिनाथ यादव रहे। उन्होंने सभी रक्तदाताओं, सहयोगियों और कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन आगे भी निरंतर किए जाएंगे, ताकि समाज में सेवा और जागरूकता का संदेश फैलता रहे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जिससे पूरे आयोजन का समापन एक गरिमामय वातावरण में हुआ।
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