पालघर: वाढवण बंदर परियोजना: मछुआरों के सर्वेक्षण को लेकर जिलाधिकारी डॉ. इंदु रानी जाखड़ की अध्यक्षता में बैठक संपन्न।"मछुआरों का सामाजिक, आर्थिक और आजीविका आधारित सर्वेक्षण अत्यंत आवश्यक: जिलाधिकारी डॉ. इंदु रानी जाखड़"
पालघर: वाढवण बंदर परियोजना: मछुआरों के सर्वेक्षण को लेकर जिलाधिकारी डॉ. इंदु रानी जाखड़ की अध्यक्षता में बैठक संपन्न।
"मछुआरों का सामाजिक, आर्थिक और आजीविका आधारित सर्वेक्षण अत्यंत आवश्यक: जिलाधिकारी डॉ. इंदु रानी जाखड़"
अखिलेश चौबे
पालघर। प्रस्तावित वाढवण बंदर परियोजना क्षेत्र में रहने वाले मछुआरों का सामाजिक, आर्थिक तथा आजीविका के दृष्टिकोण से विस्तृत सर्वेक्षण किया जाना अत्यंत आवश्यक है, ऐसा प्रतिपादन जिलाधिकारी डॉ. इंदु रानी जाखड़ ने किया।
प्रस्तावित वाढवण बंदर परियोजना की पृष्ठभूमि में प्रभावित क्षेत्र के मछुआरों का गहन और वैज्ञानिक सर्वेक्षण किए जाने के संबंध में जिलाधिकारी कार्यालय, पालघर में जिलाधिकारी डॉ. इंदु रानी जाखड़ की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में सर्वेक्षण के महत्व, उसकी आवश्यकता तथा नीति निर्धारण को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
इस बैठक में पुलिस अधीक्षक यतीश देशमुख, उपजिलाधिकारी तेजस चव्हाण, महेश सागर, जवाहरलाल नेहरू पोर्ट प्राधिकरण के सलाहकार राजीव सिन्हा, सहायक आयुक्त (मत्स्य व्यवसाय) ठाणे–पालघर, विभिन्न संबंधित विभागों के अधिकारी, प्रभावित क्षेत्र की मछुआरा संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा मछुआरा संगठनों के पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
बैठक में जिलाधिकारी डॉ. इंदु रानी जाखड़ ने कहा कि प्रस्तावित वाढवण बंदर क्षेत्र के मछुआरों की वास्तविक सामाजिक, आर्थिक स्थिति और उनकी आजीविका पर पड़ने वाले प्रभाव का सटीक आकलन करने के लिए सर्वेक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है। मछुआरों के अधिकारों की सही पहचान, उनकी जीवनशैली पर परियोजना के प्रभाव और भविष्य में लिए जाने वाले नीतिगत निर्णयों के लिए यह सर्वेक्षण आधारभूत भूमिका निभाएगा।
इस अवसर पर संबंधित विभागों के अधिकारियों तथा प्रभावित क्षेत्र की मछुआरा संस्थाओं और संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपने विचार प्रस्तुत किए और सर्वेक्षण की कार्यप्रणाली को लेकर विस्तृत चर्चा की। सर्वेक्षण किस प्रकार किया जाए और उसकी नीति कैसी हो, इस पर विभिन्न बिंदुओं पर विचार-विमर्श किया गया।
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जवाहरलाल नेहरू पोर्ट प्राधिकरण के अधिकारियों ने प्राथमिक सर्वेक्षण के संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए सर्वेक्षण प्रक्रिया की रूपरेखा भी स्पष्ट की।
बैठक के अंत में प्रभावित क्षेत्र की मछुआरा संस्थाओं और संगठनों के प्रतिनिधियों ने यह मांग रखी कि वर्तमान में प्रभावित हो रहे 16 गांवों का सर्वेक्षण पूर्ण होने के बाद प्रस्तावित वाढवण बंदर क्षेत्र के अन्य मछुआरों का भी सर्वेक्षण किया जाना आवश्यक है। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जवाहरलाल नेहरू पोर्ट प्राधिकरण के माध्यम से किए जाने वाले सर्वेक्षण कार्य में पूर्ण सहयोग प्रदान किया जाएगा।
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