पालघर: बोईसर एमआईडीसी में गोवंश के कथित हत्या के अवशेष मिलने से सनसनी।कोलवडे ग्राम पंचायत क्षेत्र के डंपिंग ग्राउंड के बाहर मिले अवशेष।
पालघर: बोईसर एमआईडीसी में गोवंश के कथित हत्या के अवशेष मिलने से सनसनी।
कोलवडे ग्राम पंचायत क्षेत्र के डंपिंग ग्राउंड के बाहर मिले अवशेष।
अखिलेश चौबे
पालघर। हिंदू त्योहारों से पहले जिले के औद्योगिक बोईसर शहर में गोवंश के कथित वध के अवशेष मिलने की जानकारी सामने आने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई है। मामला बोईसर एमआईडीसी परिसर के कोलवडे ग्राम पंचायत क्षेत्र स्थित डंपिंग ग्राउंड के बाहर का बताया जा रहा है। घटना की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय नागरिकों में नाराजगी के साथ-साथ कई सवाल भी उठने लगे हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, घटना से पहले रात के अंधेरे में कुछ लोगों द्वारा गोवंश को कथित रूप से अगवा किए जाने का आरोप लगाया जा रहा है। इसके बाद उन्हें इंजेक्शन दिए जाने और कथित तौर पर वध किए जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि वध के बाद आवश्यक अंग अपने साथ ले जाए गए, जबकि अन्य अवशेष घटनास्थल पर ही छोड़ दिए गए। हालांकि, इन सभी आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
घटना की जानकारी मिलते ही एमआईडीसी परिसर के स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस दल ने घटनास्थल पर पहुंचकर पंचनामा किया तथा वहां से आवश्यक नमूने एकत्र किए। इन नमूनों को प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया है। प्रयोगशाला की रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटनास्थल पर मिले अवशेष वास्तव में किस प्रकार के थे और पूरे मामले की वास्तविकता क्या है।
घटना को लेकर स्थानीय नागरिकों ने पुलिस प्रशासन से मामले की गहन जांच करने, घटनास्थल के आसपास की गतिविधियों की जानकारी जुटाने तथा यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।
इस घटनाक्रम के बीच बोईसर शहर में खुले में घूमने वाले गोवंश और पशुपालकों की जिम्मेदारी का मुद्दा भी सामने आया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले एक वर्ष से क्षेत्र में खुले में घूमने वाले गोवंश को लेकर चिंता जताई जाती रही है। नागरिकों का सवाल है कि यदि पशुओं को लावारिस छोड़ा जाता है तो उनकी सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी किसकी होगी।
कुछ स्थानीय लोगों ने आशंका जताई है कि खुले में घूमने वाले गोवंश का कथित रूप से गलत गतिविधियों के लिए फायदा उठाया जा सकता है। ऐसे में यदि जांच के दौरान गोवंश की तस्करी या अवैध वध की पुष्टि होती है, तो इसके पीछे कौन लोग हैं और क्या इसके पीछे कोई संगठित तंत्र काम कर रहा है, इसकी भी जांच आवश्यक होगी।
इसी घटनाक्रम के बीच एक बछड़े को बचाए जाने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, इस बछड़े का घटनास्थल पर मिले अवशेषों से कोई सीधा संबंध है या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है। इसका संबंध भी जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।
घटना ने एमआईडीसी जैसे औद्योगिक क्षेत्र में रात के समय होने वाली गतिविधियों की निगरानी पर भी सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय नागरिक यह जानना चाहते हैं कि यदि वास्तव में ऐसी घटना हुई है तो संबंधित लोगों ने घटनास्थल तक पहुंचने के लिए किस मार्ग का इस्तेमाल किया, क्या आसपास पहले से कोई निगरानी या रेकी की गई थी और गोवंश को कहीं अन्य स्थान से लाया गया था।
फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और प्रयोगशाला रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट तथा पुलिस जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। बड़ा सवाल—बोईसर एमआईडीसी में मिले गोवंश के कथित वध के अवशेषों के पीछे आखिर कौन है? पुलिस जांच इस पूरे मामले की तह तक कब पहुंचेगी, यह अब देखने वाली बात होगी।
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