मुंबई: माँ का दूध ही नवजात का पहला और सर्वोत्तम आहार, पहले छह माह तक केवल स्तनपान की सलाह।

मुंबई: माँ का दूध ही नवजात का पहला और सर्वोत्तम आहार, पहले छह माह तक केवल स्तनपान की सलाह।

अखिलेश चौबे 
मुंबई। विश्व स्तनपान सप्ताह (1 से 7 अगस्त) के अवसर पर एपेक्स ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स, मुंबई के विशेषज्ञों ने नवजात शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य के लिए जन्म के पहले एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करने तथा जीवन के पहले छह महीनों तक केवल माँ का दूध पिलाने के महत्व पर विशेष जोर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्तनपान प्रकृति का सबसे सुरक्षित, संपूर्ण और प्रभावी पोषण है, लेकिन इसकी सफल शुरुआत के लिए समय पर चिकित्सकीय परामर्श, उचित मार्गदर्शन तथा परिवार, कार्यस्थल और स्वास्थ्य सेवाओं का सहयोग अत्यंत आवश्यक है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जन्म के बाद का पहला घंटा, जिसे "गोल्डन आवर" कहा जाता है, नवजात शिशु के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। इस दौरान स्तनपान शुरू करने से शिशु को माँ के दूध में मौजूद आवश्यक प्रतिरक्षी तत्व (एंटीबॉडी) प्राप्त होते हैं, जो संक्रमणों से सुरक्षा प्रदान करते हैं और उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं। इससे नवजात मृत्यु दर में कमी आती है तथा लंबे समय तक सफल स्तनपान की मजबूत नींव तैयार होती है।
चिकित्सकों ने बताया कि जन्म के बाद पहले छह महीनों तक केवल माँ का दूध शिशु के लिए संपूर्ण आहार है। इसमें सभी आवश्यक पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होते हैं, जो शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नियमित स्तनपान से मस्तिष्क का विकास बेहतर होता है तथा भविष्य में श्वसन संक्रमण, दस्त, मोटापा, मधुमेह और एलर्जी जैसी अनेक गंभीर बीमारियों का खतरा भी कम हो जाता है।
विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया कि स्तनपान केवल शिशु के लिए ही नहीं, बल्कि माँ के स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। इससे प्रसव के बाद शरीर जल्दी सामान्य अवस्था में लौटता है, गर्भाशय को अपने प्राकृतिक आकार में आने में सहायता मिलती है, मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य बेहतर रहता है तथा भविष्य में स्तन और अंडाशय के कैंसर का जोखिम भी कम होता है।
एपेक्स ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स, मुंबई की कंसल्टेंट स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. रसिका वाघ जाधव ने कहा कि जन्म के बाद का पहला घंटा प्रत्येक शिशु को स्वस्थ जीवन की सर्वोत्तम शुरुआत देने का अमूल्य अवसर होता है। उन्होंने कहा कि इसी समय कराया गया स्तनपान नवजात को आवश्यक प्रतिरक्षी तत्व प्रदान करता है, संक्रमणों से बचाता है और उसकी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाता है। उनके अनुसार स्तनपान एक स्वाभाविक प्रक्रिया अवश्य है, लेकिन प्रत्येक माँ को सही मार्गदर्शन, आत्मविश्वास और प्रोत्साहन की आवश्यकता होती है। गर्भावस्था के दौरान उचित परामर्श तथा प्रसव के तुरंत बाद मिलने वाला चिकित्सकीय सहयोग सफल स्तनपान सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
विशेषज्ञों ने इस अवसर पर यह भी कहा कि स्तनपान केवल माँ की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि परिवार, नियोक्ता, स्वास्थ्यकर्मी और समाज सभी की समान जिम्मेदारी है कि वे ऐसा सहयोगात्मक वातावरण तैयार करें, जहाँ प्रत्येक माँ बिना किसी दबाव के आत्मविश्वास के साथ अपने शिशु को स्तनपान करा सके।
विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर एपेक्स ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स ने संदेश दिया कि प्रत्येक बच्चे को स्वस्थ जीवन की सर्वोत्तम शुरुआत मिलनी चाहिए और इसकी शुरुआत जन्म के पहले घंटे में समय पर स्तनपान कराने से होती है। विशेषज्ञों ने सभी अभिभावकों से अपील की कि वे स्तनपान के महत्व को समझें, माताओं को आवश्यक सहयोग प्रदान करें और नवजात शिशुओं के स्वस्थ भविष्य के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।

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