पालघर: जिले में ‘पंच सम्मेलन’ का आयोजन, ग्रामीण रोजगार और आजीविका योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर।
पालघर: जिले में ‘पंच सम्मेलन’ का आयोजन, ग्रामीण रोजगार और आजीविका योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर।
अखिलेश चौबे
पालघर। ‘विकसित भारत–रोजगार व आजीविका गारंटी अभियान (ग्रामीण), अधिनियम २०२५’ के प्रभावी क्रियान्वयन तथा पंचायत राज संस्थाओं की भूमिका को और अधिक सक्षम बनाने के उद्देश्य से पालघर में जिला स्तरीय ‘पंच सम्मेलन’ का आयोजन किया गया। यह अधिनियम १ जुलाई २०२६ से लागू हुआ है। जिला परिषद पालघर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज रानडे के मार्गदर्शन में १२ अगस्त को जिला परिषद पालघर के बिरसा मुंडा सभागृह में यह सम्मेलन आयोजित किया गया।
सम्मेलन में पंचायत राज संस्थाओं से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को अधिनियम के उद्देश्यों, पंचायत राज संस्थाओं की भूमिका तथा उनकी जिम्मेदारियों के संबंध में विस्तृत मार्गदर्शन दिया गया। उप जिला कार्यक्रम समन्वयक (वीबी-जी-रैम-जी) अतुल पारसकर ने तालुका स्तर के सहायक कार्यक्रम अधिकारियों, तकनीकी सहायकों तथा लिपिक-सह-आंकड़ा प्रविष्टि संचालकों को विभिन्न विषयों की जानकारी दी।
सम्मेलन में विकसित ग्राम पंचायत योजना, परिवार पंजीकरण, ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड का वितरण, विकास कार्यों का नियोजन एवं क्रियान्वयन, विभिन्न शासकीय योजनाओं के साथ समन्वय, पारदर्शिता, शिकायत निवारण तथा सामाजिक लेखा परीक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। पंचायत स्तर पर योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने और ग्रामीण नागरिकों को योजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाने के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं की जानकारी भी दी गई।
जिला स्तरीय पंच सम्मेलन के बाद १५ अगस्त २०२६ तक तालुका स्तर पर भी पंच सम्मेलन आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। इन सम्मेलनों में जिला परिषद, पंचायत समिति और ग्राम पंचायत स्तर की पंचायत राज संस्थाओं के तीनों स्तरों पर निर्वाचित जनप्रतिनिधियों तथा पदाधिकारियों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।
तालुका स्तरीय सम्मेलनों में ‘विकसित भारत–रोजगार व आजीविका गारंटी अभियान’ के उद्देश्यों, जनप्रतिनिधियों की भूमिका, विकसित ग्राम पंचायत योजना तथा विभिन्न योजनाओं के पारदर्शी और प्रभावी क्रियान्वयन पर मार्गदर्शन किया जाएगा। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने, आजीविका के साधनों को मजबूत करने तथा विकास कार्यों को गति देने के लिए पंचायत राज संस्थाओं की भूमिका पर विशेष जोर दिया जाएगा।
इस पहल के माध्यम से पंचायत राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होने की उम्मीद है। योजनाओं के नियोजन से लेकर उनके क्रियान्वयन, पारदर्शिता, शिकायत निवारण और सामाजिक लेखा परीक्षण तक प्रत्येक स्तर पर अधिक प्रभावी सहभागिता सुनिश्चित करने में इन सम्मेलनों की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।
जिला परिषद पालघर की इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और विकास कार्यों से संबंधित योजनाओं को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और प्रभावी तरीके से लागू करने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
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