पालघर: नाबालिग बच्चों का अपहरण कर पोल्ट्री फार्म में कराई जा रही थी मजदूरी, जव्हार पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार।
पालघर: नाबालिग बच्चों का अपहरण कर पोल्ट्री फार्म में कराई जा रही थी मजदूरी, जव्हार पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार।
अखिलेश चौबे
पालघर। जिले की जव्हार पुलिस ने दो नाबालिग बालकों के अपहरण, बाल मजदूरी और बंधुआ मजदूरी से जुड़े गंभीर मामले का सफलतापूर्वक खुलासा करते हुए दोनों बालकों को सकुशल मुक्त कराया है। मामले में आरोपी सचिन नारायण धसाडे निवासी कोणे, तहसील वाडा, जिला पालघर को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे 7 अगस्त 2026 तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।
पुलिस के अनुसार, 1 अगस्त 2026 को सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे के बीच धारणहट्टी, तहसील जव्हार, जिला पालघर निवासी दो नाबालिग बालक, जिनकी आयु क्रमशः 15 वर्ष और 12 वर्ष है, अपने परिवार की वैधानिक अभिरक्षा से लापता हो गए थे। परिजनों की शिकायत के आधार पर 2 अगस्त 2026 को जव्हार पुलिस थाना में अपराध क्रमांक 1129/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 137(2) के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पालघर के पुलिस अधीक्षक यतिश देशमुख के मार्गदर्शन में जव्हार पुलिस थाना के प्रभारी अधिकारी किरण पवार तथा वाडा पुलिस थाना के प्रभारी अधिकारी नागेश कदम के नेतृत्व में विशेष पुलिस दल का गठन किया गया। पुलिस टीम ने गोपनीय सूचना और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर जांच प्रारंभ की।
जांच के दौरान वाडा पुलिस की सहायता से वाडा पुलिस थाना क्षेत्र में खोजबीन की गई। जांच में सामने आया कि आरोपी सचिन नारायण धसाडे ने 1 अगस्त 2026 को दोपहर लगभग 2 बजे खडखड डैम के पास मोटरसाइकिल से पहुंचकर दोनों नाबालिग बालकों को अपने साथ ले लिया। आरोपी ने बालकों के परिवार के किसी सदस्य को इसकी जानकारी नहीं दी और न ही उनके माता-पिता से बातचीत कराई।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी को यह जानकारी थी कि दोनों बालक नाबालिग हैं। इसके बावजूद उसने उन्हें प्रतिमाह पांच हजार रुपये वेतन देने का लालच देकर अपने गांव मौजा कोणे, तहसील वाडा स्थित पोल्ट्री फार्म पर ले जाकर जबरन काम कराया। जब दोनों बालकों ने घर लौटने की इच्छा व्यक्त की तो आरोपी ने उन्हें दो दिनों तक पोल्ट्री फार्म में बंधक बनाकर जबरन मजदूरी कराई।
इस खुलासे के बाद पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता की धाराएं 143(2), 143(4) और 143(5) भी जोड़ीं। इसके अलावा बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 की धारा 14 तथा बंधुआ मजदूरी प्रथा (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 की धाराएं 16 और 18 के अंतर्गत भी आरोपी के विरुद्ध कार्रवाई की गई।
गिरफ्तार आरोपी सचिन नारायण धसाडे को 4 अगस्त 2026 को प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी न्यायालय, जव्हार में पेश किया गया, जहां न्यायालय ने उसे 7 अगस्त 2026 तक पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया। मामले की आगे की जांच पुलिस उपनिरीक्षक अरुण जाधव, नियुक्ति जव्हार पुलिस थाना, द्वारा की जा रही है।
पालघर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि बाल मजदूरी और बंधुआ मजदूरी कानून की दृष्टि में अत्यंत गंभीर एवं संज्ञेय अपराध हैं। यदि किसी भी स्थान पर बच्चों से जबरन मजदूरी कराई जा रही हो या उन्हें बंधक बनाकर काम कराया जा रहा हो, तो इसकी सूचना तत्काल निकटतम पुलिस थाना अथवा आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर 112 पर दें, ताकि दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सके।
इस संपूर्ण कार्रवाई को पालघर के पुलिस अधीक्षक यतिश देशमुख, अपर पुलिस अधीक्षक विनायक नरळे, जव्हार विभाग के उपविभागीय पुलिस अधिकारी समीर महेर, जव्हार पुलिस थाना के प्रभारी अधिकारी किरण पवार, वाडा पुलिस थाना के प्रभारी अधिकारी नागेश कदम के मार्गदर्शन में अंजाम दिया गया।
कार्रवाई में पुलिस उपनिरीक्षक अरुण जाधव, पुलिस हवलदार धोंडमारे, पुलिस हवलदार किणी, पुलिस नायक अहिरे, पुलिस नायक भोगडे, पुलिस आरक्षक अहिरे (सभी जव्हार पुलिस थाना), तथा पुलिस हवलदार सोनावणे (वाडा पुलिस थाना) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले के प्रत्येक पहलू की गहन जांच की जा रही है तथा दोषी के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
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