पालघर: जिले में 20 अगस्त से उर्वरक मांग की डिजिटल पंजीकरण व्यवस्था शुरू।मोबाइल से उर्वरक की मांग दर्ज कर सकेंगे किसान, ‘उर्वरक बिक्री के लिए रूपरेखा’ प्रणाली से बिक्री में बढ़ेगी पारदर्शिता।
पालघर: जिले में 20 अगस्त से उर्वरक मांग की डिजिटल पंजीकरण व्यवस्था शुरू।
मोबाइल से उर्वरक की मांग दर्ज कर सकेंगे किसान, ‘उर्वरक बिक्री के लिए रूपरेखा’ प्रणाली से बिक्री में बढ़ेगी पारदर्शिता।
अखिलेश चौबे
पालघर। खरीफ मौसम की पृष्ठभूमि में किसानों को रासायनिक उर्वरकों की उपलब्धता सरलता से सुनिश्चित करने तथा उर्वरक बिक्री प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से पालघर जिले में ‘उर्वरक बिक्री के लिए रूपरेखा’ नामक डिजिटल प्रणाली का उपयोग किया जाएगा। इस प्रणाली के माध्यम से 20 अगस्त 2026 से उर्वरक की मांग दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसकी जानकारी जिला परिषद पालघर के कृषि विभाग की ओर से दी गई है।
इस डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से किसान अपने मोबाइल फोन से अपनी आवश्यकता के अनुसार उर्वरक की मांग दर्ज कर सकेंगे। मांग दर्ज करते समय किसान का आधार क्रमांक, मोबाइल क्रमांक तथा आवश्यक उर्वरक की जानकारी दर्ज की जाएगी। इसके बाद संबंधित उर्वरक विक्रेता द्वारा उपलब्ध भंडार के अनुसार उर्वरक वितरण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
किसान द्वारा उर्वरक की मांग दर्ज करने के बाद उसके पंजीकृत मोबाइल क्रमांक पर संदेश प्राप्त होगा। इसके बाद एक बार उपयोग होने वाले संकेतांक के माध्यम से किसान की पहचान का सत्यापन कर उर्वरक वितरण की प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी। इस व्यवस्था से उर्वरक बिक्री में होने वाली अनियमितताओं पर रोक लगाने के साथ किसानों को आवश्यक मात्रा में और समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।
नई डिजिटल प्रणाली से किसानों को उर्वरक प्राप्त करने के लिए दुकानों पर अनावश्यक भीड़ करने की आवश्यकता भी कम होगी। साथ ही जिले में उपलब्ध उर्वरक भंडार की जानकारी का अधिक प्रभावी ढंग से प्रबंधन किया जा सकेगा। उर्वरक विक्रेताओं को भी उपलब्ध भंडार के अनुसार मांग और वितरण का नियोजन करने में सुविधा होगी।
कृषि विभाग के अनुसार किसानों को अपने मोबाइल फोन में गूगल प्ले स्टोर से ‘उर्वरक बिक्री के लिए रूपरेखा’ अनुप्रयोग डाउनलोड कर पंजीकरण करना होगा। पंजीकरण के लिए आवश्यक जानकारी भरने के बाद आधार क्रमांक और मोबाइल क्रमांक के माध्यम से सत्यापन किया जाएगा।
किसानों को पंजीकरण के दौरान अपने नाम पर अथवा संयुक्त स्वामित्व वाली कृषि भूमि की जानकारी, फसल का मौसम तथा आवश्यक उर्वरक की जानकारी दर्ज कर अपनी मांग प्रस्तुत करनी होगी। इससे किसानों की वास्तविक आवश्यकता के अनुसार उर्वरक की मांग और वितरण प्रक्रिया को व्यवस्थित करने में सहायता मिलेगी।
कृषि विकास अधिकारी, जिला परिषद पालघर सोमनाथ पिंजारी ने किसानों से इस डिजिटल सुविधा का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्रणाली के माध्यम से उर्वरक मांग और वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ने के साथ किसानों के लिए उर्वरक की मांग दर्ज करने तथा उसकी उपलब्धता सुनिश्चित करने की प्रक्रिया अधिक सरल होगी। किसानों को आवश्यक उर्वरक की मांग समय पर दर्ज करनी चाहिए, ताकि उन्हें समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने की प्रक्रिया सुचारु रूप से पूरी की जा सके।
कृषि विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी किसान को उर्वरक की उपलब्धता को लेकर परेशानी होती है अथवा उर्वरक बिक्री में किसी प्रकार की अनियमितता या शिकायत सामने आती है, तो वह संबंधित कृषि अधिकारी अथवा कृषि विभाग से संपर्क कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है।
नई डिजिटल व्यवस्था से पालघर जिले में उर्वरक वितरण व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और किसान-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जाने की उम्मीद है।
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