पालघर: खुले गटर, जाम नाले… बारिश से पहले ही खतरे की घंटी! बोईसर तारापुर MIDC में लापरवाही का खेल उजागर—जिम्मेदार कौन?
पालघर: खुले गटर, जाम नाले… बारिश से पहले ही खतरे की घंटी! बोईसर तारापुर MIDC में लापरवाही का खेल उजागर—जिम्मेदार कौन?
अखिलेश चौबे
पालघर। जिले के बोईसर स्थित तारापुर MIDC क्षेत्र में इन दिनों गंदगी, अव्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही ने मिलकर एक गंभीर स्थिति पैदा कर दी है। औद्योगिक क्षेत्र होने के बावजूद यहां बुनियादी सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई नजर आ रही है। इलाके में जगह-जगह गटर खुले पड़े हैं, जबकि अधिकांश नाले पूरी तरह जाम हो चुके हैं। नालों में प्लास्टिक, केमिकल युक्त कचरा और अन्य अपशिष्ट का अंबार जमा है, जिससे हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों और कामगारों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद न तो प्रशासन ने कोई ठोस कदम उठाया और न ही संबंधित जिम्मेदारों ने स्थिति सुधारने की पहल की। खुले गटर जहां दुर्घटनाओं को खुला न्योता दे रहे हैं, वहीं जाम नालों से उठती दुर्गंध ने पूरे क्षेत्र का वातावरण दूषित कर दिया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि आखिर इस बदहाल स्थिति के लिए जिम्मेदार कौन है?
क्या यह केवल प्रशासन की अनदेखी का नतीजा है, या फिर क्षेत्र में संचालित कंपनियों की भी इसमें बड़ी भूमिका है?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई कंपनियां अपने औद्योगिक कचरे और गंदे पानी को सीधे नालों में छोड़ देती हैं, जिससे नाले तेजी से जाम हो जाते हैं। केमिकल युक्त अपशिष्ट और ठोस कचरा नालों में जमा होकर पानी की निकासी को पूरी तरह बाधित कर देता है। वहीं, प्रशासन द्वारा नियमित सफाई और निगरानी नहीं होने से यह समस्या और भी विकराल रूप ले लेती है।
यानी एक ओर जहां कंपनियों की लापरवाही सवालों के घेरे में है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन की निष्क्रियता भी उतनी ही जिम्मेदार नजर आ रही है। दोनों के बीच समन्वय और जवाबदेही की कमी का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
स्थिति को और गंभीर बनाता है आसन्न मानसून। यदि समय रहते नालों की सफाई और गटरों को ढंकने का कार्य नहीं किया गया, तो बारिश के दौरान जलभराव की भयावह स्थिति उत्पन्न हो सकती है। सड़कों पर पानी भरने से यातायात बाधित होगा, उद्योगों का कामकाज प्रभावित होगा और आम लोगों का जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो जाएगा।
स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया है कि हर वर्ष बारिश से पहले सफाई के नाम पर केवल औपचारिकताएं निभाई जाती हैं, जबकि जमीनी स्तर पर कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं होती।
अब देखना यह है कि क्या प्रशासन और उद्योग प्रबंधन इस गंभीर चेतावनी को समय रहते समझेंगे,
या फिर किसी बड़े हादसे और जनआक्रोश के बाद ही नींद से जागेंगे?
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